आज करनी सेना और पद्मावती के संग्राम के बीच लोगो का ध्यान वापस इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर गया है
सन 1302 में चितौड के राजा थे रावल रतन सिंह
उनकी कई रानिया थी उनमे से एक थीं रानी पद्मिनी
सिंहल राज्य से ब्याह कर लेकर आये थे राजा रावल रतन सिंह
रानी पद्मिनी के सौंदर्य और चातुर्य की गाथा दूर दूर तक थी
चितौड़ मेवाड़ के अभेद दुर्ग में शामिल था
जिसको उस समय तक कोई न भेद पाया था
किले की ऊंची ऊंची दीवारे उसे अभेद बनाये रखने में मददगार थी
पहाड़ी पर निर्मित्त इसका दुर्ग लगभग ३ मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा रहा है

लोक गाथा अनुसार राजा के पुरोहित को दण्ड स्वरूप देश निकाला दिया गया जिसकी वजह से उसने अलाउद्दीन खिलजी को जा कर रानी के सौंदर्य का वर्णन किया
वही मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत के अनुसार हीरामन नाम के तोते ने जो पहले रानी पद्मिनी के साथ ही रहता था उसने अलाउद्दीन खिलजी को पद्मिनी के सौंदर्य का वर्णन किया था

इस प्रकार अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मिनी के बारे में पता चला और पता चलते ही उसने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया
तकरीबन 6 महीने घेराबंदी के बाद जब चित्तौड़ की ऊंची दीवारे अल्लाउद्दीन खिलजी नही भेद पाया तो उसने धोखे से राजा रावल रतन सिंह को कैद कर लिया
रानी पद्मिनी ,गोरा और बादल ने अपने अदम्य साहस और चातुर्य से राजा को खिलजी की कैद से आजाद करवाया
खिलजी ने इस से क्रोधित हो कर दुगुनी ताकत से चितौड़ पर आक्रमण कर दिया जिसमें कई राजपूत शहीद हो गए एव राजा रावल रतनसिंह भी वीरगति को प्राप्त हुए।
लोकगाथा अनुसार रानी पद्मिनी राजा रावल रतन सिह की चिता पर सती हुई
आज भी मेवाड़ की धरती रानी पद्मिनी को पूजती है ।
ये थी वीर और सौन्दर्यता की धनी रानी पद्मिनी
जिन्हें विवाद स्वरूप ही सही
नयी पीढ़ी को उनकी कहानी पता चली

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