अवनी चतुर्वेदी ने इतिहास रचा सबसे पहली महिला जेट फाइटर पायलट बनी

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इसमे कोई शक नहीं है कि आज की महिलाएं पुरुषो के साथ कंधे से कंधे से कंधे मिला कर चल रही है. धरती  हो या आकाश महिलाओं ने अपनी काबिलियत का परचम लहराया है. अभी ताजा खबर के अनुसार इंडियन एयर फ़ोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने अकेले फाइटर प्लेन उड़ा कर मिसाल कायम की है.

भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा, फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने इतिहास रच दिया. वे अकेले लड़ाकू विमान उडाने वाली देश की पहली महीला पायलट बन गयी है. पहली बार २०१५ में केंद्र सरकार ने महिलाओं को फाइटर पायलट के तौर पर शामिल करने की मंजूरी दी थी.  इसके बाद १८ जून २०१६ को महीला पायलट बनने लिये वायु सेना ने तीन महिलाओं को कमीशन किया था. जिसमे अवनी चतुर्वेदी के अलावा दो अन्य महिलाये मोहना सिंह और भावना कंठ भी शामिल थी.

विस्तार से

पहली बार पड़ाई के दौरान अवनी चतुर्वेदी को विमान उड़ाने का मौका मिला था. उस उड़ान के रोमांच ने उन्हें फाइटर पायलट बनने का जोश जगाया.  फाइटर प्लेन पायलट कमीशन मिलने पर अवनी ने कहा था  ‘हर किसी का सपना होता है कि वह उड़ान भरे. अगर आप आसमान की ओर देखते हैं, तो पंछी की तरह उड़ने का मन करता है. आवाज की स्पीड में उड़ना एक सपना होता है और अगर ये मौका मिलता है, तो एक सपना पूरे होने के सरीखा है.’

अवनी चतुर्वेदी की पहली उडान मिग-२१ में ३० मिनिट्स की रही थी. इस एयरक्राफ्ट को फ़ास्ट लैंडिंग एवं टेकऑफ के लिये जाना जाता है. इसमे उड़ान भरना एक कठीन कार्य होता है. यह भारतीय वायूसेना का सब से पुराना एयरक्राफ्ट है.

ऐसा माना जाता है कि, पहली उड़ान में बहूत जटिल ऑपरेशनस को नहीं आजमाया जाता है. कुछ निश्चित ड्रील को ही अंजाम देना होता है. पर कहा जाता है किसी पायलट की पहली उड़ान उसके जीवन की अविस्मरनीय घटना होती है. जिसे वह हमेशा याद रखना चहाता है. बताया गया है की पायलट के केरीयर के तौर पर यह एक बड़ा कदम है.

एक परिचय

अवनी चतुर्वेदी  का  जन्म २७ अक्टूबर १९९३ को हुआ था. उनके पिता मध्य प्रदेश सरकार के जल संसाधन विभाग में इंजिनियर है और माँ हाउसवाइफ है. उनके बड़े भाई आर्मी में अधिकारी पद पर सेवा दे रहे है. अवनी चतुर्वेदी को टेबल टेनिस, चेस के साथ साथ पेंटिंग और स्केचिंग में भी बहूत रूचि रही है. अपने केरियर को आगे बढाने में उन्हें परिवार वालो से हमेशा समर्थन एवं प्रेरणा मिलती रही है.

बताया गया है की अभी अवनी चतुर्वेदी को पूर्ण कुशलता प्राप्त करने के लिये और ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी. अगले छह माह वे विमान के जटिल पहलूओ के बारे में जानेंगी.  इसके बाद वे टेक्टिकल फ्लाइंग एवं जहाज को युद्ध में कैसे उपयोग किया जाता है के विषय पर ग्रेजुएट करेंगी. इन नयी पायलट को कहा गया है की वे अब कुशल पायलट बनने के लिये कम से कम चार साल के लिये अपना घर-परिवार भूल कर ट्रेनिंग पर एकाग्र हो जाए.

अन्य ऐसे गौरवमय उदहारण

यह पहला मौका नहीं है जब किसी भारतीय महीला ने देश विदेश में अपना नाम ऊंचा किया है. हम इस विषय पर बात करते है तो भारतीय मूल की अमेरिकन नागरिक कल्पना चावला का चेहरा बरबस याद आ जाता है.  जब उन्होने अंतरीक्ष की ऊंचाइयो को अदम सहास से नापा था. कल्पना चावला के पास विभन्न प्रकार के विमानों की प्रमाणिक उड़ान निदेशक का लाइसेंस प्राप्त था. कल्पना विभिन्न किस्म के विमानो की कॉमर्शियल पॉयलट भी थीं. अवनी चतुर्वेदी के साथ अन्य ऐसी अनेको भारतीय महिलाएं देश में है जिन्होने अपनी योग्यता से संसार को अपना लोहा मनवाया.

साइना नेहवाल: अर्जुन अवार्ड, राजीव गाँधी खेल रत्न, पद्म श्री से सम्मानित सईना नेहवाल ने भारतीय बेडमिन्टन को विश्व रेंकिंग में शिखर तक पहुचाया है.  लन्दन ओलोम्पिक में उन्होने देश के लिये कांस्य पदक जीता था. इसके अलावा भी वे अनेको उपलब्धियां प्राप्त कर चुकी है.

गीता फोगाट:  इन्होने २०१० के कॉमन वेल्थ खेलो में भारत के लिये गोल्ड मैडल जीता था. २००९ की कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में भी उन्होने देश को गोल्ड मैडल दिलाया था. गीता २००३, २००४, २००५ के एशियन कैडेट चैंपियनशिप में लगातार मैडल जीती थी.

अंजू बोबी जोर्ज: एथलेटिक्स में एक मना हुआ नाम है.  २००३ की वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिये कांस्य पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया. वे अर्जुन अवार्ड, पद्मश्री एवं खेल रत्ना अवार्ड से सम्मानित की जा चुकी है.

मिताली राज:  इनका महीला क्रिकेट में धमाकेदार बल्लेबाज के रूप में नाम आता है. वनडे में ४८.८२ एवं टेस्ट क्रिकेट में ५० का औसत एवं केवल वन डे में ५००० रन बनाने वाली एक महान खिलाडी है.

निष्कर्ष

इसके अलावा भारत देश में ऐसी अनेको महिलाये है जिन्होने साबित किया की प्रकृती ने पुरूषों एवं महीलाओ को बनाने में कोई भेद भाव नहीं किया है.  जरूरत सिर्फ मौको एवं सही द्रष्टिकोणों की है.

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