जितनी आस्थाऐ धर्म को लेकर हमारे देश में है, उतनी आस्थाऐ शायद ही दुनिया के किसी अन्य देश में पायी जाती हो. भारत देश को चमत्कारों का देश भी कहा जाता है. और चमत्कारों की ही तलाश में हर साल सैकड़ों विदेशी लोग दुर दुर से भारत में आते है. ऐसे अनेको चमत्कार भारत भर में अलग अलग जगहों पर देखने और सूनने को मिलते है की इन्सान भगवान् के अस्तित्व पर यकीन करने को जैसे मजबूर हो जाता है.

आज हम आप को एक ऐसे ही चमत्कारिक मंदिर के बारे में बतायेंगे जिसके बारे में जान कर आप विस्मय और कौतुहल से भर उठेंगे. यह प्रसिद्ध मंदिर है उदयपुर शहर से करीब 60 कि.मी. दूर कुराबड- बम्बोरा मार्ग पर अरावली पहाडियों की विस्तृत श्रंखलाओ के बीच स्थित है. यह मंदिर मेवाड़ का एक प्रमुख शक्ति-पीठ है और ईडाना माता जी मंदिर (Idana Mata Mandir) के नाम से जाना जाता है.

बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में हुआ था. पुराने समय में यहाँ के स्थानीय राजा, माँ को कुलदेवी के रुप में पूजते थे. कई चमत्कारों के किस्से इस मंदिर के लोगो के द्वारा कहे सुनाये जाते है. नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर में भक्तो की भीड अचानक से बड जाती है.

ईडाना माता का अग्निस्नान

ईडाना माता मंदिर (Idana Mata Mandir) यहाँ के पुजारी के अनुसार महीने में एक या दो बार माता अग्नि स्नान करती है. मंदिर के पास रहने वाले पंडित सज्जनदास की मानें तो, मान्यताओ के अनुसार ईडाणा माता पर अधिक भार होने पर माता स्वयं ज्वालादेवी का रूप धारण कर लेती हैं. इस दौरान स्थानक पर अचानक से आग धधकने लगती है. देखते ही देखते अगिन विकराल रूप धारण कर 10 से 20 फिट तक लपटें पहुंच जाती है मगर श्रृंगार के अतिरिक्त अन्य सामग्री को कोर्इ आंच तक नहीं आती है.

हालांकि आज तक किसी ने माँ को अग्निस्नान करते हुऐ देखने का दावा नहीं किया है. अग्निस्नान के बाद माँ के वस्त्र अग्नि में भस्म हो जाते है जिन्हें बाद में बदल दिया जाता है. अग्नि स्नान की एक झलक पाने के लिये श्रद्धालुओ की जबरदस्त भीड़ यहाँ जमा हो जाती है.

एक और धारणा यहाँ के बारे में प्रचलित है वो यह कि लकवे से पीड़ित लोग भी यंहा आकर ठीक हो जाते है. इसके लिए लकवे ग्रस्त मरीजो को एक रात यहाँ गुजारना पड़ता है. जब कोई लकवा ग्रस्त मरीज ठीक हो जाता है तो वह चाँदी के अंग बनवा कर माँ के दरबार में भेंट करता है. ईडाना माता का यह मंदिर (Idana Mata Mandir) एक खुले प्रांगण में स्थित्त है. मंदिर के पीछे बड़ी मात्रा में श्रद्धुलुओ द्वारा त्रिशूल स्थापित किये जाते है.

किसे भी भक्त की मनोकामना पूर्ण हो जाने पर भक्त गण यहाँ माता को त्रिशूल भेंट करते है. इसके अलावा संतान सुख प्राप्ति के इच्छुक लोग भी यहाँ बड़ी मात्रा में आत्ते है और मनोकामना पूर्ण हो जाने पर माता के मन्दिर में झूले चडाते है.

मंदिर की एक और ख़ास बात

मन्दिर की एक सब से महत्वपूर्ण और ख़ास बात यह है कि यह मंदिर चोबीसौ घंटो खुला रहता है. यहाँ पर भक्तगण कभी भी आ जा सकते है. यहाँ पर सुबह साढ़े पांच बजे आरती का समय होता है, सात बजे माँ का श्रृंगार दर्शन होता है एवं शाम को सात बजे माँ की पुन: आरती होती है इन तीनो समय भक्तो को माँ के दर्शन का मौका मिलता है.  ईडाना माता मंदिर(Idana Mata Mandir) के ट्रस्ट ने पिछले कुछ वर्षो में अनेको विकास कार्य यहाँ किये है जिसमे  गौशाला निर्माण, धर्मशाला निर्माण, रोगियों को मुफ्त भोजन एवं आवास सहित अनेको जनोपयोगी कार्य यहाँ करवाए गए हैं

कहाँ स्थित है यह मंदिर?

उदयपुर शहर से करीब 60 कि.मी. दूर कुराबड- बम्बोरा मार्ग पर अरावली पहाडियों की विस्तृत श्रंखलाओ के बीच स्थित है. यह मंदिर मेवाड़ का एक प्रमुख शक्ति-पीठ है और ईडाना माता जी मंदिर (Idana Mata Mandir) के नाम से जाना जाता है.

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