ऐसा क्यों पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर शमशान घाट पर ?बहुत से लोग भारत की इस परंपरा से अनभिज्ञ हैं. लेकिन ये सच हैं की सदियों से बनारस के इस शमशान घाट पर चैत्र माह में आने वाले नवरात्री के सप्तमी की रात को पैरों में घुंघरू बांधी हुईं वेश्वाओं का जमावड़ा लगता हैं. एक तरफ़ जलती चिता के शोले आसमान में उड़ते हैं तो दूसरी तरफ तबले और घुंघरू की आवाज़ पर नाचती वेश्यांए दिखाई देती हैं.

वेश्यालयों में वेश्याओ का नाचना उनके धनोपार्जन और आजीविका का साधन बनता हैं. लेकिन जब व़े इस मणिकर्णिका घाट पर जाती हैं तो बस व़े अपने ईश्वर से बस ये प्राथना करती हैं की उन्हें इस कदर  किल्लत भरी ज़िन्दगी से मुक्ति देना. भगवान भोले नाथ को समर्पित काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता हैं. यहीं कारण हैं की वेश्यांए यहाँ नाच-नाच कर भोले नाथ से ये प्राथना करती हैं की उन्हें इस तुच्छ जीवन से मुक्ति मिले. ताकि अगले जन्म में व़े भी समाज में सिर उठाकर जी सके.

दरअसल चिताओं के करीब नाच रहीं लड़कियां शहर की बदनाम गलियों की नगर वधु होती हैं

ऐसा क्यों पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर शमशान घाट पर ?

दरअसल चिताओं के करीब नाच रहीं लड़कियां शहर की बदनाम गलियों की नगर वधु होती हैं. कल की नगरवधु यानि आज की तवायफ. लेकिन ना तो यहाँ उन्हें जबरन लाया जाता हैं और ना ही इन्हें पैसे पर बुलाया जाता हैं. काशी के जिस मणिकर्णिका घाट पर मौत के बाद मोक्ष की तलाश में मुर्दों को लाया जाता हैं. वहीं पर ये तमाम नगर वधु जीते जी मोक्ष हासिल करने आती हैं. वह मोक्ष जो उन्हें अगले जन्म  में नगर वधु ना बनने का यकीन दिलाता हैं.

यह परंपरा सैकड़ो साल पुरानी हैं.आज से सैकड़ो साल पहले मान सिंह ने ये परंपरा बाबा मशान नाथ के दरबार में कार्यक्रम पेश करने के लिए उस समय की जानी मानी नर्तिकी को बुलाया था. क्या ये सच हैं?. इतना कड़वा सच जिसे बहुत लोग नहीं जानते. दुनिया के शोर शराबे के बीच जहाँ लोग अपनी दुनिया में मग्न हैं मशगुल हैं.

प्रमुख बिंदु :-

  • जलती चिताओं के बीच नाचती हैं वेश्याएं.
  • मोक्ष की प्राप्ति के लिए करती हैं भगवन भोले से प्रार्थना.

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