Indian history कई हजार साल पुराना माना जाता है. Indian history को अगर विश्व के इतिहास के महान अध्यायों में से एक कहा जाए तो इसे अतिश्योक्ति नहीं कहा जा सकता. इसका वर्णन करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने कहा था, ‘‘विरोधाभासों से भरा लेकिन मजबूत अदृश्य धागों से बंधा’’.

History की विशेषता है कि वो खुद को तलाशने की सतत् प्रक्रिया में लगा रहता है और लगातार बढ़ता रहता है, इसलिए इसे एक बार में समझने की कोशिश करने वालों को ये मायावी लगता है.

इस अद्भुत उपमहाद्वीप का इतिहास लगभग 75,000 साल पुराना है और इसका प्रमाण होमो सेपियंस की मानव गतिविधि से मिलता है. यह आश्चर्य की बात है कि 5,000 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के वासियों ने कृषि और व्यापार पर आधारित एक शहरी संस्कृति विकसित कर ली थी.

आइये हम जानते हैं . Indian history की शीर्ष 10 घटनायें.

India and Pakistan का विभाजन (1947)

Indian history की शीर्ष 10 घटनाक्रम
भारत और पाकिस्तान का विभाजन(1947)

15 अगस्‍त 1947 को एशिया का उपमहाद्वीप कहलाने वाला भारत, ब्रिटिश हुकूमत से आजाद तो हो गया, लेकिन द्वि राष्‍ट्र के सिद्धांत पर अंग्रेजों ने भारत को आजादी इसी शर्त पर दी कि अखंड भारत खंडित होगा.  हिंदुस्‍तान और पाकिस्‍तान के रूप में भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर किया गया.

आपको जानकार आश्‍चर्य होगा कि मनुष्‍य जाति के इतिहास में इतनी ज्‍यादा संख्‍या में लोगों का विस्‍थापन कभी नहीं हुआ. यह संख्‍या तकरीबन 1.45 करोड़ थी. 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए.

भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हो गया(1947)

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भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हो गया(1947)

India आजादी के लगभग 70 साल पूरे कर रहा है. इस दौरान देश ने हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए. राजनीतिक बदलाव देखे, तो विकास की ओर अग्रसर योजनाएं और कार्यक्रम भी. युद्ध से दो चार होना पड़ा तो अपनी परमाणु शक्ति में भी भारत ने इजाफा किया. मेट्रो ट्रेन से लेकर कम्प्यूटर तक भारतीय नागरिकों के जीवन का हिस्सा बने. आज हम दुनिया के दिग्गज देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तरक्की के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं. मगर देश के स्वतंत्र होने से लेकर मौजूदा वक्त तक देशवासियों ने तमाम उतार-चढ़ाव देखे.

 

अतीत की ऐसे ही कुछ तारीख जो भारत का इतिहास बनीं.15 अगस्त 1947- पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त की आधी रात देश को संबोधित किया और भारत के आजाद होने की घोषणा की. इस तरह 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों के शासन से मुक्त हो गया.

Panipat की दूसरी लड़ाई (1556)

यह पानीपत का दूसरा युद्ध (5, November 1556), पानीपत का द्वितीय युद्ध उत्तर भारत के हिंदू शासक सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (लोकप्रिय नाम- हेमू ) और अकबर की सेना के बीच 5 नवंबर, 1556 को पानीपत के मैदान में लड़ा गया था. अकबर के सेनापति खान जमान और बैरम खान के लिए यह एक निर्णायक जीत थी. इस युद्ध के फलस्वरूप दिल्ली पर वर्चस्व के लिए मुगलों और अफगानों के बीच चलने वाला संघर्ष अन्तिम रूप से मुगलों के पक्ष में निर्णीत हो गया और अगले तीन सौ वर्षों तक मुगलों के पास ही रहा.

Tarain का द्वितीय युद्ध (1192)

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तराइन का द्वितीय युद्ध (1192)

यह तराइन का द्वितीय युद्ध वर्ष 1192 ई. में पृथ्वीराज चौहान और शहाबुद्दीन मुहम्मद ग़ोरी के मध्य लड़ा गया. तराइन के इस युद्ध को ‘भारतीय इतिहास’ का एक विशेष मोड़ माना जाता है. इस युद्ध में मुस्लिमों की विजय और राजपूतों की पराजय हुई. इस विजय से बाहरी आक्रमणकारियों के पाँव भारत में काफ़ी लम्बे तक जम गये. क्योंकि इस युद्ध से पूर्व भी पृथ्वीराज के कई हिन्दू राजाओं से युद्ध हो चुके थे और इन राजाओं से उसके आपसी सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण नहीं थे, जिस कारण अधिकांश राजपूत राजाओं ने ‘तराइन के द्वितीय युद्ध’ में पृथ्वीराज का साथ नहीं हुआ.

Haldighati का युद्ध(1576)

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पानीपत का पहला युद्ध (21, April 1526)

यह युद्ध मुग़ल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था. अकबर और राणा के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था. ऐसा माना जाता है कि इस युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे. मुग़लों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी. उन्होंने आखिरी समय तक अकबर से सन्धि की बात स्वीकार नहीं की और मान-सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करते हुए लड़ाइयाँ लड़ते रहे.

Panipat का पहला युद्ध (21, April 1526)

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पानीपत का पहला युद्ध (21, April 1526)

Panipat का पहला युद्ध (21, April 1526) को  उत्तरी भारत में लड़ा गया था, और इसने इस इलाके में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी. यह उन पहली लड़ाइयों मे से एक थी जिसमें बारूद, आग्नेयास्त्रों और मैदानी तोपखाने को लड़ाई में शामिल किया गया था. सन् 1526 में, काबुल के तैमूरी शासक ज़हीर उद्दीन मोहम्मद बाबर, की सेना ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोधी, की एक ज्यादा बड़ी सेना को युद्ध में परास्त किया. युद्ध को 21 अप्रैल को पानीपत नामक एक छोटे से गाँव के निकट लड़ा गया था जो वर्तमान भारतीय राज्य हरियाणा में स्थित है. पानीपत वो स्थान है जहाँ बारहवीं शताब्दी के बाद से उत्तर भारत के नियंत्रण को लेकर कई निर्णायक लड़ाइयां लड़ी गयीं.

Chandragupta Maurya (313 ईसा पूर्व)

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चन्द्रगुप्त मौर्य (313 ईसा पूर्व)

Chandrgupt मौर्य का जन्म 340 ईसा पूर्व में पाटलीपुत्र में हुआ था, जो आज बिहार में स्थित है। उनकी पृष्ठभूमि हालांकि, अनिश्चित है. कुछ दावे कहते है कि वह नंद के वंशज थे. वह बचपन से ही एक बहादुर और समझदार नेता थे, वह, चाणक्य जो कि अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में निपुण एक महान ब्राह्मण विद्वान था, उसकी छत्रछाया में , तक्षशिला विश्वविद्यालय में चन्द्र गुप्त मौर्य को मार्गदर्शन मिला, और बाद में चन्द्रगुप्त के गुरु बने.

उन्होंने चाणक्य की सहायता के साथ एक सेना की स्थापना की,  और जब मौर्य साम्राज्य की स्थापना हो गई तो बाद में, वह उनके मुख्य सलाहकार और प्रधानमंत्री बन गए.

राजा राजा चोल प्रथम (शासन काल 985 से 1014 ईसवी) 

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राजराजा चोल प्रथम (शासन काल 985 से 1014 ईसवी)

Raaja raja चोल प्रथम, जिसने एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में में चोल साम्राज्य की नींव रखी, वह व्यक्ति महान राजराजा के अलावा कोई नहीं है. कला और धर्म के संरक्षक, वह एक संगठनात्मक और राजनीतिक प्रतिभाशाली भी थे.जब राजराजा शासक बने,उन्होंने दक्षिण की सीमा तक में दक्षिणी भारत और श्रीलंका के राज्यों  और कलिंग पूर्वोत्तर में (उड़ीसा) पर विजय प्राप्त की. उन्होंने उत्तर में चालुक्यों तथा दक्षिण में पंड्या से अनेको युद्ध लड़े.

उन्होंने दक्षिण पश्चिम में पारंपरिक चेरा विरोध का भी दमन किया. दक्षिण भारत का अधिपति बनने में उन्हें एक दशक से भी काम समय लगा.

मुहम्मद बिन कासिम (712 ई0)

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मुहम्मद बिन कासिम (712 ई0)

भारत पर पहला सफल आक्रमण 712 ई0 में मोहम्मद-बिन-कासिम द्वारा किया गया. यह आक्रमण खालीफा-अल-वाजिद के शासन काल में हुआ था. श्रीलंका में अरब यात्रीयों की मृत्यु इस आक्रमण का प्रमुख कारण था. भारत पर अरबवासियों के आक्रमण का मूल उद्देश्य लूट-पाट करना एवं इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था.

मुहम्मद-बिन-कासिम के आक्रमण के समय सिंध का शासक दाहिर था इसने सिंध तथा मुल्तान को जीता. मुल्तान से अरब आक्रमणकारियों को अपार सोना प्राप्त होने के कारण उन्होंने मुल्तान को स्वर्ण नगरी कहा. भारत में जजिया कर लगाने वाला प्रथम व्यक्ति मोहम्मद-बिन-कासिम था. अरबी भाषा में अंको को हिंदसा कहा जाता है क्योंकि उनका मूल स्थान हिंद (भारत) है.

सिकंदर का आक्रमण (ईसा पूर्व 326)

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सिकंदर का आक्रमण (ईसा पूर्व 326)

ईसा पूर्व 326 में सिकंदर सिंधु नदी को पार करके तक्षशिला की ओर बढ़ा व भारत पर आक्रमण किया. तब उसने झेलम व चिनाब नदियों के मध्‍य अवस्थ्ति राज्‍य के राजा पौरस को चुनौती दी. यद्यपि भारतीयों ने हाथियों, जिन्‍हें मेसीडोनिया वासियों ने पहले कभी नहीं देखा था, को साथ लेकर युद्ध किया, परन्‍तु भयंकर युद्ध के बाद भारतीय हार गए. सिकंदर ने पौरस को गिरफ्तार कर लिया, तथा जैसे उसने अन्‍य स्‍थानीय राजाओं को परास्‍त किया.

उग्र भारतीय लड़ाके कबीलों में से एक मालियों के गांव में सिकन्‍दर की सेना एकत्रित हुई. इस हमले में सिकन्‍दर कई बार जख्‍मी हुआ. जब एक तीर उसके सीने के कवच को पार करते हुए उसकी पसलियों में जा घुसा, तब वह बहुत गंभीर रूप से जख्‍मी हुआ. मेसेडोनियन अधिकारियों ने उसे बड़ी मुश्किल से बचाकर गांव से निकाला.

सिकन्‍दर व उसकी सेना जुलाई 325 ईसा पूर्व में सिंधु नदी के मुहाने पर पहुंची, तथा घर की ओर जाने के लिए पश्चिम की ओर मुड़ी और बापिस लोट गयी.

तो ये रही Indian history से जुड़ीं वें बातें जो हमेशा हमारे लिए सवाल जबाब का विषय रहती हैं.

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