भारत में कब तक रहेगा पीने का पानी?22 मार्च को विश्व जल दिवस से पहले यूनेस्को द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि 2050 तक भारत में जल संकट तेज हो जाएगा. मध्य भारत पानी की कमी को मजबूत करने की कोशिश कर रहा हैं जिसका मतलब है कि अक्षय सतह जल संसाधनों का 40% निकासी हो रहा हैं. हमे ये समझना होगा और जानना भी पानी को बर्बाद ना करें. पानी का सही इस्तमाल करें.

उत्तर भारत में पहले से ही तनावग्रस्त भूजल संसाधनों पर बड़ा दवाब हैं. नीति थिंक टैरी पर जल संसाधन विभाग के प्रमुख एसके सरकार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भूजल की कमी बेहद गंभीर हैं. उन्होंने कहा, “भूजल में कमी के कारण इसके साथ लवणता का खतरा रहता हैं.” क्या शुद्ध जल का स्त्रोत खत्म हो जाएगा?. फिर लोगो का जीवन यापन कैसे होगा?. ये सवाल नहीं आने वाले समय के लिए गंभीर समस्या हैं.

दक्षिण और मध्य भारत में 2050 तक नदी के घाटियों

दक्षिण और मध्य भारत में 2050 तक नदी के घाटियों में खराब जल की गुणवत्ता से जोखिम का उच्च स्तर अपने चरम सीमा पर होगा. यह रिपोर्ट भविष्य के परिदृश्यों में इसके अनुमानों के लिए एप् सिस्टम विश्लेषण के अंतर्राष्ट्रीय संस्थान द्वारा किए गए एक अध्ययन से ये पता चलता  हैं की समस्या कितनी मुश्किल होने वाली हैं. क्या इस समस्या का कोई हल नहीं?. अगर है तो लोगो को जागरूक करना चाहिए.

प्रदूषण न केवल सतह जल संसाधनों के साथ एक समस्या है

प्रदूषण न केवल सतह जल संसाधनों के साथ एक समस्या है बल्कि भूजल पर भी इसका असर देखने को मिल सकता हैं, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और एनआईओ के निदेशक के वैज्ञानिक एसडब्ल्यूए नकवी के मुताबिक उनका कहना था  “इसमें धातु का दूषित पदार्थ हैं. धातु मात्रा वों भी जल में क्यों चौक क्यों गये क्यों नहीं हो सकता ऐसा, धातुओं में बहुत सारी चीजों की मात्रा होती हैं. यह दिख रहा हैं कि जमीन में मलमल पदार्थों के डंपिंग की वजह से  खुले शौच या सूखे-गड्ढों के शौचालयों के कारण विघटित पदार्थों के अनुचित निपटान के कारण ई-कोलाई बैक्टीरिया के साथ भूजल जल के प्रदूषण में सहायक होता हैं.

यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में 2 अरब से अधिक लोगों को सुरक्षित पेयजल तक नहीं मिल पा रही हैं, लेकिन लगभग दो अरब से दोगुना लोगों का सुरक्षित स्वच्छता तक सेवाएं प्रदान नहीं की जा सकती. 2010 के स्तर की तुलना में 2050 तक पानी की मांग लगभग एक तिहाई से बढ़ने की उम्मीद हैं. चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और पाकिस्तान वर्तमान में पानी का सबसे बड़ा उपभोक्ता हैं और वे 2050 में सबसे ऊपर पानी की स्रोत वाले बने रहेंगे.

रिपोर्ट ने जनसंख्या वृद्धि:-

रिपोर्ट ने जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के लिए पानी की कमी को जिम्मेदार ठहराया, जो सिर्फ पानी की कमी को नहीं बढ़ा रहे थे बल्कि उन क्षेत्रों में भी बाढ़ की मात्रा बढ़ा रहे हैं जो ऐतिहासिक रूप से बाढ़-प्रवण नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 में बाढ़ के जोखिम के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या 1.2 अरब से बढ़कर 1.6 अरब हो जाएगी, और 45 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति भी जोखिम के  खतरे में होगा. रिपोर्ट के माने तो प्रकृती समाधान की सिफारिश करती है जो लोग प्रकृति को खत्म करने में लगे हुए हैं, राजस्थान में छोटे पैमाने पर जल संचयन संरचना का उदाहरण देते हुए, जिसमें 1,000 गांवों की पानी की प्यास बुझती हैं. इसका एक और उदाहरण सिंचाई (यूटीएफआई) परियोजना के लिए बाढ़ का भूमिगत स्वरुप है, जिसे गंगा नदी बेसिन में संचालित किया जा रहा हैं.

यूटीएफआई बाढ़ और सूखे दोनों का प्रबंधन करने का एक तरीका हैं क्योंकि विधि द्वारा ओज मौसम के दौरान एक्वाइफरों के पुनर्भरण के लिए अतिरिक्त प्रवाह को चैनलिंग करने की आवश्यकता होती हैं.  इस प्रकार डाउनस्ट्रीम बाढ़ को रोकने के लिए भूजल का एक बड़ा सूखे के संचारण के दौरान जरूरतों को पूरा करने में मदद करता हैं.

वर्षा के पानी को बचाने का भी एक विशेष प्रबंध करना चाहिए. ताकि पानी को बचाया जा सके जिसके साथ-साथ इस पानी का प्रयोग उचित समय पर हो सके. आने वाले दिनों में इसके स्तर में गिरावट आती जाएगी. इसके लिए ये जरुरी हैं की पानी को जितना अधिक हो सके बचाया जा सके.

प्रमुख बिंदु:-

  • 2050 तक पानी की मांग हो जाएगी 1 तिहाई बढ़ जाएगी.
  • पानी की मांग में लोगो की संख्या का 1.2 अरब से बढ़कर 1.6 अरब हो जाएगी.

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