पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सेना के अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों घुसपैठ में समर्थन करने वाली पोस्ट भारतीय सेना के लक्ष्य पर हैं. भारतीय सेना द्वारा कठोर कार्रवाई के परिणामस्वरूप 1 जनवरी से अब तक लगभग 20 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और कई अन्य घायल हो चुके है. भारतीय सेना बॉर्डर पर अपनी मजबूती कायम करने के लिये गोरिल्ला युद्ध प्रणाली एवं त्वरीत हमले की निति को अपनाये हुवे है.

भारतीय सेना पाकिस्तान को हर रोज नई गोलियां खिला रही है

सूत्रों से पता चला है की, “सेना  ने नियंत्रण रेखा पर अपने सभी कमांडिंग अधिकारियों को पर्याप्त आजादी दे रखी है. जिससे भारतीय सेना के हौसले बुलंद है.  भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को मुंह तोड़ जवाब दे रही है.  पाकिस्तानी सेना पर सैन्य दबाव को बढाने के लिये जो कार्यवाही की जा रही है, शायाद इसी का ही यह असर है कि इस महीने में 35 से अधिक रेड अलर्ट की घोषणा पाकिस्तानी सेना द्वारा इसके सीमावर्ती सैनिकों में की गयी है.  इसके साथ ही पकिस्तानी सेना के कमांडर नदीम रजा अपनी सीमा क्षेत्र का एक दर्जन से अधिक बार दौरा कर चुके है.

लगातार हमलों में कई पाकिस्तानी सेना की पोस्ट को ध्वस्त कर दिया गया. दोनों देश 780 किमी के एल ओ सी पर 120 मिमी भारी मोर्टार, लाइट फील्ड बंदूकों और एंटीटैंक गाइडेड मिसाइल का उपयोग कर रहे हैं. भारतीय सेना पाकिस्तान को हर रोज नई गोलियां खिला रही है

इन सब के साथ दोनों देशो के रक्षा मंत्रालय एक दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं और गर्म भाषा का आदान-प्रदान कर रहे हैं. कांग्रेस और अन्य दल पाकिस्तान को किसी भी ठोस संदेश देने में मोदी सरकार को नाकाम ठहराते हुए उनकी आलोचना कर रहे हैं.

अन्य बातें

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आतंकवाद निरोधी आपरेशन के बारे में भारतीय सेना का बयान सामने आया. भारतीय सेना ने हाल ही में एक मुठभेड़ में चार आतंकवादियों को मार गिराया था और सेना कश्मीर में नियंत्रण रेखा के नौगुम सेक्टर में आतंकियों की सीमा उलंघन की कोशिश को नाकाम करने में सफल रही थी. शनिवार को शुरू किया गया ऑपरेशन एक दिन से अधिक जारी रहा था. इन हमलों के दौरान तीन सेना अधिकारी भी शहीद हुए थे.

काउंटर स्ट्राइक का बयान मेजर लेटुल गोगोई को सम्मानित करने के एक दिन बाद आया था. मेजर लेटुल गोगोई ने श्रीनगर में स्थिति बिगड़ने से बचने के लिए एक आदमी को अपनी गाड़ी पर बांध लिया था. इस आदमी को नाम अहमद दा बताया गया है. इसे ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था. मेजर लेटुल गोगोई का ये प्रयास सार्वजनिक आक्रोश का कारण बना. जब की सेना और मीडिया के एक वर्ग ने मेजर लेटुल गोगोई के इस प्रयास को एक समझदारी एवं बुद्धिमत्ता का कार्य माना.  ऐसा कर कर वे हिंसा एवं रक्तपात का माहौल बनने से रोक पाए थे.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here