इस ओलम्पिक में नज़र रहेगी कुत्ते के मांस वाली परंपरा परबहुत समय से दक्षिण कोरिया कुत्ते की मांस खाने की परंपरा के साथ जुड़ा हुआ है. बहुत से लोग कुत्ते खाने से खुश होते थे. कोरिया इस महीने शीतकालीन ओलंपिक के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खेलों का भी आयोजन कर रहा है. इस वजह से कार्यकर्ता पुरानी संस्कृति को समाप्त करने मे जुटे हुए है. 1988 के Seol ओलंपिक में पहली बार दक्षिण कोरिया मे कुत्ते का मांस खाने की व्यापक आलोचना हुई थी.

2002 में फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान, फ्रैंच अभिनेत्री Brigitte Bardot ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने का अभियान भी चलाया था. इस वर्ष लगभग 500,000 लोगों ने शीतकालीन ओलंपिक के खिलाफ एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं. जागरूकता बढ़ाने के लिए पशु अधिकार समूह भी कुत्ते का मांस ना खाने की पेशकश की हैं.

दक्षिण कोरिया में, कुत्ते का मांस न तो अवैध है और न ही पूरी तरह से वैध है

दक्षिण कोरिया में, कुत्ता न तो अवैध है और न ही पूरी तरह से कानूनी है. यह एक पशुधन के रूप में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन खाद्य पदार्थों के मंत्री द्वारा खाद्य के रूप में स्वीकार नहीं किया गया. इतिहास के अनुसार, कुत्ता कोरियाई प्रायद्वीप में विशेष रूप से बेहद लोकप्रिय Dish था, खासकर Beef या Pork की तुलना में प्रोटीन का सस्ता स्रोत भी है.

16 वीं शताब्दी से रॉयल रिकॉर्ड के आधिकारिक व्यक्ति वर्णन करते है जो विशेष रूप से मांस को पसंद करते थे और उनके अनुयायी ने उसे बढ़ावा देने के लिए कुत्ते के साथ उन्हें रिश्वत दी थी. ऐसा देश जहाँ एक तिहाई लोग घरों मे कुत्ता Pet के तौर पर रखा जाता है, आम जनता के Opinion से लोग अपने पालतू कुत्ते को खाते है.

तक़रीबन 70 प्रतिशत वस्यक कुत्ता खाना पसंद नही करते है

तक़रीबन 70 प्रतिशत वस्यक कुत्ता खाना पसंद नही करते है. सर्वे के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत वस्यक भी यही कहते है. आधी आम जनता के अनुसार कुत्ते पसंद तो करते है लेकिन पालने के लिए. 2015 मे, जस्टिस पार्टी ने पहली राष्ट्रव्यापी जनगणना आयोजित की और 17,000 से जायदा कुत्ते के मांस Farms की खोज की.

सरकार को नए और सख़्त नियमों को लागू करना चाहिए और यदि वे कुत्ते के मांस को रोकना चाहते हैं तो हर किसी को इसका पालन करना चाहिए. लोगों को कुत्ते को पालतू पशु बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, या फार्म के माध्यम से आश्रय बनाने का प्रबंध करना चाहिए. Farm की स्थिति अच्छी बनाए रखी जाना चाहिए.

किसी भी प्रजाति का अस्तित्व न केवल इस बात पर निर्भर करता है की प्रजाति की संख्या कैसे बढ़ती है, बल्कि ये भी कि हम किस प्रकार से उन्हें सुरक्षित एवं जीवित रखते हैं. हर कोई जीवित रहने के लिए या तो अपने आप से लड़ रहा है या तो उनसे जिससे उसे खतरा है. कुत्ते को पालतू बनाए उनके लिए आश्रय बनाएं. ताकि आने वाली पीढ़ी पुराने परंपरा को ना अपनाए.

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