अरुणाचल को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज और दूरदराज के इलाकों को जल्द ही विदेशी पर्यटकों को प्राप्त हो सकता है, साथ ही केंद्र ने ‘संरक्षित क्षेत्र परमिट व्यवस्था’ के तहत प्रवेश नियमों को कम किया. उत्तर-पूर्वी राज्य अधिक आराम से मानदंडों का पहला लाभार्थी बन सकता है, साथ ही जम्मू और कश्मीर में सिक्किम और लद्दाख को धीरे-धीरे खुलने की संभावना हैं.

पर्यटन क्षेत्र की अंतर-मंत्रिस्तरीय समन्वय समिति की बैठक के बाद, सरकार ने फैसला किया है कि अरुणाचल प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को अब दो साल के परमिट के बजाय पांच वर्ष की अवधि के लिए आंतरिक रेखा और संरक्षित क्षेत्र परमिट प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगा. कि पहले की अनुमति दी गई थी.

 मंत्रालय का  कहना क्या है ?

पर्यटन के केंद्रीय मंत्रालय अरुणाचल के तवांग घाटी, ज़िरो और बमडिला को पर्यटकों के प्रवाह को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, राज्य के सबसे खूबसूरत भागों में से. संवेदनशील गृहों में विदेशियों के आंदोलन के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चिंतित होने के बाद अन्य सीमावर्ती राज्यों में अधिक क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए धीरे-धीरे सुलभ हो सकता हैं.

पर्यटन मंत्री के एलए अल्फोंस ने कहा, “हमने गृह मंत्रालय को दो साल पहले लिखा था कि अधिक पर्यटकों को अरुणाचल प्रदेश में जाने की अनुमति देने के लिए आसान मानदंडों की मांग की जा रही है. इन नियमों को आसान बनाने में पर्यटन की सुविधा होगी और अधिक लोगों को दूर देखना होगा छिपे हुए स्थानों ”

रिपोर्ट का क्या मानना ?

रिपोर्ट की माने तो पर्यटन सचिव रश्मी वर्मा ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश को और अधिक पर्यटकों को खोलने का प्रयास है जबकि तावान्ग अरुणाचल में सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक है, क्योंकि इसके बौद्ध सम्पर्क के कारण, मंत्रालय पूर्वी अरुणाचल में दिबांग घाटी के पर्यावरण पर्यटन की संभावनाओं की खोज की प्रक्रिया में भी है.” अरुणाचल प्रदेश में पर्यटकों की पेशकश करने वाली साइटों की झांकना के रूप में, अरुणाचल के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने ट्विटर पर कब्जा कर लिया और तवांग घाटी में शनगेत्सर झील और अन्य स्थलों की तस्वीरें पोस्ट कीं.

भूटान, चीन और म्यांमार की सीमा से सटे और हिमालय की गोद में बसे अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं. अरुणाचल की बहुरंगी संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है. अरुणाचल में एक तरफ तो विभिन्न जनजातीय समूहों के उत्सव, उनके लोक संगीत की जीवंत परंपरा है तो दूसरी तरफ हरे-भरे ऊँचे-ऊँचे पहाड़, घने जंगल और उसके बीच से गुजरने वाली बलखाती सड़कें हैं जो लोगों को बरबस मुग्ध कर देती हैं.

जाने कैसे है अरुणाचल सबसे सौन्दर्य भरा प्रदेश ?

पूरे भारत में त्वांग में सबसे पहले सूरज निकलता है और इसे निहारने के लिए पर्यटक भी खूब आते हैं. अरुणाचल जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी इनरलाइन परमिट लेना होता है. अपना परिचय देने पर अरुणाचल हाउस से यह सहज ही मिल जाता है. पर्यटक इसे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में भी प्राप्त कर सकते हैं.

यह कहा जा सकता है कि प्रकृति ने अरुणाचल को अपने हाथों से सजाया है. यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों से अरुणाचल सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चला रही है. अरुणाचल में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सबकुछ है, सिर्फ मार्केटिंग की जरूरत है. अरुणाचल का शांत माहौल यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता है. अरुणाचल में अपराध का ग्राफ बेहद कम है.

यहाँ के लोग सामान्यत सीधे हैं. अन्य पर्यटन स्थलों की तरह यहाँ के स्थानीय लोग पर्यटकों को ठगते नहीं बल्कि उल्टे ठगे जाते हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए त्वांग में बौद्ध महोत्सव आरंभ किया गया है. गुवाहाटी से त्वांग का सफर बहुत मजेदार होता है.

प्रमुख बिंदु:-

  • सरकार बनाएगी अरुणाचल को विदेशी पर्यटकों के लिए सर्वोतम स्थान.
  • अरुणाचल को मिलेगा बढ़ावा.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here