महात्मा गांधी जी के 15 सर्वश्रेष्ठ सुविचार
महात्मा गांधी सुविचार

‘ महात्मा गांधी जी के 15 सर्वश्रेष्ठ सुविचार ’ – केवल प्रसन्नता ही एकमात्र इत्र है, जिसे आप दुसरो पर छिड़के तो उसकी कुछ बुँदे अवश्य ही आप पर भी पड़ती है।

  • पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।
  • विश्व के सभी धर्म, भले ही और चीजों में अंतर रखते हों, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दुनिया में कुछ नहीं बस सत्य जीवित रहता है।
  • त्य एक विशाल वृक्ष है, उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है, त्यों-त्यों उसमे अनेक फल आते हुए नजर आते है, उनका अंत ही नहीं होता।
  • कोई त्रुटी तर्क-वितर्क करने से सत्य नहीं बन सकती और ना ही कोई सत्य इसलिए त्रुटी नहीं बन सकता है क्योंकि कोई उसे देख नहीं रहा।
  • पूंजी अपने-आप में बुरी नहीं है, उसके गलत उपयोग में ही बुराई है, किसी ना किसी रूप में पूंजी की आवश्यकता हमेशा रहेगी।
  • मैं हिंसा का विरोध करता हूँ क्योंकि जब ऐसा लगता है कि वो अच्छा कर रही है तब वो अच्छाई अस्थायी होती है; और वो जो बुराई करती है वो स्थायी होती है।
  • दुनिया में ऐसे लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता सिवाय रोटी के रूप में।
  • एक देश की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से आँका जा सकता है कि वहां जानवरों से कैसे व्यवहार किया जाता है।
  • आप मुझे जंजीरों में जकड सकते है, यातना दे सकते है, यहाँ तक की आप इस शरीर को नष्ट कर सकते है लेकिन आप कभी मेरे विचारो को कैद नहीं कर सकते।
  • ताकत दो तरह की होती है। एक जो सजा के डर से आती है और दूसरी वह जो प्यार से आती है। प्यार से आने वाली ताकत 1000 बार प्रभावकारी साबित हो सकती है पर सजा के डर से आने वाली ताकत हमेशा के लिए प्रभावशाली साबित हो सकती है।
  • यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।
  • जिज्ञासा के बिना ज्ञान नहीं होता. दुःख के बिना सुख नहीं होता।
  • जब भी आपका विरोधियो के साथ सामना हो। तब अपने प्यार से उन्हें परास्त कीजिये।

ताकत कभी शारीरिक क्षमता से नहीं आती। ताकत हमेशा आपकी अदम्य (दृढ़) इच्छाशक्ति से आती है।

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