मेरा बिखरना महज़ इत्तेफाक नहीं,

वजह इस कालख की सिर्फ एक रात नहीं,

मेरी जबां तरस रही है हर्फ़ हर्फ़ के लिए,

मेरा तसव्बुर परदेश में है, और कोई बात नही.

इसके सिवा मेरी कोई ज़ात नही….

 

मुहोब्बतों ने दिए हैं कई नजराने हमें,

कुछ छीन भी लिए तो कोई बात नहीं.

कई उम्मीदें यूँ भी मुरझा गई मेरे आंगन की,

मैं सावन तो हूँ, पर मेरी कोई बरसात नहीं.

इसके सिवा मेरी कोई ज़ात नही….

 

बस्तियां ही बस गई चाहने वालों की तेरे,

तू अब भी बेघर है, तुझमे दिल नही या जस्वात नही.

मैं तेरा हूँ, मैं तेरा हूँ, बस तेरा हूँ,

इसके सिवा मेरी कोई ज़ात नही,

इसके सिवा मेरी कोई ज़ात नही….

 

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here