भारत ने बनाई जानलेवा बीमारी की आयुर्वेदिक दवा

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भारत ने बनायीं जानलेवा बीमारी की आयुर्वेदिक दवा
भारत ने बनायीं जानलेवा बीमारी की आयुर्वेदिक दवा

डेंगू एक ला इलाज बीमारी है यही सुना है ना आपने मैंने तो यही सुना है की डेंगू का कोई इलाज नहीं है. पर अब ना अपने देश में बल्कि पूरी दुनिया में पहली बार भारत के वैज्ञानिको ने डेंगू का इलाज खोज लिया है. यह परिक्षण भी कुछ मरीजो पर सफल हुआ. अब पूरी दुनिया में इस आयुर्वेदिक दवा को बाजार में भेजने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत बहुत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल इस पर हो रहे हैं. आशा है की अब ये 2019 तक हमारे लिए बाजारों में उपलब्ध हो जाएगी और डेंगू का इलाज संभव हो जायेगा यह दवाई पूरी तरह से आयुर्वेदिक दवा है यह 7 तरह के औषधीय पौधों से बनी है.

कितने दिनों से चल रहा हैं परिक्षण और किसने बनायी?

सी.सी.आर.ए.एस. (आयषु मंत्रालय के शोध संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद) के वैज्ञानिको ने इस डेंगू की दवा को बनाया है. इस दवा को तैयार करने में 2 साल से ज्यादा का समय लग गया है. सीसीआरएएस के 12 से भी अधिक वैद्य (विशेषज्ञ) ने इस पर काम किया है. इन परीक्षणों के बाद सीसीआरएएस, काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बलगाम और कोलार मेडिकल कॉलज में डेंगू मरीजों पर बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है

सितम्बर 2019 तक सारे परिक्षण हो जायेंगे इसके बाद इन परीक्षणों का विश्लेषण किया जायेगा, यह तीन स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल का निर्णय लिया गया है.

कब तक बाजार में आ सकती है यह डेंगू की आयुर्वेदिक दवा?

अगले साल तक इस आयुर्वेदिक दवा के पुरे क्लिनिकल ट्रायल हो जायेंगे इसके बाद प्रोसिजर के हिसाब से दावा को मार्केट में फैलाया जायेगा. सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद के महानिदेशक, वैद्य प्रो. केएस धिमान का कहना है की डेंगू की आयुर्वेदिक दवा दुनिया में पहली बार खोज निकाली गयी हैं और अभी तक जिस मरीज पर भी इसे टेस्ट किया गया है. इस आयुर्वेदिक दवा के कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं हुए हैं.

कितनी टेबलेट में और कितने दिनों में होगा सही डेंगू?

किये गये परीक्षणों में जो आयुर्वेदिक दवा मरीजो को दी गयी वह एक काढ़े के रूप में मरीजो को दी गयी. पर अब इसे टेबलेट के रूप में मरीजो को दी जा रही है. इस आयुर्वेदिक दवा का डोज 7 दिनों तक का बताया जा रहा है. दिन में 2-2 बार एक एक टेबलेट लेनी है. इसकी कीमत भी बहुत अधिक नहीं बताई जा रही है.

डेंगू की दवा का 90 मरीजों पर हुआ ट्रायल

इस आयुर्वेदिक दवा का परिक्षण जब गुड़गांव के मेदांता अस्पताल, कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में भर्ती डेंगू के 30-30 मरीजों पर किया गया तो इस आयुर्वेदिक दवा को मरीजो को देने के बाद मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या बॉडी में बढ़ गयी. और इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं हुआ. इसका परिक्षण को चूहों और खर्गोस पर किया गया था जिस पर ये परिक्षण सफल रहा था इसके बाद ही मरीजो पर इसका परिक्षण किया गया.

अभी तक तो इसके लिए कोई दवा नहीं थी

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में हर साल डेंगू से पीड़ित पांच से 10 करोड़ नए मामले सामने आते हैं.  इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा अभी तक बच्चे ज्यादा आते है. अभी तक डेंगू का इलाज संभव नहीं था. अभी तक सिर्फ डेंगू के बुखार को दूर करने के लिए पैरासिटामॉल ही डॉक्टर्स दे देते थे और अधिक से अधिक लिक्विड पीने का बोलते थे क्योकि इससे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ जाये, इसके लिए कोई दवाई अभी तक नहीं थी.

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