बहुओं को बुधवार के दिन क्यूँ नहीं जाना चाहिए ससुराल आखिर ऐसा क्यूँ है की बुधवार को उन्हें जाना नहीं चाहिए ?. आइए जानते है क्या है कारण. इन्हें 13 वर्गों में विभाजित किया गया है. उनमें से कुछ इस तरह है :-

  1. बुधवार के अनुसार ये निषेध कार्य माना जाता है। शास्त्रों में दिन के अनुसार सप्ताह के हर दिन कुछ कार्य करने की मनाही है। इसमें रोजाना जीवन से जुड़ी चीजों के अलावा यात्रा करने तक के लिए निषेध वार शामिल हैं। यहां हम आपको बुधवार से जुड़ी उस मान्यता के विषय में बता रहे हैं जिसके अनुसार इस दिन बेटियों को ससुराल विदा करने की मनाही है।
  2. होगा अत्यंत दुखदायी :- बुधवार के दिन बेटी को विदा करना आपके लिए और आपकी बेटी के लिए अत्यंत दुखदायी हो सकता है। अगर आपकी बेटी की बुध ग्रह की दशा खराब हो तो आपको ऐसी गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

    क्यूँ ना करें विदा ?

  3. नहीं करना चाहिए विदा :- ऐसी मान्यता है की बुधवार के दिन बेटी को विदा नहीं करना चाहिए। इस दिन विदा करने से बेटी को रास्ते में किसी प्रकार की दुर्घटना होने की संभावना होती है। इतना ही नहीं बेटी के संबंध ससुराल में बिगड़ भी सकते है। शास्त्र में इस अप्सकुन से जुड़े कारणों की भी व्याख्या है।
  4. बुध ग्रह चन्द्र की शत्रुता:- एक पौराणिक मान्यता के अनुसार ‘बुध’ ग्रह ‘चंद्र’ को शत्रु मानता है लेकिन ‘चंद्रमा’ के साथ ऐसा नहीं है, वह बुध को शत्रु नहीं मानता। ज्योतिष में चंद्र को यात्रा का कारक माना जाता है और बुध को आय या लाभ का।
  5. इसलिए बुधवार के दिन किसी भी तरह की यात्रा करना नुकशानदेह माना गया है। यदि बुध खराब हो तो दुर्घटना या किसी तरह की अनिष्ट घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।

    ऐसा क्यूँ ?

  6. बुधवार कथा :- बुधवार को बेटियों को क्यों नहीं विदा करना चाहिए और इससे जुड़ा परिणाम कितना भयंकर हो सकता है, शास्त्रों के अलावा बुधवार व्रत कथा में भी इसकी व्याख्या बड़े ही रुचिकर तरीके से की गई है। इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर में मधुसूदन नामक साहूकार का विवाह सुंदर और गुणवान कन्या संगीता से हुआ था।
  7. एक बार बुधवार के दिन मधुसुदन ने पत्नी के माता-पिता से संगीता को विदा करने के लिए कहा। उनके ससुर और सास बुधवार के दिन अपनी बेटी को विदा नहीं करना चाहते थे। उन्होंने दामाद को बहुत समझाया लेकिन मधुसुदन नहीं माने। संगीता को साथ लेकर वो रवाना हो गये।
  8. दोनों बैलगाड़ी से घर लौट रहे थे। तभी कुछ दुरी पर उनकी गाड़ी का पहिया टूट गया। वहां से दोनों पैदल ही चल पड़े। किसी जगह पहुचकर संगीता को प्यास लगी तो मधुसुदन ने संगीता को पेड़ के नीचे बैठाकर पानी लेने चले गए।
  9. थोड़े देर बाद वे जल लेकर वापस आ गए। लेकिन मधुसुदन आश्चर्य में पड़ गए, क्योंकि उनकी पत्नी के पास मधुसूदन के ही शक्ल-सूरत का एक दूसरा व्यक्ति बैठा हुआ था। संगीता भी उन दोनों में अपने असली पति को नहीं पहचान पाई। मधुसूदन ने उस व्यक्ति से पूछा, “तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो?”.

    फिर क्या हुआ ?

  10. उस व्यक्ति ने कहा “अरे भाई ये मेरी पत्नी संगीता है लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसे प्रश्न कर रहे हो ?”. ये सुनकर मधुसुदन को बहुत गुस्सा आया और उन्हें नकली कहकर लड़ने झगड़ने लगे। उनका झगड़ा देख पास के ही नगर के सिपाही वहाँ आ गए। सिपाही उनदोनों को पकड़कर राजा के पास ले गए।
  11. राजा भी निर्णय नहीं कर पा रहे थे। राजा ने दोनों को कारागार में डालने का आदेश दिया। राजा के फैसले से असली मधुसूदन भयभीत हो गए। तभी एक आकाशवाणी हुई- “मधुसूदन! तूने संगीता के माता-पिता की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन अपनी पत्नी को ससुराल से विदा कर ले आए। अब यह सब भगवान बुध देव के प्रकोप से हो रहा है”.
  12. मधुसुदन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान बुधदेव से क्षमा मांगी और भविष्य में कभी ऐसा नहीं करने का प्रण लिया। मधुसूदन की प्रार्थना सुनकर बुधदेव ने उन्हें क्षमा कर दिया। तभी दूसरा व्यक्ति अचानक गायब हो गया।
  13. राजा और दूसरे लोग इस चमत्कार को देखकर दंग रह गए। वो व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि स्वयं बुधदेव थे। इस प्रकार बुधदेव ने मधुसूदन को उसकी गलती का एहसास कराया और भविष्य में ऐसी गलती ना करने का सबक भी दिया।

प्रमुख बिंदु :-

  • क्यूँ नहीं जाना चाहिए बहु को ससुराल.

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