हममें से ज्यादातर जानते होंगे कि हमारे देश में सैनिटरी पैड्स इतने ज्यादा इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं. इसका प्रभाव है कि 88% भारतीय महिलाएं इतना उपयोग नहीं करती हैं,जितना उन्हें करना चाहिये. इन आश्चर्यजनक आंकड़ों के बीच, एनजीओ गोन्ज के मालिक अंशु गुप्ता की दिल्ली में यह कहानी सामने आई है और यह पता चला है कि लगभग 43% भारतीय महिलाएं पीरियड्स के शुरू होने पर सैनिटरी पैड्स के मूल सिद्धांतों के बारे में जानती ही नही है.

वे जानती हे नही है की, ये होता क्या है. जबकि इसके बारे में बात करने पर 36% महिलाएं असहज महसूस करती हैं, और आसपास के अन्य लोगों के सामने उन्हें खरीदने में भी असहज महसूस करती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (विश्व स्वास्थ्य संगठन) द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, 67% महिलाओं को किसी दोस्त, सहयोगी या परिवार के सदस्य से पैड्स मंगवाने पड़ते है. वे खुद उन्हें नही खरीदती है.

हरीओम त्यागी, जो खुद बिज़नस मैन हैं,जिनका अंतरंग स्वच्छता उत्पादों का ब्रांड हैं, का कहना है कि आज की वास्तविकता यह है कि 3 में से 1 महिला दुकान में अन्य ग्राहकों के सामने सैनिटरी खरीदने में झिझकती हैं. डब्ल्यूएचओ सर्वेक्षण में अक्टूबर, 2017 में ऐसा ही था और इसमें बेंगलुरु, चेन्नई, कटक, दिल्ली, इंदौर, जयपुर, कानपुर, कोलकाता, लुधियाना, मुंबई, रांची, श्रीनगर, सूरत और 35 से अधिक शहरों से महिलाए शामिल हुई.

तिरुवनंतपुरम. सर्वेक्षण के सभी सदस्यों में से 45% का कहना है कि उन्हें साल में कम से कम एक बार या दो बार सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना पड़ता है. भारत के कुछ  इलाकों में, कुछ महिलाओं के पास अपने पीरियड के लिए खुद को सैनिटरी पैड या साफ कपड़े खरीदने के लिए पैसा नहीं होता.

इसके बजाय, वे मिट्टी या निरंतर राख के साथ अपने अंडरवियर में पैडिंग का सहारा लेती हैं. पर्यवेक्षकों ने हर महीने इस खतरनाक तरीके को अपनाने वाली कुछ महिलाओं से बात की और इस गंभीर समस्या के ऊपर विचार किया.

45% से ज्यादा महिलाओं का मानना ​​था कि भारतीय समाज में माहवारी अभी भी निषिद्ध मानी जाती थी और 36% अन्य लोगो की उपस्थिति में एक दवाइयों की दुकान से सेनेटरी पैड जैसी जरूरी चीजों को खरीदने में असहज महसूस करती थी. और गांवों या पिछड़े इलाको में इस बारे में महिलाओ को जानकारी ही नही है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2015-16 के अनुसार, लगभग 57.6% भारतीय महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं और 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग के 62 प्रतिशत महिलाए अभी भी कपड़े पर निर्भर हैं. बाधाओं को हराने के लिए, कभी-कभी ब्रांड ने भारतीय बाजार में मासिक स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं की एक पूरी श्रृंखला के लिए एक लम्बी अवधि के लिए, अनुकूल, सदस्यता आधारित घर-वितरण सेवा पर पीरियड बॉक्स लॉन्च किया है.

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