आँखों पे नीली चादर को

कुछ तारे ओढ़ के बैठे है,

हाथो से खाली उदर ढके, सपनो की रेत पे लेटे हैं…

एक आधी पोनी साड़ी में

ममता की सूखी क्यारी में

ऊँगली की पतली थिरकन में

कुछ फुल गुलाबी सोते है

हाथो से खाली उदर ढके…सपनो की रेत पे लेटे हैं…

रुखी शाख… दिवारों को

सर्दी की कड़क कटारो को

सीने तक घुटनों को लाकर

करवट सुबहा तक लेते है

हाथो से खाली उदर ढके , सपनो की रेत पे लेटे हैं…

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