हर मंत्र में ओम शुरू में और अंत में स्वः क्यूँ होता है
हर मंत्र में ओम शुरू में और अंत में स्वः क्यूँ होता है

कभी आपने ये सोचा है की हर मंत्र में ओम शुरू में और खत्म स्वः पर होता है?. अगर आपने ऐसा नहीं सोचा है तो कोई बात नहीं हम आपको आज इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे है आखिर क्यूँ होता है ऐसा. अगर किसी भी भगवान की पूजा होती है तो अनेकों मंत्र पढ़े जाते है जो की अनगिनत है. फिर भी सभी मंत्रो जापो में ओम का नाम सबसे ऊपर है. यहाँ तक की पौराणिक और बीजमंत्र में भी मंत्र में ओम के साथ शुरुआत होती है.

धर्मं शास्त्र में इसकी गुप्त जानकारी वर्णित है. शास्त्रों की माने तो दुनियाँ की उत्पत्ति तीन चीजों से हुई है. इनका नाम है राज,सत,तम. ओम को एकाक्षर ब्रम्हा कहा गया है जो इस विश्व के निर्माता है. ओम को सारे संसार का निर्माता और नाशक भी कहा गया है. इसलिए हर मंत्र में ओम शुरू में और अंत में स्वः का नाम आता है नाम. इसके साथ-साथ ओम को राज,सत,तम का अधिकारी भी माना गया है.

भगवान गणेश ही बसे है हर मंत्र में ओम कैसे ?

भगवान गणेश को भी इस दुनियाँ का पारब्रह्म कहा गया है. इसलिए इनका नाम है गणेश मतलब गुणों के इश. भगवान गणेश बस स्वर्ग के ही भगवान नही अपितु गुणों के भी भगवान माने गए है. ओम को भगवान गणेश का संकेत भी माना गया है. इनका नाम मंगलमुर्ति भी है मतलब इनकी पुजा सदैव पहले होगी. किसी भी मंत्र के पहले ओम का नाम लेने का एक और मतलब ये भी है की किसी कभी भगवान से पहले भगवान गणेश का नाम सबसे पहले लेना. इसलिए हर मंत्र मे ओम से शुरू होता है.

अब बात करते है स्वः का क्या मतलब है?. पहले ऐसा कहा जाता है देव गण भोजन की कमी होने से परेशान रहते थे. ब्रह्मा देवता ने निश्चय किया किया की हवीशु(उस समय यज्ञ के समय हुआ करता था) में परिवर्तित कर दिया जाए ताकि इससे देव गण के इस्तमाल में आ सके. लेकिन अग्नि इस दहानम को जलाने में असक्षम साबित हुए. हर मंत्र में ओम आते है इस तरह.

फिर देव ब्रह्मा ने तपस्या की मूल्य प्रकीर्ति पर और तभी एक साक्षात् देवी प्रगट हुए और उन्होने कहा कहो क्या चाहिए. तभी ब्रह्मा देवता ने कहा की “आप अग्नि के मिल जाइए ताकि दहानम नही जल रहा वो जल उठे. ब्रह्मा ने कहा केवल हविशु मंत्र सहित देवी तक उपलब्ध है. क्या आप अग्नि के साथ विलीन होकर इस हविशु को देव गणों तक पहुँचाने का कष्ट करेंगी. फिर देवी स्वः अग्नि के साथ मिलकर उनमे बस गई. आप जान गए होंगे क्यूँ हर मंत्र में ओम शुरू में स्वः अंत में होता है. अग्नि ने अपनी शक्ति को दहाना शक्ति को स्वः से बांट दिया या अलग कर दिया जो की अग्नि की पत्नी थी.

प्रमुख बिंदु :-

जाने क्यूँ ओम शुरू में और अंत में स्वः आता है ?.

जाने ऐसा क्यूँ है होता?.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here