कितनी सुंदर लगती है न दुनियाँ जब हमें मनभावन दृश्य देखने को मिलते हैं. मन को कितना आनंद प्राप्त होता है. हमारी दुनियाँ में ऐसे कई कुदरती स्थान होंगे जिसे देख कर मन ख़ुशी से भर जाता है. परन्तु इस से अलग इस धरती पर कुछ ऐसे स्मारक और इमारतें भी हैं जो कलाकारी का एक अद्भुत उदाहरण हैं और जिन्हें देख कर बहुत आश्चर्य होता है, और जिन्हें दुनियाँ के 7 अजूबे कहा जाता है. इतना ही नहीं कुछ इमारतें सदियों से अपनी पहचान बनाये रखने में आज तक सक्षम रही हैं.

आइये आज हम जानते हैं इन अजूबों की उम्र क्या है? कब बने थे ये अजूबे और इनमे से कौन सा अजूबा सबसे पहले अपने अस्तित्व को खोएगा, मतलब समाप्त हो जाएगा.

उम्र के आधार पर ये रहे दुनियाँ के सात अजूबे

  1. ग्रेट गीजा पिरामिड(2560 ई.पू.)
  2. चीन की महान दीवार (700 ई.पू) चीन
  3. पेट्रा (312 ई.पू), जॉर्डन
  4. रोमन कोलॉज़िअम (80 ई.) रोम, इटली
  5. चिचेन इत्ज़ा में पिरामिड (600 ई.) युकातान प्रायद्वीप, मैक्सिको
  6. माचू पिच्चु (1450 ई.), पेरू
  7. ताज महल (1643 ई.) आगरा, भारत

 

ग्रेट गीजा पिरामिड(2560 इ.पू.)

 

संसार के 7 अजूबे - किसकी उम्र कितनी बाकि है
ग्रेट गीजा पिरामिड(2560 इ.पू.)

मिस्र कि सभी ऐतिहासिक इमारतों में मिस्र के पिरामिड सबसे ज्यादा मजबूत है. हर साल इन्हें देखने लाखों टूरिस्ट आते हैं. इनमे से एक “ग्रेट गीजा पिरामिड (Great Giza Pyramid)” का शुमार प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यों में होता है. ग्रेट ग़िज़ा पिरामिड (Great Giza Pyramid) 450 फ़ीट ऊंचा है. 4300 सालों तक यह दुनियाँ की सबसे ऊंची संरचना रहा. 19 वि सदी में इसका यह रिकॉर्ड टूट गया. पिरामिड में 2 से लेकर 30 टन तक के 23 लाख चूना पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है.

 

चीन की महान दीवार (700इ.पू) चीन

संसार के 7 अजूबे - किसकी उम्र कितनी बाकि है
चीन की महान दीवार (700इ.पू) चीन

700इ.पू चीन की महान दीवार को मौजूदा किलेबंदी को संयुक्त रक्षा प्रणाली के साथ जोड़कर निर्मित किया गया था, जिसका उद्देश्य मंगोल जनजाति के हमलावरों को चीन से बाहर रखना था. यह अब तक का मानव निर्मित सबसे बड़ा स्मारक है और यह विवादित है कि केवल यही अंतरिक्ष से भी दिखाई देता है. इस भारी निर्माण में लगे कई हजार लोगों को अपनी जान देनी पड़ी होगी.

 

पेट्रा (312इ.पू), जॉर्डन
संसार के 7 अजूबे - किसकी उम्र कितनी बाकि है
पेट्रा (312इ.पू), जॉर्डन

अरब रेगिस्तान के किनारे, पेट्रा राजा एरिटास चतुर्थ (9 ई.पू. से 40 ई.) के नाबाटिअन साम्राज्य की शानदार राजधानी स्थित थी. जल प्रौद्योगिकी में माहिर, नाबाटिअन लोगों ने अपने शहर को बेहतरीन सुरंगों और वाटर चैम्बर्स का निर्माण प्रस्तुत किया. ग्रीक रोमन प्रोटोटाइप पर आधारित, इस थियेटर में 4000 दर्शकों के बैठने की क्षमता थी. आज, पेट्रा के महलनुमा मकबरे, जिनमें अल दैर मठ पर 42 मीटर ऊंचे यूनानी मंदिर के मुखौटे हैं, मध्य पूर्वी संस्कृति का शानदार उदाहरण हैं.

 

रोमन कोलॉज़िअम (80 ई.) रोम, इटली
संसार के 7 अजूबे - किसकी उम्र कितनी बाकि है
रोमन कोलॉज़िअम (80 ई.) रोम, इटली

रोम के केंद्र में इस महान रंगभूमि को सफल सैनिकों को ईनाम देने और रोमन साम्राज्य के गौरव का जश्न मनाने के लिए बनाया गया था। इसकी डिजाइन अवधारणा आज भी अनूठी है, और कुछ 2,000 साल बाद अब भी लगभग हर आधुनिक खेल स्टेडियम पर कोलॉज़ीयम की मूल डिजाइन की अनिवार्य छाप होती है. आज, फिल्मों और इतिहास की पुस्तकों के माध्यम से, हम इस जगह पर होने वाली क्रूर लड़ाई और खेलों के बारे में और भी अधिक जानते हैं, जिससे दर्शकों का खूब मनोरंजन होता है.

 

चिचेन इत्ज़ा में पिरामिड (600 ई.) युकातान प्रायद्वीप, मैक्सिको
संसार के 7 अजूबे - किसकी उम्र कितनी बाकि है
चिचेन इत्ज़ा में पिरामिड (600 ई.) युकातान प्रायद्वीप, मैक्सिको

अत्यंत प्रसिद्ध मायान मंदिर का शहर, चिचेन इत्ज़ा, मायान सभ्यता का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र था. इसकी विभिन्न संरचनाओं में कुकुल्कान का पिरामिड, चक मूल का मंदिर, हजार खंभों का हॉल, और कैदियों के खेल का मैदान आज भी देखे जा सकते हैं और वास्तुशिल्प के क्षेत्र तथा रचना करने की असाधारण प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. खुद पिरामिड सभी मायान मन्दिरों में से अंतिम और यकीनन सबसे बड़ा था.

 

माचू पिच्चु (1450इ.), पेरू

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माचू पिच्चु (1450इ.), पेरू

15 वीं शताब्दी में इंकेन सम्राट पैचाक्यूटेक ने पर्वत पर बादलों में एक शहर का निर्माण किया जिसे माचू पिच्चु (पुरानेपर्वत)माचू पिच्चुके रूप में जाना जाता है. यह असाधारण रिहायशी जगह एंडेस पठार पर आधी ऊंचाई तक स्थित है, जो अमेज़न के जंगल में अन्दर और उरुबम्बा नदी के ऊपर है. इसे शायद चेचक फैलने की वजह से इंकैस द्वारा छोड़ दिया गया था और स्पेन वासियो द्वारा इंकैन साम्राज्य को हरा दिए जाने के बाद, यह शहर लगभग तीन शताब्दियों से अधिक तक गुमनाम रहा. इसे हीराम बिंघम द्वारा पुनः खोजा गया था.

 

ताज महल (1643 ई.) आगरा, भारत
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ताज महल (1643 ई.) आगरा, भारत

यह विशाल समाधि पांचवें मुगल सम्राट शाहजहां के आदेश पर, उनकी प्रिय दिवंगत पत्नी की स्मृति  में बनायी गयी थी. सफेद संगमरमर से निर्मित और औपचारिक रूप से बाहरी दीवारों से घिरे उद्यानों के बीच स्थित, ताज महल को भारत में मुस्लिम कला का उत्कृष्ट रत्न माना जाता है. बाद में सम्राट को जेल में बंद कर दिया गया था और यह कहा जाता है, कि वहां की कोठरी की छोटी से खिड़की से वे केवल ताजमहल देख सकते थे.

तो ये थे हमारे इस खुबसूरत संसार के आलिशान अजूबे. जैंसे हर एक चीज की उम्र है इनकी भी उम्र है. ये भी एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगे, लेकिन जब तक हैं, इस दुनियाँ की शान है.

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