अगर पत्नी ना होती तो कैसे होता घर का संचालन ?
अगर पत्नी ना होती तो कैसे होता घर का संचालन ?

हमारे समाज में अगर पत्नी ना होती तो घर की देख भाल कैसे होती?. किसी भी तरह से पति किसी भी मुकाबले में कम है क्या. दोनों एक दूसरे के लिए उतने की उपयोगी है और जरुरत मंद भी. वो जीने मरने के कसमों के अलावा भी बहुत सी ऐसे बातें है जो पति-पत्नी एक दूसरे को समझ सकते है जान सकते है. ऐसे ही कुछ बाते आज हम आप सबको बताने जा रहे है.

केवल महिलाएं ही क्यूँ समझौता करें ?

ऐसा बिलकुल नहीं है की केवल पति या पुरुष कामकाजी होते है. आज कल के  युग में महिलाएं क्या किसी भी क्षेत्र में पुरुष से कम है क्या ?, नहीं ना तो आप सही सोच रहे है. वो जमाना गया जब पुरुष ही बाहर जाकर काम करते थे. आजकल तो पुरुष भी घर का काम देखते है और उल्टा महिलाएं काम-काज. ये उल्टा नहीं बस समय-समय की बात है. क्या पुरुष घर को अच्छे ढंग से संभाल सकते है ?.

अगर पुरुष को काम-काज ना मिले तो महिलाएं काम करने लगती है. एक बात आती है समझदारी की एक दूसरे को समझने की. ये समझने योग्यबात है की पति अपनी पत्नी के दुःख सुख हर समय उनका साथ दे और ऐसे ही डटकर खड़ा रहें. ये हुईं ना मर्दों वाली बात. पहले एक दुसरे के प्रति समझदार बने समाज खुद बा खुद समझ जाएगी सारी बातें. इतना तो पुरुष होने के नाते कर ही सकते है.

पत्नी के नौकरी करने पर क्या होता है लोगो का प्रतिक्रिया :-

जब पत्नी नौकरी कर रही हो और पति को किसी कारणवश नौकरी नहीं मिल रही हो परिवारजनों की प्रतिक्रिया इस प्रकार होती है. अगर माँ की बात करें तो उनका कहना होगा की “ये घर कैसे चल सकता है जहाँ पत्नी काम करें और पति घर पर बैठे रहे”. उनका ये सोचना भी जायज है क्यूंकि वो जिस समाज से पली बढ़ी है उस समय पुरुष-स्त्री को एक समान ना ही सम्मान मिलता था और ना ही इज्जत दी जाती थी. वो कहते है ना “हर दिन होत ना एक समाना” तो बस समय बीतते ही वो भी समझ जाएँगी.

आरंभ में संघर्ष का क्या निकला नतीजा :-

ऐसा कभी नहीं कहा जा सकता की पति-पत्नी में कभी झगड़े ना हुए हो. ऐसा भी कह सकते की बस रिश्ते गुलाबी मौसम की तरह अच्छे चल रहे हो. थोड़ा मोड़ा नोक झोक चलता रहता है. कभी किसी बात पर ऐसा भी होता है की नाराजगी भी होती है सहमति भी.

आप उस पल को कैसे सँभालते है ये मायने रखता है. अगर पत्नी काम पर चली जाए,तो पति अपने काम के बीते दिनों को याद करते है जैसे काश अगर मै भी इसी तरह बिजी रहता तो दिन बीतने में समय नहीं लगता. एक बात और भी है जब भी कोई मपति के काम के बारे पूछ रहा हो उस समय पति अपने काम को याद करके ये महसूस कर रहे होते है की शायद काम कर रहा होता तो इस प्रश्न का जवाब दे रहा होता. इंसान अगर खली बैठा रहता है ऐसे ख्याल आना लाजमी है.

कैसे काटे मुसीबत भरे वक्त :-

आप ऐसा कर सकते है अगर पत्नी काम कर रही है . पति को चाहिए उनके घर के कामों में हाथ बाँट सकते है. कुछ भी छोटा काम जिससे आपको लगता हो की कर सकते है. जिससे आपको लगता है आप उस मुसीबत भरें वक़्त को दूर हटा सकते है और कुछ और सोच सकते है. इससे पत्नी को एक सहायता के तौर पर मदद भी मिल जाएगी.

समय किसी का इंतज़ार नहीं करता :-

समय बीतते चले जाते है जिसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता. अब तो आलम ये तो आलम ये हो आया की नन्हे की एंट्री हो गई परिवार में यानि अब तो समय तो बिलकुल बदलने वाला है क्यूंकि पति देव पापा बन गए और पत्नी देवी माँ. माँ तो जननी होती है.

ऐसा कहा जाता है की बच्चे माँ के पास अधिक समय तक रहते है या उनके पास ही जाना पसंद करते है. क्यूंकि अगर माँ काम काम पर जाएँगी तो बच्चे की देखभाल कौन करेगा बताए?. पापा करेंगे और ये ऐसी चीज जिसे खासकर आजकल के हो या कोई और अपने बच्चे को खेलने का उन्हें अपने साथ खेलने से बड़ा सुख और कोई नहीं है.

इस पल का इंतज़ार हर कोई करना चाहता है. इस पल को जी भर के जीना हर कोई चाहता है. समय से बलवान कोई नहीं होता.  माँ भले ही अपने काम पर हो लेकिन सारा ध्यान बच्चे पर रहता है कैसा होगा सोया है या रो तो नहीं रहा.

10 साल बाद क्या हुए परिवर्तन :-

वैसे इतना बड़ा कोई परिवर्तन तो हुआ नहीं बस 7 साल हुए बच्चे पापा को अपना बेस्ट फ्रेंड मानते है. पिता अपने बच्चे के दोस्त होते है,पथ प्रदर्शक होते है और पिता होते है. ऐसा बिलकुल नहीं है की लड़की है तो माँ से अधिक प्यार और लड़का है पिता से अधिक प्यार. जैसे माता-पिता रहेंगे बच्चों को रखेंगे ठीक उसके अनुसार ही उनकी ये सोच खत्म हो जाएगी या बदल जाएगी.

अगर पत्नी घर का संचालन नहीं कर रही होती तो क्या होता परिवर्तन :-

परिवारजनों जैसे आप माँ को ले लीजिए इस बात को लेकर चिंता है या अफ़सोस है. लेकिन पॉइंट ये है की इस पल में इस निर्णय से उनके बेटे खुश है. ये मानना होगा जानना होगा और पहचानना होगा की अगर बेटा अपने लिए निर्णय से खुश है क्यूंकि उनके बेटी की खुशी से बड़ी बात और कुछ नहीं हो सकती इससे अच्छी बात क्या हो सकती है.

निष्कर्ष ये नहीं है की पत्नी के प्रति पति का प्यार के साथ-साथ सम्मान,समझदारी सुख-दुःख में एक दुसरे का सहयोग और सबको साथ लेकर चले. सभी लोग आपके उतने ही प्रिय है. वो कहते है ना कभी हँसना है कभी रोना है जीवन दुःख सुख का संगम हैं.

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