भगवान और भक्त का रिश्ता भक्ति और भावनाओ पर आधारित है. ऐसा कहा भी गया है की हम ईश्वर को जैसे और जिस रुप में याद करते है वो हमें उस रूप में ही मिलता है. भगवान (Bhagwan) तो वास्तव में निराकार होता है पर वो आप के लिए हमेशा हर उस रूप में मौजुद है जिस रूप में आप उसे पाने चाहते है. किसी को इष्ट देवताओ में, किसी को पितरों में, किसी को गुरू में, किसी को अपने माता पिता में, तो किसी को अपने पति या प्रेमी में भगवान दिखता है. आप जैसा उस से सम्बन्ध जोड़ना चाहे वो आप के लिए बस वैसा ही है. बस होना चाहिये श्रद्धा, भक्ति, और मन की पवित्रता.

ऐसे ही अलग अलग मान्यताओ के चलते देश के अलग अलग हिस्सों में भगवान् को याद करने के अलग अलग रिवाज विकसित हो गये है. लोग अपने अपने तरीके से ईश्वर से मन्नत मांगते है. कोई मन्नत के लिए भगवान को कौड़ी भेंट करता है तो कोई विदेश जाने की इच्छा से भगवान के मंदिर में खिलौना हवाई जहाज चडाता है. अब हम आपको भगवान (Bhagwan) से भक्तो के जुड़ाव के मजेदार रिवाज के बारे में बताते है जो आपने पहले कभी नहीं सुना होगा.

हम आपको एक ऐसे ही एक चमत्कारी मंदिर के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. आप जानते है की देवभूमि उत्तराखंड अपने चमत्कारों और भक्ती भावो के लिए सारे संसार में जाना जाता है. बद्रीनाथ, केदारनाथ आदि प्रसिद्द तीर्थ स्थल यही बसे है.  लेकिन हम आज थोडा हट कर कुछ जानकारी आप से बांटना चाहते है. भक्तो की सुविधा के लिए भगवान् ने एक ख़ास सुविधा अपने भक्तो को दे रखी है, अत: आपके पास यदि समय का आभाव है और आप किसी कारण से मंदिर नहीं पहुच पाते है तो आप भगवान् को चिट्ठी भेज कर ही अपनी समस्या समझा सकते हो.

आज हम जिस मंदिर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो देवभूमि उत्तराखंड की धरा पर गोलू देवता (Golu Devta) नामक एक क्षेत्रीय देवता का स्थान है जो पूरे देश भर में प्रसिद्ध है. यह मंदिर नैनीताल जिले एवं उत्तराखंड के अल्मोड़ा के बीच में आता है. ख़ास बात यह है कि यहां केवल चिट्ठी भेजने से ही भगवान (Bhagwan) आप की सुन लेते है.

कहा जाता है कि गोलू देवता (Golu Devta) न्याय के देवता हैं. जब भी किसी को कोई परेशानी होती है वो गोलू देवता (Golu Devta) को एक पत्र में अपनी सारी समस्याये लिख कर चड़ाना होता है. इस मंदिर में एक और रिवाज यह है की लोग यहाँ भगवान को अपनी प्रार्थना नोटिस में लाने के लिए मंदिर प्रांगण में घंटी भी बंधते है इसलिए इस मंदिर को घंटी वाला मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि पत्र के साथ-साथ भक्तगण अपनी प्रार्थना गोलू देवता (Golu Devta) तक पहुंचाने के लिए मंदिर परिसर में घंटियां भी बांधते हैं.

किस तरह के मामले लोग गोलु देवता के पास ज्यादातर ले कर आते है?

चुकिं गोलु देवता न्याय के देवता है अत: कोर्ट- कचहरी के मामले वाले भक्त यहाँ खास तौर पर आते है. आलम यह है की स्टैम्प पेपर पर, नोटरी वगैरह के साइन करा कर गोलू देवता (Golu Devta) को पत्र लिखा जाता है. प्राइवेसी के लिये एक और मजेदार नियम ये भी है कि अन्य भक्त के लटकाये गए पत्र को कोई और भक्त पड़ ले तो यह पापजनक माना जाता है.

गोलू देवता (Golu Devta) की कहानी

प्रचलित कहानी के मुताबिक गोलू देवता (Golu Devta) चंद राजा, बाज बहादुर की सेना में अधिकारी के पद पर थे और किसी युद्ध में लड़ते हुवे वीरगति को प्राप्त हुवे थे. उनके सम्मान स्वरुप अल्मोड़ा में चित्तैई मंदिर की स्‍थापना की गई थी. लोग मुराद पुरी होने पर यंहा घंटियों एवं घंटो का चडावा चड़ाते है. गोलू देवता ( Golu Devta) को लोग घंटियों वाले देवता के रुप में भी याद करते है. देखने में आता है की कई घंटियां तो यहाँ पर सालो पुरानी है. लोग यहाँ गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर लिखित रूप में अपील करते हैं और उनकी अपील पर जब मन्नत के मुताबिक सुनवाई हो जाती है तब वे फीस के रूप में यहां आकर घंटियां तथा घंटे भेंट करते है.

लोगो की आस्था भक्ति और भगवान का चमत्कार ही वह चीज है जो लोगो को यहाँ खिंच लाती है.

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