प्रेम का बंधन सदियों से एक ही रूप में जुड़ता आ रहा है, और वो रूप है “स्वतंत्र”. स्वतंत्रता से मतलब “स्वछंदता” नहीं है. प्रेम एक असीमित परिमाण में जन्म लेता है और कितना भी समेटने की कोशिश करो, आखिर मर हमारी कोशिशों का दम टूट जाता है लेकिन प्रेम के कोने हमारे हाथ की परिधि में नही सिमट पाते.

इसी तरह एक नया उदाहरण आज सामने आया, जिसमे एक सद्गुरु की कृपा से दो समर्पित मन एक प्रेम के धागे को हाथ में लिए चलती हुई ट्रेन में सात फेरे लेकर जन्मो के लिए एक दुसरे के हो गए. कहते हैं “जिस सर पर गुरु का हाँथ हो, वो सर कभी झुकता नहीं है” इसी तरह आज गुरु रूप में श्री श्री रविशंकर जी ने अपने दो अनुयाइयों को चलती ट्रेन में विवाह के बंधन में बांध दिया.

इस विवाह की परिपाटी शुरू होती है भदोही एक फार्मासिस्ट सचिन सिंह से, जिनकी शादी इलाहावाद की ज्योत्सना पटेल से होनी थी. चूँकि यह शादी अप्रेल में होना तय हुआ था पर प्रेम के पंक्षियों को उनके सद्गुरु की कृपा भी मिल गई. उन्हौंने अपने गुरु “श्री श्री रविशंकर” की उपस्थिति में शादी करने का निर्णय लिया. और गुरु ने भी होली के रंग भरे त्यौहार में जीवन को रंगने का आशीष दे दिया, सो इस तरह चलती ट्रेन में रच गई अनोखी शादी.

इसे कहते हैं सच्ची “गुरुकृपा”

आपको बताना चाहेंगे की श्री श्री रविशंकर इस समय ओम अनुग्रह यात्रा पर हैं. जिस ट्रेन में वो सफ़र कर रहे थे उसी में उन्हौंने अपने अनुयाइयों का मंडप बना दिया. इसे कहते हैं सच्ची “गुरुकृपा”. कोई व्यक्ति मन में कोई भाव भरता है और गुरुकृपा से वो साकार हो जाए तो जीवन में किसी भी समस्या का डर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाता है.

एक ट्रेन को मंडप की तरह सजाया गया, ढोल की जगह मंजीरे बजाए गए. ट्रेन के यात्री बने बिन बुलाए बाराती, फिर भी नाचने में कोई कसर नही रखी किसी ने. आखिर में सबके आशीर्वाद के साथ दो लोग सदैव के लिए एक हो गए.

इस विवाह से समाज में एक स्पष्ट सन्देश जरुर जाएगा की इस देश में सब कुछ संभव है, बुरा भी संभव है तो अच्छा भी संभव है. जरुरत अच्छी सोच और बड़े दायरे की है. बड़े दायरे में सिर्फ हम हमारा परिवार, हमारे रिश्तेदार या सिर्फ हमारे दोस्त नही आएं, बल्कि हर वो इन्सान आपके दायरे में रहे जो आपकी तरह जीना और खुश रहना चाहता है.

इस शादी ने ट्रेन में हो रहे हादसों और ऐसा करने वालों को तमाचा मारा है, और गरज के साथ संदेश दिया है की चलती रेल में सिर्फ हादसे नहीं उत्सव भी हो सकते हैं.

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