बीजिंग: इंटरनेट पर 'N-letter' पर प्रतिबंध लगा दिया
बीजिंग: इंटरनेट पर ‘N-letter’ पर प्रतिबंध लगा दिया

आप अपनी असहमति यानी अंग्रेजी के dissent शब्द को बिना ‘N-letter’ लगाए नहीं लिख सकते हैं. यही इस वक्त चीन के अंदर हो रहा है, जिसने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ अपनी असहमति जताने वालों के खिलाफ अस्थायी तौर पर N शब्द को बैन कर दिया है.

बीजिंग में इस बात की घोषणा की गई

जब से बीजिंग में इस बात की घोषणा की गई कि राष्ट्रपति का कार्यकाल की सीमा को खत्म किया जाएगा जिसका मतलब है. शी जिनपिंग अनिश्चितकाल के लिए चीन की सत्ता में बने रहेंगे उसके बाद वहां के सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर अपनी असहमति जाहिर की.

 बीजिंग: इंटरनेट पर 'N-letter' पर प्रतिबंध लगा दिया
बीजिंग: इंटरनेट पर ‘N-letter’ पर प्रतिबंध लगा दिया

चीन डिजिटल टाइम्स की तरफ से प्रकाशित एक सूची के मुताबिक कुछ शब्दों, मुहावरों और N शब्द पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही जॉर्ज ऑरवेल के नॉवेल 1984 तथा हाल ही में चर्चा में रहे कार्टून विनी द पू भी बैन किए जा चुके हैं.

विक्टर मेयर

 बीजिंग: इंटरनेट पर 'N-letter' पर प्रतिबंध लगा दिया
बीजिंग: इंटरनेट पर ‘N-letter’ पर प्रतिबंध लगा दिया

यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्निसिल्वेनिया के विश्लेषक विक्टर मेयर ने इसका विश्लेषण करते हुए बताया कि सरकार के डर से ‘N-letter’ को बैन कर दिया गया था. हालांकि, बाद में उसे फिर से उस शब्द को बहाल कर दिया गया है. लेकिन शेमलेस, आई अपोज, इनकैपेबल रूलर जैसे शब्द अभी भी बैन हैं.

न्यूज़वीक ने सूचना दी इन प्रतिबंधित वेबसाइटों को ऑनलाइन पोस्ट करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को निम्नलिखित संदेश मिलता है,: Sorry, this content the laws and regulations of Weibo’s terms of service.

प्रतिबंधित कुछ वाक्यांशों में ‘कानून बदलना’, ‘असहमत’, ‘अमरता’, ‘असह्य शासक’, ‘मैं विरोध’, ‘मेरे सम्राट’ और ‘व्यक्तित्व पंथ’ हैं, अधिक स्पष्ट हैं.

उदाहरण के लिए, चीन के सेंसर ने ‘Hongxian’ शब्द पर प्रतिबंध लगा दिया है यह एक अल्पकालिक राजशाही का शीर्षक था, जिसका नेतृत्व युआन शिकाई ने किया था, जिन्होंने खुद को हांगकांग सम्राट घोषित किया था. अपने कदम की लोकप्रिय अस्वीकृति के बाद, युआन सम्राट के रूप में 83 दिनों के बाद औपचारिक रूप से साम्राज्य को छोड़ दिया. चीन के सेंसर चाहते हैं कि लोग क्सी से हांग्ज़ियान की तुलना न करें.

कुछ किताबों पर भी प्रतिबंध

चीन के सेंसर ने कुछ किताबों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. यह आश्चर्यजनक है कि चुने गए किताबें इतनी स्पष्ट हैं कि यह एक आश्चर्य है कि वे पहले से ही प्रतिबंधित नहीं हैं. ये जॉर्ज ऑरवेल के डायस्टोपियन उपन्यास ‘1984’ और ‘एनिमल फार्म’ हैं, जो दोनों ही सत्तावादी शासनों के संकेत हैं.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here