बुआ ने भतीजे को फिर से उल्लू बनायाबहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने समाजवादी पार्टी (एसपी) को बड़ा झटका देते हुए अगले उपचुनावों में समाजवादी पार्टी का साथ नहीं देने का ऐलान किया है. मायावती की पार्टी बीएसपी ने बयान जारी कर कहा है कि गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव की तरह किसी भी उपचुनाव में वो सक्रिय हिस्सा नहीं लेगी. क्या ये सच में होने जा रहा है?.

अखिलेश के लिए झटका इसलिए है क्योंकि कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है और बीएसपी का संकेत साफ है कि इसमें एसपी की मदद नहीं करेगी. हालांकि मायावती 2019 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मात देने के लिए समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. मतलब अवि साथ नहीं बाद में साथ. ये कैसा रवैया है ?.

बीएसपी की ओर से जारी किये गये बयान के मुताबिक मायावती ने कहा ”बीएसपी अब आगामी किसी भी उपचुनाव में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की तरह सक्रिय भागीदारी नहीं करेगी. बीएसपी को अब अपनी पूरी ताकत सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने और लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगानी है और हालात को पूरी तरह से अपने पक्ष में करने का पूरे जी-जान से प्रयास करना है.” क्या बसपा इस बार जीत पाएगी?.

मायावती ने 13 मॉल एवेन्यू स्थित अपने निवास पर आयोजित बैठक के बाद मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकारों में दलित व पिछड़ा वर्ग जीवन के हर क्षेत्र में और भी ज्यादा पिछड़ते चले जा रहे हैं. यही कारण है कि पिछले 65 वर्षो में बीजेपी और आरएसएस को सत्ता से दूर रखा गया.

बीजेपी को हराने के लिए एकजुट हो विपक्ष :-

मायावती ने पदाधिकारियों के साथ मीटिंग में ये संदेश दिया की 2019 में बीजेपी को हराने के लिए सारी पार्टी को एकजुट होना पड़ेगा. हमने देश की भलाई के लिए सपा-बसपा के बीच गठबंधन किया है. उनका आगे कहना था बीजेपी चाहे जितना लोगो में बसपा-सपा के बीच गलत अफवाहें फैला रहा हो ये सारी बातें गलत है.

राष्ट्रीय लोकदल पर फिर से विचार करेगी बसपा :-

राज्यसभा चुनावों में राष्ट्रीय लोकदल ने बीएसपी को समर्थन देने की बात कही थी लेकिन उसके एक विधायक का वोट खारिज हो गया. बीएसपी का मानना है कि ऐसा जानबूझकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया, ऐसे में गठबंधन की स्थिति में आरएलडी की भूमिका पर फिर से विचार करना होगा.

प्रमुख बिंदु :-

  • सपा को एकबार फिर लगा झटका.
  • बसपा और सपा हुए अलग.
  • मायावती की हुंकार.

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