बलात्कार के लिए कैबिनेट ने सुनाई मौत की सजा

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नाबालिग बच्चों के साथ बलात्कार के केस में दोषियों को मौत की सजा दी जाये इस प्रस्ताव को लेकर आज केंद्रीय कैबिनेट कमेटी ने एक बहुत अहम फैसला लिया है. पॉक्सो एक्ट में नए संसोधन को करने के लिए मंजूरी दे दी गयी है.  इस संशोधन केे तहत देश में 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप के दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में 43.2% बलात्कार के मामलों को दर्ज किया गया था जिसमें 12 साल से कम उम्र के लड़कियों के बलात्कार शामिल हैं. यह प्रतिशत 2015 में लगभग 32.8% था.

बाल बलात्कारियों के लिए मौत की सजा में कदम जम्मू-कश्मीर के कथुआ जिले में आठ वर्षीय लड़की से क्रूर बलात्कार पर देशव्यापी क्रोध की पृष्ठभूमि में उभरता है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक द्वारा उन्नाव में एक लड़की का संदिग्ध बलात्कार किया गया. यह इतनी जबरदस्त बलात्कार घटनाओं पर व्यापक क्रोध को जन्म देते है. पिछले कुछ हफ्तों में ही बलात्कार की कई घटनाएं हुई हैं. उदाहरण के लिए, शुक्रवार को ही कम से कम चार ऐसी बलात्कार की घटनाओं की सूचना मिली थी जिसमे एक छत्तीसगढ़ से है, दूसरी ओडिशा से है, तीसरी उत्तर प्रदेश के यूटा से और अंतिम और सबसे क्रूर इंदौर के मध्य प्रदेश से जहाँ 8 महीने की बच्ची से बलात्कार कर मार दिया गया.

इन राज्यों में कानून को मिल चुकी है मंजूरी

राजस्थान सरकार ने इसी साल मार्च में 12 साल तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म (बलात्कार)के दोषियों को मौत की सजा वाले कानून को मंजूरी दी थी. इससे पहले मध्यप्रदेश ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य था. वहीं, हरियाणा में इससे जुड़े प्रावधान को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.

देश में कठुआ और उन्नाव गैंग रेप से हालत गंभीर

कठुआ-उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या का मुद्दा देशभर में सुर्खियों में है. पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं. वहीं उन्नाव में भाजपा के विधायक पर युवती के साथ गैंगरेप के आरोप हैं. इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है.

सरकार ने कोर्ट को बताया- बदलाव की प्रक्रिया शुरू

सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया था कि पॉक्सो एक्ट में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 12 साल तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले में अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान करेगी. फिलहाल, पॉक्सो एक्ट में इन सघन अपराधों में अधिकतम उम्रकैद की सजा या, कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान है.

POCSO एक्ट

शुक्रवार को, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि 12 साल तक के बच्चों से यौन शोषण करने वालों को मौत की सजा की दी जाये और इस सजा को कानून में संशोधित कर दिया जाये.

वर्तमान में, पीओसीएसओ अधिनियम के तहत, नाबलिग से गंभीर यौन हमले के लिए सर्वोच्च सजा अजीवन कारावास है. 2012 में यह कानून लागू हुआ था. यह उन लोगों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित है जो 18 वर्ष से कम आयु के हैं. भारतीय दंड संहिता के अनुसार, गेंगरेप के लिए मृत्युदंड की सजा है.

पॉक्सो एक्ट में नए संसोधन

  • 12 साल की बच्चियों से बलात्कार पर फांसी की सजा.
  • 16 साल से छोटी लड़की से गैंगरेप पर उम्रकैद की सजा.
  • 16 साल से छोटी लड़की से रेप पर कम से कम 20 साल तक की सजा.
  • सभी रेप केस में 6 महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा.
  • नए संशोधन के तहत रेप केस की जांच 2 महीने में पूरी करनी होगी.
  • अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी.
  • महिला से बलात्कार पर सजा 7 से बढ़कर 10 साल होगी.

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