देश के संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के नाम में बदलाव किया गया है और अब से वो डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर कहलाएंगे. इस बदलाव में उनके नाम में बाबा साहेब के पिता का नाम भी जोड़ दिया गया है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने बाबा साहेब के नाम में बदलाव का प्रस्ताव दिया था जिसके बाद यूपी सरकार ने इस आदेश को पारित कर दिया है. इसके बाद अब राज्य के सभी सरकारी कागजातों और रिकॉर्ड्स में बाबा साहेब का नाम बदलकर डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर किया जाएगा.

डॉ. आंबेडकर के नाम के साथ अब उनके पिता का भी नाम जोड़ा जाएगा. उनके पिता का नाम ‘रामजी मालोजी सकपाल’ था. अब आंबेडकर के नाम में आधिकारिक रूप से उनके पिता के नाम में से ‘रामजी’ शब्द जोड़े जाने की तैयारी है.

योगी सरकार ने बुधवार रात ही इस आदेश को मंजूरी दी

खबरों के अनुसार यूपी की योगी सरकार ने बुधवार रात ही इस आदेश को मंजूरी दे दी और साथ ही तत्काल राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों और उच्च न्यायालय को उनके रिकॉर्ड्स में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जगह डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर करने के लिए कहा है.

इस बीच, राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिये संविधान की आठवीं अनुसूची में बाबा साहेब ने किस तरह अपने हस्ताक्षर किये हैं. जो जिसका सही नाम है, उस सही नाम से ही लिखा करें. बस, इतना ही भाजपा ने किया है.

सिंह ने कहा कि जो लोग उनके सिद्धान्तों के दिखावे का छल करते हैं, वे उनका सही नाम ले ही नहीं पा रहे थे. आज वह सही तरीके से बुलाया जा रहा है. कम से कम जो सही किया गया है उसकी सराहना करें. राज्यपाल ने पूर्ववर्ती सपा सरकार को भी आंबेडकर का नाम ठीक लिखने का सुझाव दिया था. उस सरकार ने यह सुझाव क्यों नहीं माना. उन्होंने आगे कहा, ‘महाराष्ट्र में पिता का नाम बीच में लिखा जाता है. इसमें भी अगर विपक्ष को अयोध्या दिखता है तो इससे पता लगता है कि उसकी राजनीति कितनी गिर चुकी है. हमें खुशी है कि हमने आंबेडकर का सही नाम लिखा.’

आज तक के अनुसार, इस फैसले पर भाजपा सांसद उदित राज ने आपत्ति दर्ज की है. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अांबेडकर के नाम के बीच में रामजी लिखे जाने से अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है. जिससे दलित भी नाराज हैं. उदित राज का कहना है कि इसका प्रतिकूल असर पड़ता दिख रहा है और सुबह से ही लगातार चल रहा है कि नाम क्यों बदला गया है?

बहरहाल, राज्य सरकार के इस कदम की विपक्ष ने तीखी आलोचना की है.

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