भारत में ही कई जगहों पर जैसे तमिलनाडू, कर्नाटक इत्यादि जगहों के लोगों का प्रमुख भोजन चावल ही है. यहाँ के लोगों का कहना है कि हम सप्ताह में एक दिन रोटी बनाते हैं या जैन होटल से लाते हैं, हमारे हर रोज का भोजन तो चावल ही है. अन्य स्थानों पर भी देखा जाता है कि भोजन के अंत में चावल अनिवार्य रूप से चाहिए. बिना चावल के भोजन अधूरा लगता है, पेट नहीं भरता है. अत: चावल को सबसे प्रिय भोजन माना जाता हैं.

अक्षत क्या है?

चावल को हम अक्षत भी कहते है और इस अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा न हो. अक्षत का रंग सफेद होता है. अक्षत का महत्व बहुत लाभकरी माना गया है. हर पूजन,आराधना,अर्चना इसके बिना अधूरी ही होती है. पूजन में अक्षत का उपयोग अनिवार्य है. जैन धर्म के अनुसार पूजन कर्म में चावल का काफी महत्व रहता है. भगवान को तो इसे समर्पित किया जाता है साथ ही किसी व्यक्ति को जब तिलक लगाया जाता है तब भी अक्षत का उपयोग किया जाता है.

चावल क्यों चढ़ाते हैं?

ये तो आपको पता ही होगा की हमेशा भगवान को बिल्कुल स्वच्छ और शुद्ध चीजें ही चढ़ाई जाती हैं. चूँकि चावल धान के अंदर बंद रहता है इसलिए पशु-पक्षियों द्वारा जूठा किए जाने की संभावना नहीं होती है. अक्षत बहुत श्रेष्ठ द्रव्य माना गया है. अक्षत के ऊपर का जो छिलका होता है, बिल्कुल बाहर-ही-बाहर होता है. जैन धरम के अनुसार अक्षत के अंदर जो भी है वह बिलकुल वीतराग है, नग्न है, निग्र्रन्थ है, और भेद विज्ञान का प्रतीक है. जैसे हम यदि धान बो देते हैं तो वह पुनः उग आता है परंतु अक्षत बोएं तो वह नहीं उगता. चावल अंकुरित नहीं होते, वैसे ही हमारे कर्म भी पुन: अंकुरित न हों, गेहूँ, चना आदि तो बोये जाने पर अंकुरित हो जाते हैं लेकिन चावल बोने पर अंकुरित नहीं होते.

जैन धर्म में अक्षत चढ़ाने का सिद्धान्त है अर्थात अक्षत के ऊपर से जिस तरह छिलका हटने से अक्षत यानि जन्म-मरण रहित हो गया, उसी तरह मेरी शुभ्र धवल आत्मा अक्षय हो जाये. इसी भावना से अक्षत चढ़ाते हैं. अक्षत के ऊपर जो धान का छिलका है वह घातिया कर्म का प्रतीक है एवं धान के छिलके के अंदर अक्षत में जो गुलाबी रंग की पर्त (अशुद्धि) है वह अघातिया कर्म का प्रतीक है. अर्थात मेरी आत्मा में भी इसी तरह घाति-अघाति कर्म लगे हैं.

यहाँ कहना है की हे भगवान में अक्षत के जैसे स्वच्छ धवल यानि कि अष्ट कर्मों की कालिमा से दूर होना चाहता हूँ/चाहती हूँ. जिससे मेरा मन आत्मा शुद्ध हो जाये इस भवना को रखते हुए ही अक्षत चढ़ाये जाते हैं

अक्षत की जगह क्या चढ़ा सकते हैं

अक्षत ही चढ़ाना अर्थात् कोई भी मांगलिक द्रव्य चढ़ा सकते हैं. जैसे—कोई श्रीफल, कोई बदाम, काजू आदि भी लेकर आता है। कितनी बार लोग प्रमाद करते हैं कि चावल कहाँ रखेंगे, बाजार भी जाना है। और किसी ने पूछ लिया कि क्या है ? कच्चे चावल क्यों रखते हो ? इत्यादि प्रकार से हँसी कर सकते हैं। तो आप लौंग भी ले जा सकते हैं, जो २४ घण्टे भी जेब में पड़ी रहें, तो भी परेशानी नहीं है

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