डाइवोर्स लेना चाहते है तो खुद से पूछें ये 7 सवाल

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डाइवोर्स लेना चाहते है तो खुद से पूँछें ये 7 सवाल ?
डाइवोर्स लेना चाहते है तो खुद से पूँछें ये 7 सवाल ?
डाइवोर्स लेना चाहते है तो खुद से पूँछें ये 7 सवाल ?
डाइवोर्स लेना चाहते है तो खुद से पूँछें ये 7 सवाल ?

डाइवोर्स आपके रिश्ते को बचाने की आखरी कोशिशों की भी नाकामयाबी है. इस शब्द के न केवल आपको धक्का लगता, बल्कि आप एक ऐंसी सजा के लिए दोषी ठहराए जाते हैं जिसका अपराध अपने किया ही नहीं हो. और फिर यह भी कहा जाता है की ताली दोनों हाथों से बजती है एक से नहीं, इसलिए आप भी बेकसूर नहीं हो सकते. डाइवोर्स एक अभिशाप है, लेकिन किसी वजह से या कई सारी वजहों से अगर आप एक दूसरे के साथ खुश नही रह पा रहे हों तो बेहतर है एक अच्छा सा मोड़ देकर रिश्ता ख़त्म कर दिया जाए.

आज कल डाइवोर्स बड़ी आम बात हो चली है, जहाँ देखिये लड़का हो या लड़की हर किसी के मुंह पर ये शब्द चढ़ा रहता है. लेकिन यदि आपने किसी भी रीती रिवाज से या किसी भी विधि से एक दुसरे को अपनाया है तो आपका फर्ज बनता है की इस अद्भुत रिश्ते को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की जाए. इन कोशिशों के बाद भी आपको आपका रिश्ता बचता हुआ दिखाई न दे तो आखरी फैंसला करने से पहले खुद से बात करें और पूछे ये 7 सवाल, यदि इनके जवाबों से आप खुद संतुष्ट होंगे तो एक बेहतर फैंसला कर पाएँगे.

खुद से कौन से पूछे 7 सवाल:-

1. वजह क्या है :-

अपने आप से सबसे पहले पूछने योग्य बात वो है जो आपसे कोई और नहीं पूछ सकता की आखिर वजह क्या है?. ये तो पता होना चाहिए की डाइवोर्स लेने की वजह क्या है. ऐसी सिचुएशन ही क्यों आई की डाइवोर्स लेना पड़ा?. ऐसा क्या हुआ?. अगर आपको इस बारे में पता नही है तो आप अपने पार्टनर से बेहिचक पूछ भी सकते है. जी हाँ आपकी ईगो बस सामने ना आए की आप क्यों पूछे?.

ऐसा बिलकुल ना करें ईगो को धक्के मारकर निकाले बाहर और बेहिचक पूछे. हो सकता है आपने गलती की हो और आपको एहसास ना हो. ऐसा अक्सर होता है, आप भी इंसान है गलती हर किसी से हो सकती है. वजह जाने ये सबसे पहली बात है.

  1. क्या ये अकेली वजह है :-

    मान लीजिए कोई वजह होती भी है, तो क्या ये अकेली वजह है? या कोई और भी वजह है, जिसके कारण आप डाइवोर्स लेना चाहते है. अगर ये केवल अकेली वजह है तो इस वजह को आप दोनों एक साथ बैठकर दूर कर सकते है.

    क्या सिर्फ एक वजह से आप डाइवोर्स के नतीजे पर पहुंच जाएंगे?. ये केवल आपकी जिंदगी का सवाल नही है, बल्कि आपके साथ ही आपके पार्टनर की जिंदगी का भी सवाल है. उस वजह को दरकिनार कर अगर आप साथ बिताए खुशी के पल याद करेंगे, ये सोचेंगे की हम साथ रहते हुए कितने खुश थे और आगे भी साथ रह सकते हैं, इससे आपको अपने साथी की अच्छाईयां भी महसूस होंगी. तो आपको देर नही करनी चाहिए इसे जल्द सुलझाए और सुखी वैवाहिक जीवन को आगे बढ़ाए.

  2. वजह का मुख्य आधार क्या है :-

    रीज़न चाहे जो भी हो उसका आधार क्या है? ये जाने बिना आप डाइवोर्स के बारे में तनिक भी ना सोचे. रिश्ते को जोड़ना कठिन होता है, लेकिन रिश्ता तोड़ने में चंद मिनट्स ही लगते है. वजह का आधार जाने. कारण आप अपने पार्टनर को साथ बैठाकर समझें, कैसे ये कारण बीच में आया और वो असलियत में क्या था. ये ध्यान रखें इन सभी बातो में आप और आपके पार्टनर ही रहे और कोई ना हो.

    इस प्राइवेसी को मेन्टेन करके रखें. इससे ये होगा की आप अपने पार्टनर को समझा पाएंगे और और जब आपका पार्टनर आपको समझाएगा तो आप भी अच्छे तरीके से समझ पाएंगे. वजह का मुख्य आधार जाने बिना डाइवोर्स का निर्णय बिलकुल ना ले.

  3. इस कारण का जिम्मेदार कौन है :-

    अब अगर आपको कारण पता लग गया है तो ये जानने का प्रयास करें की इस कारण का जिम्मेदार आखिर कौन हैं? आप है या आपके या आपका पार्टनर. जिम्मेदार कोई भी हो, अगर गलती किसी ने भी की हो या गलती अनजाने में हो गई हो, उसे आप स्वीकार करें और कोई गलती होने पर अपनी गलती स्वीकार करना सीखें. इससे ये पता चलता है की आपके रिश्ते की आपके लिए कीमत कितनी है.

    जिम्मेदार जो भी हो उसकी पूरी बात सुनें. सुननें के बाद आप फ्रंक्ली आँखों में आँखे डालकर बात करें

    इससे आपके पार्टनर को ये तो लगेगा की उनके बारे में आप क्या सोचते हैं. जिम्मेदारी लेने के साथ ही साथ अपने पार्टनर से ये भी कहें की आगे ऐसी गलती दोहराई नही जाएगी. इससे आपका और आपके पार्टनर का एक दूसरे पर विश्वास फिर से वापिस आएगा.

  4. इसके लिए कोई अकेला जिम्मेदार है

    ऐसा भी कभी होता है की आपके और आपके पार्टनर के बीच कोई एक ही जिम्मेदार होता है. हो सकता है ये सच हो. सच जानने के बाद आपको लगता है कोई अकेला जिम्मेदार है, तो आप बेहिचक ऐसा पूछ सकते हैं. अगर कोई अकेला जिम्मेदार है तो जिम्मेदारी पूर्ण रूप से अपने आप पर लेना बहुत बड़ी बहादुरी होती है.

    ऐसी बहादुरी अगर आप दिखाएंगे तो हो सकता है आपका रिश्ता टूटने से बच जाए. हो तो कुछ भी सकता है ना? लेकिन कुछ नही करने से अच्छा है की कुछ कर ले. इससे आपके पार्टनर को ये तो लगेगा की आपको रिश्ते के टूटने का दुःख तो हो रहा है.

  5.  सुधार की गुंजाइश है :-

    अब अगले चरण की बात करें तो वो ये होना चाहिए कि क्या इसके बाद सुधार की गुंजाइश है?. अब ये सवाल आता है कि गुंजाइश होने का मतलब क्या है?. कहने का मतलब ये है कि क्या आपके या आपके पार्टनर किसी की भी गलती हुई हो, उसमे सुधार किया जा सकता है या नही?

    ये चर्चा आप और आपके पार्टनर दोनों मिलकर तय करेंगे तब कही जाकर इसका निराकरण हो पाएगा

    बिना आपसी सहमति के ये बिलकुल नही हो सकता. प्राइवेसी के साथ-साथ इस बात का ध्यान रखे की आपकी या आपकी इस गलती के बाद क्या आप लोग साथ रहना चाहते भी हैं या नहीं?

    ये बात हमेशा महतव्पूर्ण होती है कि सुधार की गुंजाइश कितनी है? या हो भी सकती है या नही? इसमे आप और आपके पार्टनर जिसने भी गलती की हो साफ़ शब्दों में स्पष्ट कर दे. इसमे आपकी और आपके पार्टनर की भलाई है.

  6. डाइवोर्स के बाद आप क्या करेंगे :-

    आपने ये सोचने की कोशिश की है की डाइवोर्स के बाद आप क्या करेंगे? क्या आप दूसरी शादी करेंगे या यूँ ही सिंगल होकर अपनी जिंदगी जिएंगे. डाइवोर्स के बाद क्या आप अपने रिश्ते को जोड़ने का प्रयास करते रहेंगे? फिर सवाल आता है ये प्रयास आपने शरुआत में शुरू क्यों नही किए? कहा जाता है समय एक बार चला जाए तो वो वापस लौटकर नही आता है. समय से बलवान कुछ भी नही होता है.

    इसमे कोई दो-मत नही है की आप जो सोचेंगे वो सही ही सोचेंगे, इसका अभिमान मत कीजिएगा आप भी इन्सान है और आप भी गलत सोच सकते हैं. इस बात का ध्यान रखें आप जो भी सोचें positive सोचें. आपसे बेहतर आपकी जिंदगी को कोई और नही जान सकता. आपसे बेहतर आपको कोई और नही समझ सकता की आपको क्या चाहिए, खासकर जब डाइवोर्स की बात कर रहे हैं तब तो किसी और की सलाह लेने से पहले खुद से बात करना आपके भविष्य के लिए हितकारी होगा.

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