गरीबी हटाने का एक शब्द भेदी बाण खोज निकाला इस देश ने जानिए क्या है ?अकसर गरीबी हटाने की बात कही जाती रही है. इसके लिए दुनियाभर के देशों में रोजगार देने से लेकर जनहित की योजनाओं को लागू भी किया गया. इस संबंध में कोशिशें जारी भी हैं. ऐसी ही एक कोशिश लंबे समय से गरीबी और भूखमरी की मार झेल रहा वेनेजुएला भी कर रहा है. इसी कोशिश में वेनेजुएला की सरकार ने अपनी मुद्रा से शून्य मिटाने का एलान किया है. ये क्या नए तरीके से नोटबंदी हो रही है ?.  वो भी 1 नहीं बल्कि कुल 3 शून्‍य हटाने की बात की तैयारी जोरों पर है. क्या ऐसा किया जा सकता हैं.

वेनेजुएला ने निकाला सबसे बड़ी नोट :-

वैसे तो हमारे देश में  8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने से पहले तक 1000 रुपए,  सबसे बड़ा नोट था. वहीं इस नोट के बंद होने के बाद 2 हजार रुपए के नोट ने इसकी जगह ले ली. अब सबसे बड़े नोट की बात करें तो 2 हजार रुपए का है. क्या भविष्य में इससे भी बड़ी नोट देखी जा सकता है ?. लेकिन क्‍या आपको पता है कि वेनेजुएला में सबसे बड़ा नोट होता है, 1 लाख का. यहां की मुद्रा का नाम बोलिवर है. यही 1 लाख का नोट अब बाजार से गायब होने जा रहा है.

देश के राष्ट्रपति का क्या है कहना ?

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसका फरमान जारी किया. उनका कहना था ‘मैंने मुद्रा में से 3 शुन्य हटाने का फैसला किया है और बाजार से पुराने नोट और सिक्के हटाकर 4 जून से उनकी जगह नए नोट लाने का फैसला किया है. इस कदम से बोलिवर की कीमत मपर कोई असर नहीं पड़ेगा.

बाजार में क्या है कीमत?

बोलिवर का सबसे बड़ी नोट माना की एक लाख का है पर इसकी कीमत बाजार में कुछ भी नहीं है. काले बाजार में एक लाख बोलिवर के बदले 0.5 डॉलर मिलते है. खुद वेनेजुएला की बात करें तो एक लाख बोलिवर के बदले एक कप कॉफी भी नहीं खरीदी जा सकती. एक किलो चीनी का भाव है ढाई लाख बोलिवर. तो ये है एक लाख बोलिवर का कड़वा सच.

क्या ऐसा पहले भी हुआ था ?

मुद्रा में इस तरह का बदलाव वेनेजुएला के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. साल 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो  शावेज ने भी इसी तरह तीन शून्य गायब किए थे. तब उन्होंने मुद्रा को “मजबूत बोलिवर” का नाम दिया था.

60 अरब डॉलर का है कर्ज:-

वेनेजुएला का वितीय संकट 60 अरब डॉलर का पहुंच गया है. जिसके चलते लैटिन अमेरीकी देश के कई Companies जैसे भारत की इंडियन आयल और ONGC शामिल है का डेट पेमेंट नहीं कर पाई है.

आखिर कैसे आई ये नौबत :-

2014 में क्रूड की कीमते गिरने की वजह से पिछले कुछ साल में वेनेजुएला दिवालियापन से जूझ रहा है. नोटबंदी के बाद से हालत और नाजुक हो गई. वेनेजुएला की इकोनॉमी तेल पर निर्भर करती है और तेल के आयत से देश का 90 फीसदी रेवेन्यू से ही जेनरेट होता है. वेनेजुएला ऐसा देश है जो सबसे अधिक बार दिवालियापन को झेल चुका है. वेनेजुएला सरकार को इन सबकी का ध्यान ठीक ढंग से रखना चाहिए.

वेनेजुएला इससे पहले 11 बार खुद को दिवालिया घोषित कर चुका है. ऐसा क्यूँ क्या यह की Economy इतनी बदहाल है.  पहली बार 1826 के युद्ध के बाद वेनेजुएला दिवालिया घोषित हुआ था. तेल के समृद्ध भंडार वाला यह देश इसके बाद भी ग्यारह बार दिवालिया हो चुका है. आखिर तो 1 लाख के नोट के निकालने का कारण क्या रहा होगा?. वहां की सरकार को इसकी जानकारी कम से कम आम जनता को तो देनी चाहिए. क्या इससे वेनेजुएला की हालत में सुधार आएगा ?. उम्मीद करते है ऐसा ही हो.

प्रमुख बिंदु:-

  • वेनेजुएला ने निकाली सबसे बड़ी नोट.
  • राष्ट्रपति का क्या है कहना?.
  • 60 अरब डॉलर का है कर्ज.

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