आपके 7 संवैधानिक अधिकार जिनसे आप अनजान है एफआईआर लिखवाने से कई लोग डरते हैं. वे सबकुछ जानते हुए भी डर के कारण पुलिस को कुछ बता नहीं पाते. कई बार पुलिस के गलत व्यवहार के कारण लोग परेशान होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में रहने वाले हर नागरिक को कुछ अधिकार मिले हुए हैं. FIR से जुड़े भी कई अधिकार हैं, जिन्हें आप जान गए तो बड़े से बड़े पुलिस ऑफिसर को भी आपकी बात सुननी होगी.

वो सात बातें कौन सी है ?

  1. फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) एक रिटन स्टेटमेंट होता है. किसी गलत कॉग्निजेबल Offense  होने पर पुलिस एफआईआर लिखने के बाद Investigation शुरू करती है. कॉग्निजेबल ऑफेंस वह होता है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के संबंधित व्यक्ति को Arrest कर सकती है. ऐसे में पुलिस को कोर्ट से भी किसी तरह की Permission नहीं लेना होता.
  2. वहीं नॉन कॉग्निजेबल Offense होने पर एफआईआर लिखने से पहले पुलिस को मजिस्ट्रेट की Permission लेना होती है. बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती.

    पुलिस इसके लिए मना नहीं कर सकती:-

  3. ऐसा कोई जरुरी नहीं की केवल पीड़ित ही FIR लिखवा सकते है. कोई भी ऐसा व्यक्ति जिन्हें घटना की जानकारी है वे FIR दर्ज करवा सकते है. यदि किसी पुलिस अधिकारी को घटना की जानकारी है तो वो खुद भी FIR दर्ज करवा सकते है. FIR लिखने में कोई देरी नहीं की जा सकती . उचित कारण होने पर ही FIR लिखने में देरी हो सकती है.
  4. शिकायतकर्ता को FIR की एक कॉपी लेने का पूर्ण अधिकार है. पुलिस इसके लिए मना नहीं कर सकती. इसके तर्ज पर शिकायतकर्ता से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता.
  5. FIR लिखने के बाद पुलिसकर्मी की ये जिम्मेदारी होती है की FIR में जो लिखा है शिकायतकर्ता को पूरा पढ़कर सुनाया जाए. शिकायतकर्ता अगर सहमत हुए तो वो इसपर हस्ताक्षर कर सकते है. पुलिस अधिकारी खुद कुछ FIR पर अपनी बात नहीं रख सकते. पुलिसकर्मी किसी पॉइंट को हाईलाइट भी नहीं कर सकते.
  6. यदि कोई भी पुलिस अधिकारी एफआईआर लिखने से मना करता है तो शिकायतकर्ता क्षेत्र के सीनियर ऑफिसर को इसकी शिकायत कर सकता है. वहां से भी समस्या का समाधान न हो तो मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकती है. मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर लिखने के लिए आदेश दे सकते हैं.
  7. FIR में घटना की पूरी जानकारी लिखवानी होती है,जैसे अपराध कब हुआ,कहाँ हुआ,समय क्या था,किसने किया,किसने देखा,क्या नुकशान हुआ. FIR दर्ज होने के शुरूआती एक हफ्ते में प्रारंभिक जाँच का पूरा होना जरुरी होता है.

प्रमुख बिंदु :-

  • जाने क्या है आपके 7 अधिकार.
  • जाने क्या है वो बातें.

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