भारत चुप रहे, जैसे हम कश्मीर पर चुप हैं-अब्दुल्ला यामीनअब्दुल्ला यामीन सरकार ने, आपातकाल उठाने और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल करने के भारत के प्रयासों पर अपना रूख स्पष्ट करते हुए नई दिल्ली को उसके “आंतरिक मामलो” से दूर रहने के लिए कहा है और कहा है कि द्वीप राष्ट्र भी कश्मीर मुद्दे पर प्रचार नहीं करेगा.

5 फरवरी को आपातकाल की घोषणा के बाद से विदेशी पत्रकारों

5 फरवरी को आपातकाल की घोषणा के बाद से विदेशी पत्रकारों के पहले समूह की प्रविष्टि को सुगम बनाने के साथ, यामीन ने अपने आठ मंत्रियों को रिहा करने के भारत के अनुरोध को स्वीकार न करने का संकेत दिया है. उनका मुख्य ध्यान मालदीव को अस्थिर बनाने और भारत से मालदीव के संबंधो को ख़राब करने के रशीद के प्रयासों पर है.

मत्स्य मंत्री और कृषि मंत्री महमूद शनी ने कहा “हम कश्मीर मुद्दे पर क्यों नहीं गए ……… क्या मध्यस्थ होने के लिए भी कहा? क्योंकि वे आंतरिक मामलें हैं और इसलिए भारत को हमारे मुद्दे से दूर रहना चाहिए. हम स्वतंत्र हैं और स्थिति से निपटने में सक्षम भी हैं. अगर हमें मदद की ज़रूरत होगीं, तो हम भारत को बताएंगे. मंत्रियों ने कहा कि मालदीव अपनी ‘भारत प्रथम की नीति’ को जारी रखेंगा और हम एक दोस्त बने रहेंगे.

बताया जा रहा है कि, किसी भी सैन्य हस्तक्षेप में पर्यटन व्यापार को झटका लग सकता है जो पहले से ही आर्थिक समस्याओ से पीडित है.  ये हस्तक्षेप बड़ी संख्या में मालदीवियों की आजीविका को प्रभावित करेगा.

प्रमुख बिंदु:-

  • अब्दुल्ला यामीन का कहना है भारत चुप रहे, जैसे हम कश्मीर पर चुप हैं.
  • क्या भारत इसका जवाब देगा.

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