अमेरिका और चीन भिड़े ट्रेड वार में - भारत को किससे खतरा है?अपने इकॉनमी को बचाने के लिए दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यूएस और चीन में ट्रेड वार शुरू हो चुका हैं. पिछले दिनों कुछ देशों के साथ व्यापार घाटे को लेकर अपेन ही देश में आलोचना के बाद यूएस गवर्नमेंट ने चीन की ट्रेड पॉलिसी पर हमला बोला हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल भारत तक अभी ट्रेड वार की आंच आती नहीं दिख रही हैं. लेकिन दो देशों के बीच शुरू हुई ट्रेड वार की आंच दूसरे देशों तक भी पहुंची तो दुनिया एक और मंदी से ग्रस्त हो जाएगा, जिसमें भारत पर भी असर होगा. क्या करेगा भारत?. किसी को कोई खबर क्यूँ नहीं?.

भारत सेफ है या नहीं ?

फॉर्च्युन फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि फिलहाल ट्रेड वार की आंच भारत पर आती नहीं दिख रही है, क्योंकि अभी यूएस उन देशों के साथ ट्रेड पॉलिसी को लेकर ज्यादा सख्‍त है, जिनके साथ व्यापार घाटा ज्यादा है. मसलन चीन, जापान, कोरिया जैसे देश जिनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता. ये देश यूएस को इंपोर्ट के मुकाबले एक्सपोर्ट ज्यादा करते हैं. वहीं, जिन प्रोडक्ट पर यूएस को व्यापार घाटा हो रहा है, उसके एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है. ऐसा हो क्यों रहा हैं.

अमेरिका और चीन में क्यूँ है वार ?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन पर 60 अरब डॉलर के व्यापार शुल्क लगाने की तैयारी है, इसके खिलाफ चीन का भरपूर जवाब सामने आया है. चीन ने अमेरि‍का को चेतावनी दी है कि‍ वह ‘ट्रेड वार‘ से नहीं डरता. चीन ने धमकी दी है कि‍ वह इंपोर्ट के खि‍लाफ उठाए गए डोनाल्ड ट्रंप के कदम के बदले 3 अरब डॉलर की लागत वाले अमेरि‍की गुड्स पर टैरि‍फ लगाएगा. चीन की धमकियों को कोई नजरंदाज़ कैसे कर सकता हैं?.

असल में चीन के अलावा कोरिया, जापान जैसे एशियाई देश भी यूएस को Import के मुकाबले Export ज्यादा करते हैं. ऐसे में ट्रम्प सरकार आने वाले दिनों में इन देशों के साथ भी अपनी ट्रेड पॉलिसी सख्‍त कर सकती है. जिसका रिएक्शन चीन की तरह ही ये देश भी दिखा सकते हैं. क्या इससे बचने के लिए सरकार कोई कदम क्यूँ नहीं उठा रही है ?

वहीं, इनमें कुछ और देश भी शामिल हो सकते हैं. बता दें कि अमेरिका की सरक्षणवादी नीति को लेकर मैक्सिको, कनाडा और यूरोपीयन संघ ने विरोध किया था. यूरोपीयन संघ के अधिकारियों ने यह भी कहा था कि स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क लगाने के बाद वे भी अमरीका में बनी हार्ले डेविडसन बाइक, बरबन व्हिस्की और लेवी जींस सहित अमेरीकी प्रोडक्ट पर नए कर लगाएंगे. नए कर क्या होंगे इसकी जानकारी होनी चाहिए. आखिर इंटरनेशनल स्तर पर इसका असर देखने को मिलेगा तो क्या और इसका प्रभाव क्या होगा?.

कैसे बढ़ सकता है ट्रेड वार ?

आर्थिक मामलों के जानकर का पनिंदकर पई का कहना है मौजूदा समय में अमेरिका नेशनल फर्स्ट की पालिसी पर काम कर रहा हैं. अगर US इसी तरह से Aggresive ट्रेड पालिसी पर काम करता रहा तो दूसरे बड़े इकॉनमी वाले देश भी US के साथ नेशनल फर्स्ट की पालिसी पर काम करना शुरू कर देंगे. इसमें चीन,जापान,यूरोपीय देशों की प्रमुख भुमिका हो सकती हैं. खासा असर पड़ेगा खासकर भारत जैसे देश पर. ऐसे में इस बात का डर बन गया है की 2 देशों के बीच शुरू हुए ट्रेड वार की आंच कई देशों तक फैल जाएगी.

ऐसा हुआ तो ट्रेड वार में फंसे देशों के साथ दूसरे देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, जिससे नेशनल इनकम कमजोर होगी. पई ने इस संभावना से भी इंकार नहीं किया कि अगर ट्रेड वार लंबा खिंचता है तो दुनिया एक और मंदी की ओर जा सकती है. क्या पई का कहना सही हैं?.

भारत के मुकाबले चीन से ट्रेड रिश्ते कई गुना अधिक है अमेरिका के :-

यूएस जहां चीन को 13040 करोड़ डॉलर का Export करता है, वहीं, चीन से वह 50560 करोड़ डॉलर का इंपोर्ट करता है. यानी चीन के साथ व्यापार घाटा 37500 करोड़ रुपए है. चीन यूएस के साथ लीडिंग ट्रेड पार्टनर है, वहीं भारत टॉप ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल नहीं है. हालांकि भारत बड़ी मात्रा में यूएस में आईटी सर्विस, टेक्सटाइल, कीमती पत्थरों का निर्यात करता है. यूएस पर निर्भर करता है ये अपना रैवैया कैसा रखता हैं.

वहीं, जापान के साथ यूएस का व्यापार घाटा 6880 करोड़ डॉलर, जर्मनी के साथ 5420 करोड़ डॉलर और मैक्सिको के साथ 7100 करोड़ डॉलर है. वहीं, इस तुलना में भारत के साथ यूएस का व्यापार घाटा करीब 2290 करोड़ डॉलर है जो बहुत कम है.

भारत पर इसका असर कैसे पड़ेगा ?

पई की माने तो ट्रेड वार की आंच भारत पर आना तय. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. US ने जैसे चीन के आयत पर टैरिफ लगाया है, उसी तरह भारत से आयत होने वाले इम्पोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा सकता हैं. असल में भारत के साथ भी US का सौदा देखे तो घाटे में अमेरिका ही है. भारत का यूएस के साथ व्यापार संबध WTO के नियमों के आधार पर होता हैं.

पिछले साल भारत-अमेरिका में 6700 करोड़ डॉलर का करोबार हुआ था. वहीं, चीन के साथ 7148 करोड़ डॉलर का कारोबार भारत ने किया था. यानी ट्रेड पार्टनर की बात करें तो भारत-अमेरिका, भारत-चीन आपस में बड़े ट्रेड पार्टनर हैं. भारत के लिहाज से अमेरिका और चीन टॉप ट्रेड पार्टनर हैं. ऐसे में अगर यूएस-चीन के बीच वार से व्यापारिक माहौल बिगड़ता है तो इसका असर भारत पर पड़ना तय है.

प्रमुख बिंदु :-

  • भारत सेफ है या नहीं ?.
  • भारत कहा खड़ा.
  • इसका असर भारत पर क्या होगा?.
  • क्या कहना है अलग-अलग सलाहकारों का.

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