जानिये कैसे नीरव मोदी ने अपने जाल में फंसाई PNB (how nirav modi cheated PNB)

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हाल में जो घोटाला देश के सामने आया है उसने सारे देशवासियों को हक्का-बक्का कर दिया है. अब सब यह सोचने को मजबूर है की उनका पैसा देश के बैंक्स में कितना सुरक्षित है. ऐसा नहीं है की यह कोई पहली घटना है. इस से पहले भी इस तरह के कई वाकये देश में हो चुके है. कई भगोड़े देश की जनता का खून पसीने का पैसा ले कर भाग चुके है.  सरकार लगातार कोशिश करके भी कई भगोड़े आरोपियों को देश में वापस नहीं ला पाई है.

हाल ही में नीरव मोदी ने अपने जाल PNB को ले लिया, खैर अब यह जानने  की कोशिश करते है की कैसे नीरव मोदी ने अपने जाल में फंसाई PNB (how nirav modi cheated pnb) और कैसे ११४०० करोड़ रुपयों का चुना लगा दिया. बताया जाता है की इस फर्जीवाड़े में नीरव मोदी के अलावा और भी चार लोग मोजूद थे. जीसमे उनकी पत्नी और तीन अन्य बैंक कर्मचारी भी शामिल थे.

जानिये कैसे नीरव मोदी ने अपने जाल में फंसाई PNB (how nirav modi cheated pnb)

इन लोगो ने एल ओ यू के माध्यम से बैंक को चुना लगाया  वास्तव में एल ओ यू का फुल फॉर्म होता है “लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग.”  जब इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट कम्पनीयों को विदेशी व्यापारियों को विदेशी मुद्रा के रूप में फण्ड चुकाने की जरूरत होती है, तब उनके अधिकारी या प्रतीनीधि देश के बैंक्स के अधीकरीयो से संपर्क करते है. तब बैंक के ऐसे मामलो के अधिकृत अधिकारी फण्ड की सीमा तय करके लैटर ऑफ़ अंडरटेकिंग जारी करते है. जिसके बदले में बैंक के पास कंपनी के द्वारा एक सिक्यूरिटी राशि किसी रूप में जमा करना आवश्यक होता है. और तब यह एल ओ यू का सन्देश विदेश में स्थित बैंक की शाखा या अन्य भारतीय बैंक्स के पास SWIFT (Society for World Interbank Financial Telecommunication platform) के माध्यम से पहूंचता है.

SWIFT  क्या है?

SWIFT एक सुरक्षित वैश्विक ग्लोबल सन्देश व्यवस्था है जिसका दुनिया घर की ११००० व्यवसायीक संस्थाएं २०० से अधीक देशो में उपयोग कर रही है.  सन्देश पहुंचते ही वंहा की बैंक्स इच्छीत मुद्रा के रूप में वहां के व्यापारीयो के खाते में पैसा पहुंचा देती है. यंहा पर खेल यह हुआ की मिलीभगत करके सिक्यूरिटी राशी जमा कराये बगैर ही आंकड़े छूपा कर एल ओ यू जारी की जाती रही और एल ओ यू को सही मान कर उसके आधार पर वंहा की बैंक्स नीरव मोदी के बताये अनुसार व्यापारियों के खाते में धन पहुंचाती रही. यह रकम वास्तव में एक संक्षिप लोन होती है जिसको चुकाने की समय सीमा तीन माह होती है. परंतू इस सीमा को भी नजर अंदाज कर सीमा को कई गुना आगे तक बड़ा लिया जाता था.

तकनीकी तौर पर SWIFT लेन देन सभी संबंधीत बैंक्स के CBS (Core Banking Solution) से जुडा हुआ होता है. जिसके द्वारा सारा डाटा संबंधीत बैंक्स को स्वतः पहूंचता रहता है.  उपरोक्त विषय में ऐसा आरोप है की आरोपियों ने चालाकी पूर्वक CBS (Core Banking Solution) से छेड़छाड़ कर कर आंकड़ो को छूपा लिया था, जबकी ये भी पाया गया है की अन्य कम्पनीयों के लेनदेन Core Banking Solution से जुड़ कर लगातार काम कर रहे थे.  इसका एक मतलब यह भी है की यह छेड़छाड़ जान बूझकर की जा रही थी. अब आप जान गए होंगे की कैसे नीरव मोदी ने अपने जाल PNB को ले लिया ((how nirav modi cheated pnb))

आईये जानते है किन लोगो को साथ में लेकर नीरव मोदी ने अपने जाल में फंसाई PNB (with whom Nirav Modi cheated PNB) एक परिचय.

  • स्वयं नीरव मोदी.

नीरव मोदी वास्तव में हीरो का एक बड़ा कारोबारी है. फ़ोर्ब्स की लिस्ट में जिसका नाम भारतीय अरबपतियो की सुंची में ५७ वे स्थान पर आ चुका है. नीरव मोदी, नीरव मोदी चैन ऑफ़ डायमंड ज्वेलरी का फाउंडर और क्रिएटिव डायरेक्टर है.  नीरव मोदी फायर स्टार इंटरनेशनल का चेयरमैन भी है.  इस कंपनी की डिजाईन की गयी ज्वेलरी दुनिया भर में पसंद की जाती है.

  • गोकुलनाथ शेट्टी

गोकुलनाथ शेट्टी इस काण्ड का एक प्रमुख भागीदार है. यह बॉम्बे का रहने वाला है, और पंजाब नेशनल बैंक की फोर्ट ब्रैडी हाउस ब्रांच में २०१० में डिप्टी मेनेजर की पोस्ट पर आसीन था. यह २०१७ में रिटायर हो गया था. अपने कार्यकाल के दौरान उसने कई एल ओ यू साईन किये थे. उस समय से फर्जीवाड़े का यह खेल जारी है. उसके समय भी फर्जी लेटर्स दिखा कर पेमेंट्स लिये गयी थे. २०१८ तक २८१ करोड़ तक बात पहुँच गयी.

  • मनोज खारात

बैचलर ऑफ इंजिनियर की डिग्री पाने वाला खरात आई बी पी एस के जरिए बैंक में क्लर्क की पोस्ट पर नियुक्त हूआ. शेट्टी के कहे अनुसार वह आंकड़ो में हेर फेर करता रहा है.  उसके माता पिता का कहना है की २०००० रुपयों की तन्खवाह पाने वाला खरात बड़े अधीकारीयो के निर्देश पर ऐसा कर रहा था अन्दर की बाते उसे नहीं पता थी.

  • हेमंत

हेमंत नीरव की १६ कम्पनीयों में से एक डायरेक्टर था. यह कंपनी और बैंक के मध्य कोऑर्डिनेटर था.

  • एमी मोदी

यह नीरव की पत्नी है. खबरों के मुताबीक बैंक्स डील्स में इनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी. एमी के बोलीवूड से कनेक्शन भी बत्ताए जा रहे है. मॉडल्स के जरिए हनीट्रेप द्वारा बैंक अधीकरीयो को फंसाने के भी इन पर आरोप लगाए गए है.

निष्कर्ष

गहरे चिंतन का विषय यह है की क्यों हो पाती है ऐसी घटनाएं. क्या कानून व्यवस्थाओ में कोई कमी है.  या फिर उन लोगो में जो इनका पालन करवाने के लिये जुम्मेदार है. कानून बना देने से क्या होता है? अगर इनका पालन करने वाले और इनका पालन करवाने वाले दोनों ही अपने कर्तव्यों प्रति ईमानदार नहीं है. अगर एसा रहा तो ऐसी घटनाओ को शायद ही कभी रोका जा सके. जरूरत है की लोगो को उनकी नैतिक जुम्मेदारी का ऐहसास जगाया जाये.  देश की शैक्षणीक व्यवस्थाओं के स्तर से ही सुधार की प्रक्रिया को शुरू करना होगा, कर्त्तव्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, एवं ईमानदारी की भावना बचपन से ही लोगो के मन में विकसीत करनी होगी, शायद तभी सिस्टम सुधरे.

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