क्या आप यकिन करेंगे कि जनधन खातों में पचास प्रतिशत से अधिक खातों में भारतीय महिलाओं के नाम है. एक फाइनेंसियल कंसल्टिंग फर्म के किये गये एक सर्वे के अनुसार ना केवल उन्हौंने खाते खुलवाए बल्कि उनके माध्यम से लगातार ट्रांसेक्शन भी किये.

स्टेट ऑफ़ एजेंट नेटवर्क २०१७ की रिपोर्ट जो की मिक्रोसेव के द्वारा बुधवार को जारी कि गयी थी. मोदी सरकार का जनधन योजनाओं को प्रोत्साहित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य गरीब लोगो को उत्कृष्ट बैंकिंग सर्विस मुहैया कराना था. जिससे की सरकारी योजनाओं के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सब्सिडि, एवं सुविधाओं को आसानी से उनके खातों में सीधे ट्रांसफर किया जा सके. तथा सुनिश्चित किया जा सके कि लोन एवं क्रेडिट प्राप्त करने में गरीबो को किसी तरह की दिक्कत ना हो.

ट्रांसेक्शनस की संख्या में अत्याधिक वृद्धि के पीछे का कारण वे सुविधाये जो बैंक प्रदान कर रही है, जैसे की आधार लिंक सुविधा, बैलेंस इन्क्वायरी, इंशोरेंस रजिस्ट्रेशन, आदि. बैंक्स अपने ग्राहकों के लिये अनेको सर्विसेज एवं प्रोडक्ट उपलब्ध करा रहा है. दूर दराज के क्षेत्रो में बैंक्स अपने प्रतीनीधि या अनुबंधित फर्मो के द्वारा सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं. केश के डायरेक्ट द्रन्स्फेर्रिंग की सुविधा लोगों में प्रेरणा का मुख्य कारण बनी है.

मोबाइल यूसेज एवं आधार लिंकिंग इन स्कीम्स के मुख्य घटक रहे हैं. श्री अरविन्द सुब्रमण्यम के अनुसार यधपि इंडिया ने बहूत तरक्की कर ली है, लेकिन व्यवसायीक मोर्चे पर अभी गैप बाकी है.

तथ्य:

एक रिपोर्ट के अनुसार २८.५ करोड़ जनधन खातों का कुल डिपोज़िट ७०००० करोड़ को पार कर चुका है. जो कि नवम्बर २३ को ७२८३४.७२ पाया गया.

अक्टूबर माह में यह बैलेंस ६७३३० करोड़ था, तथ्य यह है की २०१७ की पहली तिमाही के बाद जनधन खातो की संख्या एवं उनके बैलेंस में बहुत बढोतरी हूई.

आप के पास गैस सिलेंडर है, पर आपको उसका पर्याप्त उपयोग आना चाहिये, आपके पास बैंक अकाउंट है, पर इनके संचालन में आपकी पर्याप्त भागीदारी होनी चाहीये. यह ही वे बाते है जहां हमारे बैंकिंग संस्थाओं को आगे काम करने की जरूरत है. ऐसा कहा गया.

महिलाओं की भागीदारी के प्रयासों को बढाने के उपायों पर जोर दिया गया, बताया गया की ये अभी मात्र २% है जिसे की बढाने की जरूरत है. इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बहूत सुधार आ सकता है.  और अधिक जनधन खातो के खुलवाये जाने पर जोर दिया गया.

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