जस्टिस क्लॉक होगी हर हाई कोर्ट में – भारत सरकार केंद्र सरकार सभी 24 उच्च न्यायालयों में मामलों के निपटान की दैनिक दर, लंबित मामलों की संख्या और इन अदालतों में से प्रत्येक के व्यक्तिगत रैंक को दर्शाने के लिए न्यायमूर्ति क्लॉक्स की स्थापना करेगा. पिछले वर्ष प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी विचार, न्यायिक मामलों में जन जागरूकता पैदा करने के लिए, पूरे देश में सभी अधीनस्थ अदालतों में बाद में लागू किया जाने वाला है.

इसका प्रमुख कारण अलग-अलग कोर्ट के बीच प्रतिस्पर्धा को बरकरार रखना हैं. ताकि अलग-अलग केस के निपटारे के साथ उनका रैंक इसके आधार पर बताया जा सके. इससे जितने सारे पेंडिंग केस वों तो खत्म होंगे ही होंगे साथ ही साथ ये प्रतिस्पर्धा भी बरकरार रहेंगी.

कैसा होगा घड़ी का मॉडल ?

इस ‘घड़ी’ का पहला मॉडल पहले न्याय विभाग के दिल्ली कार्यालय में स्थापित किया गया है.  पिछले साल कानून मंत्रालय के तहत किया गया. नागरिक केंद्रित सेवाओं को उजागर करने के अलावा, राजधानी के जैसलमेर हाउस में स्थापित घड़ी, जिला और अधीनस्थ अदालतों के बारे में जानकारी प्रदान करती है. इससे ये पता चलेगा कितने केस चल रहे है कितने शेष हैं.

रिपोर्ट की मानने तो अलग-अलग हाई कोर्ट में बहुत सारे केस पेंडिंग है. Allahabad हाई कोर्ट में जहाँ 2,67,713 केस पेंडिंग है वही बॉम्बे हाई कोर्ट में 1,45,425 केस पेंडिंग है. और हाई कोर्ट की बात करें तो पंजाब और Haryana की बात करें तो 1,08,808 cases pending है. भारत की पहली राजधानी रह चुकी कोलकाता की बात करें तो वहां 93,251 केसे पेंडिंग है. राजस्थान की बात करें तो 70,412 पेंडिंग केस है.

वहीं मध्य प्रदेश में 65,681 केस पेंडिंग है. वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना और आंध्र की बात करें तो वहां 51,585 केस पेंडिंग है. मद्रास हाई कोर्ट की बात करें तो यहाँ 51,044 केस पेंडिंग है. ओडिसा की बात करें तो 39,464 केस पेंडिंग है. पटना में सबसे कम 23,736 केस पेंडिंग है. कब ऐसे केस बंद होंगे. कोई समय सीमा तो तय की जानी चाहिए. आखिर अपराध की गिनती में कमी कब आएगी. शायद इन सभी सवाल का जवाब हमारे पास है भी या नहीं?. आखिर होता तो हम बता पाते.

प्रमुख बिंदु:-

  • जस्टिस क्लॉक का होगा गठन.
  • अलग-अलग हाई कोर्ट में पेंडिंग का लाखों केस.
  • पहला मॉडल दिल्ली में हुआ स्थापित.

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