सेतुसमुद्रम परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना रुख साफ कर दिया है. मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो सेतुसमुद्रम परियोजना को पूरा करने के लिए देश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा और इस योजना को पूरा करने के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. इस बारे में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी दायर किया है.

सरकार ने हलफनामा क्यों दिया?

यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग ने जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने ये हलफनामा दायर किया और प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर याचिका को खत्म करने की अपील की. बता दें कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी.

 

क्या चाहते हैं सुब्रमण्यम स्वामी ?

सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट को केंद्र को निर्देश देने को कहा था. स्वामी ने कहा था कि कोर्ट केंद्र से कहे कि इस प्रोजेक्ट के चलते किसी भी हाल में पौराणिक महत्व के राम सेतु को छुआ नहीं जाना चाहिए.

 

सुप्रीम कोर्ट में क्या हलफनामा दिया केंद्र ने?

यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग की तरफ से SC में एडिशनल सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा, “सेतु समुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार पहले तय की गई मार्ग रेखा के विकल्प की तलाश करने की मंशा रखती है. ऐसा करते वक्त रामसेतु पर किसी तरह का प्रभाव या नुकसान नहीं होगा. ऐसा देशहित में है. सरकार ने ये जवाब पहले के निर्देशों के आधार पर दाखिल किया है. इस पक्ष को देखते हुए स्वामी की याचिका को अब खत्म कर दिया जाना चाहिए.’

 सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट क्या है?

यूपीए सरकार के वक्त 2005 में इस प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया था. शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत करीब ढाई हजार करोड़ थी, जो कि अब 4 हजार करोड़ तक बढ़ गई है. इसके तहत बड़े जहाजों के आने-जाने के लिए करीब 83 किलोमीटर लंबे दो चैनल बनाए जाने थे. इसके जरिए जहाजों के आने-जाने में लगने वाला वक्त 30 घंटे तक कम हो जाएगा. इन चैनल्स में से एक राम सेतु जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, से गुजरना था अभी श्रीलंका और भारत के बीच इस रास्ते पर समुद्र की गहराई कम होने की वजह से जहाजों को लंबे रास्ते से जाना पड़ता है.

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