Hichki जैसी पावरपैक फिल्म के साथ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने वापस आईं Rani Mukherji ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह क्यों एक ‘मर्दानी’ एक्ट्रेस कहलाती हैं. फिल्म ‘Hichki’ में अकेले दम पर शानदार अभिनय से Rani ने पहले ही दिन लाखों दर्शकों का दिल जीत लिया. Hichki की एक बीमारी को लेकर फिल्म बनाने वाली Rani Mukherji का Box Office पर जबरदस्त पंच पड़ा. फिल्म ट्रेड एनलिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक देशभर के मात्र 961 स्क्रीन से लगभग 3.35 से 3.50 करोड़ रुपए की कमाई पहले ही दिन कर चुकी है. हालांकि अभी पूरा आंकड़ा आना बाकी है, लेकिन Rani की बॉक्स ऑफिस पर धमक लोगों के दिलों में जगह बना गई.

Hichki रिव्यु

‘Hichki’ की कहानी नैना माथुर (Rani Mukherji) की कहानी है. फ़िल्म में नैना माथुर एक खास तरह की बीमारी से ग्रसित है इस कारण उनके बोलने में रुकावट आती है. नैना का सपना है टीचर बनने का. मगर तमाम स्कूल्स बोलने में उनके रुकावट की वजह से उन्हें जॉब देने से मना आकार देते हैं. नौकरी की तलाश करती जब वो हार जाती हैं तब अंत में उनके सामने एक ऐसा प्रस्ताव आता है जिसे वो हंसते हुए स्वीकार कर लेती हैं.

लेकिन, यहां ट्विस्ट यह है कि नैना को जिस क्लास में पढ़ाना है वो नगर निगम के स्कूल में पढ़ने वाले उन बच्चों की क्लास है जिन्हें जबरदस्ती स्कूल में रखा गया है क्योंकि नियमों के आधार पर इन बच्चों को स्कूल से निकाला नहीं जा सकता. और यह बच्चे ज़ाहिर तौर पर विद्रोही किस्म के हैं जिन्हें स्कूल में अपनी जगह, अपने वर्क को लेकर कॉम्प्लेक्स तो हैं ही, तेवर भी बगावती है. ऐसे में नैना माथुर इनकी ज़िंदगी में आती है और किस तरह से इन बगावती बच्चों को अनुशासित और शिक्षा के प्रति जागरुक बच्चे बनाने का प्रयास करती हैं, इसी ताने-बाने पर बनी है फ़िल्म- ‘Hichki’.

Rani Mukherji के अलावा इस फिल्म में और कोई भी बड़ा स्टार नहीं है, लेकिन उनकी एक्टिंग और जबरदस्त स्क्रिप्ट के चलते हर कोई वाहवाही कर रहा है. तरण आदर्श ने इस फिल्म को पॉवरफुल बताते हुए साढ़े 3 स्टार दिये.

उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म को देखने के बाद दर्शकों का फीडबैक भी काफी पॉजिटिव है. बता दें कि Rani Mukherji ने चार साल बाद बड़े परदे पर दस्तक दी है. Rani Mukherji को आखिरी बार 2014 में ‘मर्दानी’ में एक दबंग पुलिस अफसर के किरदार में देखा गया था, अब वे ‘Hichki (हिचकी)’ लेकर आई हैं.

एजुकेशन पर बनीं फ़िल्में

ऐसा नहीं है कि एजुकेशन पर फ़िल्में पहले नहीं बनीं हैं. ‘चॉक एंड डस्टर’, ‘तारे ज़मीन पर’ या ‘थ्री इडियट’ जैसी फ़िल्मों के जरिये शिक्षा और शिक्षा प्रणाली को बड़े पर्दे पर दिखाया गया है. बहरहाल, आज के दौर में हमारी शिक्षा प्रणाली और शिक्षा पद्धति पर सवाल भी खूब उठते हैं और उस पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत भी है. एक बुनियादी बात जो एजुकेशन सिस्टम को लेकर हमेशा ही कही जाती है वो यह कि कोई विद्यार्थी खराब नहीं होता, खराब या अच्छे शिक्षक होते हैं.

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