लालबाग में कांच के बॉक्स में रखे टाइगर में से एक टाइगर का शिकार प्रिंस होलकर राव होलकर ने 14साल की उम्र में किया था. वही दुसरे टाइगर का शिकार तुकोजीराव होलकर तृतीय ने 1916  में मंदसौर जिले में किया था. लालबाग महल तीन राजकुमारों के शासनकाल में विकसित हुआ. पहली बार राजा तुकोजी राव, 1844 से 1886 तक, जिन्होंने इसका आरम्भ किया था.

दूसरा, राजा शिवाजी राव 1886  से 1903 तक है, जिन्होंने इसे जारी रखा. तीसरे राजा तुकोजी राव थे, 1903 से 1926 तक. वह इस जगह से इतना प्यार करते थे कि भले ही उन्होंने 1926 में पद छोड़ दिया था, लेकिन  वह 1978 में अपनी मृत्यु तक वही रहे. इंदौर शहर के लालबाग पैलेस आगंतुकों के लिए 10:00 पूर्वाह्न से 6:00 शाम तक खुला रहता है.

 

मध्य प्रदेश के पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य सभी संग्रहालयों और स्मारकों की तरह, यह हर सोमवार को बंद रहता है. महल इंदौर में वास्तुकला की सबसे प्रमुख इमारतों में से एक है और खान नदी के तट पर स्थित है. रीगल टॉकीज पुराने समय मे उषा किरन के नाम से जानी जाती थी. आज मानचित्र बिलकुल बदल गया है.

प्रिंस एडवर्ड के  इंदौर आगमन के दौरान होलकर कॉलेज ग्राउंड कुछ इस तरह अंग्रेज छावनी में तब्दील कर दिया गया था. नौलखा बाग़ , कहा जाता है की यह है की स्टेट के शासनकाल में नौ लाख आम के पेड़ थे. सराफा बाज़ार जहाँ पाव रखने की  भी जगह नही मिल पाती वही सालो पहले लोग यहाँ बैलगाडियों से घूमा करते थे, जो आज अपने अदभुत भोजन श्रंखला और विशेष रात्री कालीन व्यवस्था के लिए जाना जाता है. रात में साराफा बाजार खान-पान के माहौल से सराफा को एक बहुत ही जीवंत जगह बनाता है.

एक सदी पहले 1903 में राजवाडा की इस तस्वीर में लोग घोड़ो, बैलगाडियों, हाथियों पर सवारी करते हुए दिखाए दे रहे हैं. वर्तमान परिस्तिथियों मे  यहाँ चारों तरफ वाहनों का शोर सुनाई देता है. और लोगो को पैदल चलने में भी कठिनाई होती है.

M.G रोड यानि महात्मा गाँधी मार्ग का 125 साल पुराना Aerial व्यू

जिसे पूर्व में जेम्स स्ट्रीट के रूप में जाना जाता था, इंदौर शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है. यह 8.6 किमी में फैला हुआ है. देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शुरू होने से यह शहर की जीवन रेखा भी कहलाता है. राजवाडा के समीप है महर्षि मातर्ड मंदिर. पंढरीनाथ स्थित हरिसिद्धी मंदिर.

देखो, आपका प्राचीन इंदौर क्या कहता है?

 

 

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