अक्षय तृतीया : जाने अक्षय पात्र का क्या है रहस्य?

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अक्षय तृतीया : जाने अक्षय पात्र का क्या है रहस्य?
अक्षय तृतीया : जाने अक्षय पात्र का क्या है रहस्य?
अक्षय तृतीया : जाने अक्षय पात्र का क्या है रहस्य?
अक्षय तृतीया : जाने अक्षय पात्र का क्या है रहस्य?

अक्षय तृतीया के बारे में तो सभी लोग जानते है लेकिन ये जानते है अक्षय तृतीया का शाब्दिक अर्थ क्या होता है. साथ ही साथ अक्षय पात्र का इस दिन क्या महत्व है?. अगर आप नही जानते तो कोई बात नही आज आपको हम बताने जा रहे है इसका पर्व का अर्थ. अक्षय का शाब्दिक अर्थ होता ‘जो कभी ना खत्म हो अथवा अनन्त’. इससे ये जाहिर होता है की आप किसी को कम को इस दिन शुरू करेंगे तो वो कभी भी खत्म नही होगा.

कैसे है शुभ ये दिन ?

माना जाता है की ये दिन शादी के लिए शुभ है. अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर जो भी विवाहित-विवाहिता शादी के शुभ बंधन में बंधते है उनका जीवन सुख तथा शांति से बीतता है.

अक्षय पात्र का क्या है रहस्य ?

महाकाव्य महाभारत में अक्षय पात्र का उल्लेख मिलता है. महर्षि वेद व्यास ने लिखा है वो इस प्रकार है. युधिष्ठिर को इस अक्षय तृतीया के शुभ दिन अक्षय पात्र वरदान के रूप में मिला था. आगे लिखते है वनवास के दौर में मिले इस अक्षय पात्र में द्रौपदी भोजन बनाती जो की कभी समाप्त ही नही होता. इसके अलग एक बार कही गई वो ये है की चीर हरण के दौरान जब द्रौपदी ने भगवान कृष्ण को पुकारा तो भगवान कृष्ण द्रौपदी की मदद करने इसी दिन पहुंचे थे.

भगवान परशुराम का जन्म :-

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु की पुजा की जाती है. ऐसा भी माना जाता है भगवान विष्णु परशुराम के अवतार के रूप अक्षय तृतीया के दिन धरती पर आए थे. उनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ तथा वे जमदर्गी और रेणुका के पुत्र थे. भगवान परशुराम महाविष्णु भगवान के छठे अवतार थे. ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बाद भी उन्होने प्रण लिया था की धरती पर मौजूद सभी दुष्ट क्षत्रियों का विनाश वो करके रहेंगे.

सुदामा अक्षय तृतीया के दिन मिले से कृष्ण से :-

एक और कहानी अक्षय तृतीया से जुड़ी हुई है. सुदामा और कृष्ण की दोस्ती की मिसाल तो हर तरफ दी जाती है. ऐसा कहा जाता है की मदद मांगने के लिए सुदामा एक दिन कृष्ण के द्वार तक चले गए. सुदामा गरीब थे. अक्षय तृतीया के शुभ दिन ही सुदामा और कृष्ण का मेल मिलाप हुआ था.

अक्षय तृतीया के दिन गंगा आई पृथ्वी पर आई :-

ऐसा कहा जाता है की आकाशगंगा पर वास करने वाली पवित्र गंगा अक्षय तृतीया के दिन धरती पर आई थी. कहा जाता है की रजा भागीरथ द्वारा की गई तपस्या के बाद ही भगवान शिव ने अपनी जटा में गंगा माँ को बांधकर धरती पर उतारा था. अक्षय तृतीया के दिन ये सब हुआ था टी इससे महत्वपूर्ण दिन कोई हो ही नही सकता.

देवी अन्नपूर्णा ने लिया था जन्म :-

ऐसा कहा जाता है की देवी अन्नपूर्णा माँ पार्वती का अवतार है. ऐसी मान्यता है की देवी अन्नपूर्णा का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था. समृधि के रूप में पूजी जाने वाली देवी अन्नपूर्णा है, इस दिन सभी का पेट भरती है. इस दिन को भक्त देवी की पुजा कर ये कामना करते है उनका भंडार सदैव भरा रहे.

कुबेर को मिला था वर :-
दक्षिण भारत में ऐसी मान्यता है की धन प्राप्त करने के लिए भगवान कुबेर ने अक्षय तृतीया के दिन देवी लक्ष्मी की उपासना की थी. जिससे खुश होकर देवी लक्ष्मी ने उनकी इक्षा पूरी की और उन्हें धन का देवता बना दिया. इस दिन पुजा के स्थान पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की तस्वीर भी रखी जाती है.

  • प्रमुख बिंदु :-

    जाने अक्षय तृतीया का शाब्दिक अर्थ क्या है?.

  • क्या है अक्षय का रहस्य?.

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