कहाँ है ये चेतन्य स्थान ?

भारत के हिमाचल प्रदेश में अनेको चमत्कारिक एवं सिद्ध स्थल मौजूद हैं. ऐसा ही एक स्थान हिमाचल प्रदेश के उना जिले के मैड़ी गांव मौजूद है. यह स्थान डेरा वडभाग सिंह जी (BABA VADBHAG SINGH) का पवित्र स्थान है जिसने देश विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई हैं. यह स्थान उना से लगभग 50 किमी पड़ता है और चंडीगड़ से लगभग 170 किमी. यह देश के प्रसिद्द धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां बाबा बड़भाग सिंह के दरबार में बुरी आत्माओं के प्रभावों एवं मानसिक कष्टों से लोगो को मुक्ति मिलती है। यह एक अत्यंत शांत, सुंदर, एवं रमणीय स्थान है.

दिव्यता का अदभुत ऐहसास ?

भारत के हिमाचल प्रदेश में अनेको चमत्कारिक एवं सिद्ध स्थल मौजूद हैं. ऐसा ही एक स्थान हिमाचल प्रदेश के उना जिले के मैड़ी गांव मौजूद है. यह स्थान डेरा वडभाग सिंह (BABA VADBHAG SINGH) (BABA VADBHAG SINGH) का पवित्र स्थान है जिसने देश विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई हैं . यह स्थान उना से लगभग 50 किमी पड़ता है और चंडीगड़ से लगभग 170 किमी. यह देश के प्रसिद्द धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां पर बाबा बड़भाग सिंह के दरबार में बुरी आत्माओं के प्रभावों एवं मानसिक कष्टों से लोगो को मुक्ति मिलती है। यह एक अत्यंत शांत, सुंदर, एवं रमणीय स्थान है.

शान्ति ओर अध्यात्मिक एहसासों से भरी पुरी ये जगह जैसे धरती पर स्वर्ग का एहसास कराती है. यह जगह वास्तव में पृथ्वी पर एक स्वर्ग है. यहाँ व्यक्ति आसानी से हवा में शांति महसूस कर सकता है. इस जगह पर जैसे पवित्रता एवं अध्यात्म की खुशबु रसी बसी है. शुद्ध मन वाला कोई भी व्यक्ति हवा में बाबा जी की उपस्थिति का एहसास पा सकता है।.यह जगह सकारात्मक ऊर्जा का भंडार है. बाबाजी हमेशा ही अपने अनुयायियों के लिए अपने दिव्य स्वरुप में उपस्थित होते हैं, बल्कि यह कहे की वे सब के लिए ही उपस्थित होते हैं. बाबाजी का जीवन दिव्यता और महानता की एक अदभुत मिसाल रहा है. प्रत्येक इंसान को जीवन में एक बार इस स्थान पर अवश्य आना चाहिए. बाबाजी की झोली हमेशा सभी के लिए भरी हुई है, कोई भी कभी भी यहाँ से खाली हाथ नहीं जाता है.

वडभाग सिंह (BABA VADBHAG SINGH) ने राक्षस को क्यों कैद किया और क्या वचन लिया?

किवदंतियों के अनुसार वर्ष १७१६ में पंजाब के कस्बा करतारपुर में सिख गुरु अर्जुन देव जी के वंशज बाबा राम सिंह सोढी और उनकी धर्मपत्नी माता राजकौर के घर में वडभाग सिंह जी महाराज का जन्म हुआ था। वडभाग सिंह (BABA VADBHAG SINGH) बचपन से ही अध्यात्म के प्रति समर्पित होकर पीड़ित मानवता की सेवा में लग गए थे.  मानवता की सेवा को ही वे अपना लक्ष्य मानने लगे थे। बताया जाता है कि एक दिन वे भ्रमण करते हुवे मैड़ी गांव पर स्थित दर्शनी खड्ड, जिसे अब चरणगंगा के नाम से भी पहचाना जाता है पहुंचे और यहां के पवित्र जल में स्नान करके मैड़ी में ही एक बेरी के वृक्ष के नीचे ध्यान में लीन हो गए.

बताया जाता है कि यह क्षेत्र वीर नाहर सिंह जी महाराज जो कि पिशाच थे के प्रभाव में था. पिशाच द्वारा सताये जाने के बावजूद भी वडभाग सिंह (BABA VADBHAG SINGH) जी तपस्या से विचलित नही हुवे. एक दिन जब दोनों का आमना -सामना हुआ, तो वडभाग सिंह जी ने अपने तेज से पिशाच को बस में करके बेरी के वृक्ष के नीचे कैद कर दिया. तथा इस शर्त पर ही स्वतंत्र किया की वीर नाहर सिंह जी महाराज अब इसी स्थान से मानसिक रूप से परेशान और बुरी आत्माओं के शिकंजे में फंसे लोगों को स्वस्थ करेंगे और नि:संतान लोगों को भी संतान सुख का आशीर्वाद देंगे.

वह बेरी का पेड़ आज भी इस स्थान पर मौजूद है और यह डेरा वडभाग सिंह नामक स्थान के समीप ही स्थित है. आज भी डेरा वडभाग सिंह (BABA VADBHAG SINGH) पर सेकड़ो लोग बुरी आत्माओं के प्रभाव से मुक्ति की आशा से यहाँ आते है और स्वस्थ लाभ प्राप्त करते है

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