600 शिक्षाविदों और 50 रिटायर्ड अधिकारीयों ने मोदी को लिखा पत्र

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600 शिक्षाविदों और 50 रिटायर्ड अधिकारीयों ने मोदी को लिखा पत्र
600 शिक्षाविदों और 50 रिटायर्ड अधिकारीयों ने मोदी को लिखा पत्र

कठुआ और उन्नाव रेप केस की घटनाएँ पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुकी है. जिस वजह से दुनिया के लगभग 600 से ज्यादा शिक्षाविदों और बड़े-बड़े विद्वानों ने इस घटना के क्रम के के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को  लिखा पत्र. ये दोनों घटनाएं साधारण अपराध नहीं हैं, जिसमे माफ़ी की कोई गुंजाइश हो ये गुनाह हैं इनके लिए जल्द से जल्द कुछ निर्णय लिया जाये. इन घटनाओं ने हमारे सामाज को हिला कर रख दिया है. इस खत में कठुआ और उन्नाव बलात्कार मामलों पर अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री मोदी पर देश में बने गंभीर हालात पर चुप्पी साधे रहने का आरोप लगाया है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 वर्ष और उससे कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड सहित कड़े दंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. यह पत्र मोदी को इसी  दिन आया है. जब यह घोषणा हुई है. कठुआ और सूरत में नाबालिग बच्चियों के बलात्कार और हत्या एवं उन्नाव में एक लड़की से बलात्कार को लेकर देशभर में आक्रोश अभी भी फैला हुआ है.

पत्र में लिखा था

600 से ज्यादा शिक्षाविदों ने पी.एम. मोदी को लिखे इस पत्र में कहा है कि वे कठुआ, उन्नाव और उसके बाद की घटनाओं पर अपना गहरा गुस्सा और दर्द का को बताना चाहते हैं. पत्र में लिखा गया, हमारे देश में बने गंभीर हालत पर और आपके सत्तारूढ़ों और हिंसा से जुड़े इस विवादों को लेकर मोदी जी आपने बड़ी लंबी चुप्पी बांध के बैठें हैं .

मोदी को लिखा पत्र
मोदी को लिखा पत्र

लैटर पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, ब्राउन विश्वविद्यालय, हार्वर्ड, कोलंबिया विश्वविद्यालय और विभिन्न आईआईटी के शिक्षाविदों और विद्वानों ने साइन किए.

 

इसके पहले 50 सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारीयों ने लिखा था पत्र

50 रिटायर्ड अधिकारीयों ने प्रधान मंत्री मोदी को भारत की स्थिति पर शर्म, क्रोध और पीड़ा व्यक्त करने के लिए पत्र लिखा है. पत्र में लिखा है कि भारत की आजादी के बाद से यह अब तक का सबसे अंधकारमय समय है. यह दिखाता है कि सरकार, राजनीतिक दल और नेता कितने असहाय हैं. कठुआ और उन्नाव गैंगरेप जैसे मामलों में सरकार के हाथ क्यों बंधें हैं. रिटायर्ड अधिकारीयों ने पी.एम. नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे कठुआ और उन्नाव में पीड़ित परिवार से माफी मांगें. रिटायर्ड अधिकारीयों ने इस मामले को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की अपील की है.

वहीं उन्नाव रेप केस के मामले में एसआईटी की जांच की मांग की है. उन्होंने पत्र में कहा है कि इन क्राइम के शिकार दलितों, मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन सरकारी कर्मचारियों को हटाया जाए जो इन गुनाहों में गुनहगारों के पक्ष में शामिल हैं. इस मामले को लेकर सभी पार्टीयों की मीटिंग बुलाई जाए. और बिना किसी देरी के जल्द से जल्द निर्णय लिया जाये.

कठुआ, उन्नाव मामलों पर जाहिर की नाराजगी

पत्र में रिटायर्ड अधिकारीयों ने कहा है कि ये दोनों घटनाएं साधारण अपराध नहीं हैं, जिसमे माफ़ी की कोई गुंजाइश हो ये गुनाह हैं. इनके लिए जल्द से जल्द कुछ निर्णय लिया जाये. इन घटनाओं ने हमारे सामाज को हिला कर रख दिया है. हमें जल्द ही अपने समाज के राजनीतिक और नैतिक ताने-बाने को ठीक करना होगा. यह समय हमारे अस्तित्व के संकट का समय है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र में कहा है कि, माना आपने इन घटनाओं की निंदा की है और इन्हें दुर्भाग्य पूर्ण बताया है, लेकिन आपने ना ही इसके पीछे काम कर रही सांप्रदायिकता की भावना की निंदा की और ना ही इसे दूर करने के लिए किसी तरह के सामाजिक, राजनीतिक या प्रशासनिक संकल्प दिखाया, जिसके तहत इस तरह की सांप्रदायिक पैदा होती है.

मोदी को लिखा पत्र
मोदी को लिखा पत्र

कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या वहीं उन्नाव में एक लड़की से गैंगरेप और उसके पिता की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद देश गुस्से में है. उन्नाव मामले में रेप के आरोपी बीजेपी के विधायक है.

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