अभी उतरा हूँ तेरी चौखट से,

हिसाब तो होगा बड़ी फुर्सत से,

कहाँ गलतियाँ हुई तुझे समझने में,

अभी वक़्त लगेगा घर पहुँचने में…

कुछ निशान मिटाने हैं मुझे,

कुछ लब्ज भुलाने है मुझे,

ये बोझ लेकर चलूँगा कितना,

जरा सी देर लगेगी बहकने में,

अभी वक्त लगेगा घर पहुँचने में…

अभी तो नशा उतरा है,

अब ये आँखे खोलूँगा,

जहाँ जहाँ मैं चुप था,

अब वहां पे जा के बोलूँगा,

किसने गलती की परखने में,

अभी वक्त लगेगा घर पहुँचने में…

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