कौंन देगा अंबानी को टक्कर?क्या कोई भारतीय टीवी या AC  बेचकर अंबानी टक्कर दे सकता हैं. यदि आप सोच रहे है की ऐसा नहीं हो सकता तो आप गलत सोच रहे हैं. विजय सेल्स और सरगम इलेक्ट्रॉनिक्स कन्ज्यूमर Durable रिटेल स्टोर बिज़नस में टाटा और अंबानी जैसे लोगों को टक्कर दे रहे हैं. इनका कारोबार टाटा और अंबानी जैसे बड़े खिलाडियों के आने के बाद भी बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा हैं. विजय सेल्स और कांसुमेर इलेक्ट्रॉनिक्स AC,टीवी,फ्रीज,वाशिंग मशीन जैसे प्रोडक्ट को बेचने के काम में बड़े खिलाडियों को भी पीछे छोड़ दिया हैं. आईए पता लगाते हैं क्या है वजह.

2,000 से शुरू किया था कारोबार :-

विजय सेल्स को अब परिवार की दूसरी पीढ़ी यानी नीलेश गुप्ता चला रहे हैं. कन्ज्यूमर ड्युरेबल रिटेल स्टोर का कारोबार उनके पिता यानि श्री नानू गुप्ता ने 1960 के दशक में शुरू किया था. 1960 के दशक में जब इंडिया में ज्यादा लोग टीवी के बारे में जानते नहीं थे, तब नानू गुप्ता अपना कन्ज्यूमर ड्युरेबल स्टोर खोल रहे थे.

नानू गुप्ता ऊषा इंटरनेशनल के डिस्ट्रीब्यूटर थे और वह कन्ज्यूमर ड्युरेबल के बेसिक के बारे में जानते थे. तब उन्होंने अपना सिलाई मशीन और का स्टोर खोलने का प्लान किया है। गुप्ता ने अपने परिवार से स्टोर खोलने के लिए 2,000 रुपए लिए थे. तब उन्होंने मुंबई के माहिम में साल 1967 में पहला स्टोर खोला था. उन्होंने अपने छोटे भाई के नाम पर विजय सेल्स रखा.

सीधे सौदा खरीदना रहा मुनाफे की वजह:-

वें मैन्युफैक्चर से सीधे सौदा खरीदते और सेल्स के बाद पैसा चुका दिया करते. मैन्युफैक्चर से सीधे खरीदने पर उनका डीलरशिप वाला कमीशन बच जाता था. इसके साथ-साथ वों कस्टमर को सीधे तौर पर पास करते जाते. इससे वह अपने कॉम्पिटिटर से आगे रहते थे.

धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ने लगा. नानू गुप्ता के बटे नीलेश गुप्ता अब विजय सेल्स के एमडी हैं. नीलेश गुप्ता के मुताबिक उस समय भी कड़ा कंपिटिशन होता था और कस्टमर को लाना आसान नहीं था. अब वह नए प्रोडक्ट पर ज्यादा फोकस करते हैं.

कॉम्पिटिटर से हुआ मुनाफा:-

रिलायंस रिटेल और क्रोमो जैसे रिटेल के खिलाड़ी आने के बाद से विजय सेल्स ने 2006 से तेजी से आगे बढ़े. उनका कहना था महारथियों ने उन्हें आगे बढ़ाने में काफी मदद की हैं. इनमें से कुछ विजय सेल्स को खरीदना चाहते थे. तब उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाने के बारें में सोचा. इसके साथ-साथ अलग-अलग राज्यों में इसके स्टोर्स खोले गए. विजय सेल्स अब फैमिली बिज़नस से मॉडर्न ट्रेड फॉर्मेट में बदल चुका हैं.

70 से अधिक स्टोर्स हैं विजय सेल्स के :-

Consumer दुराब्ले रिटेल सेक्टर में कई  बड़ी companies आ गई हैं. अब मार्केट में टाटा का क्रोमा, रिलायंस का रिलायंस डिजिटल जैसे बड़े खिलाड़ी हैं. गुप्ता के मुताबिक सीधे कंपनियों से स्टॉक लेने और डिस्काउंट कस्टमर को पास करने का फायदा मिला हैं. विजय सेल्स के देशभर में 70 से अधिक कन्ज्यूमर ड्युरेबल स्टोर्स हैं. उनके10 से अधिक वेयरहाउस हैं. गुप्ता ने बताया कि उनके बिजनेस में लॉजिस्टिक अहम कॉस्ट है इसलिए उनका हर एक शहर में डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर हैं.

नहीं शुरू किया औरों की तरह Business:-

विजय सेल्स का कोई भी फ्रेंचाइजी बिजनेस नहीं हैं. कन्ज्यूमर ड्युरेबल बिजनेस 3 फीसदी के मार्जिन पर चलता है जिसके कारण छोटे कारोबारियों के पास कारोबार बढ़ाने का बहुत अधिक ऑप्शन नहीं होता. गुप्ता ने कहा कि फ्रेंचाइजी बिजनेस से उनके कारोबार को कोई खास फायदा नहीं होता. आज विजय सेल्स के पास 9,000 से अधिक प्रोडक्ट रेन्ज हैं. उनका सालाना टर्नओवर 400 करोड़ रुपए हैं.

सरगम के है 45 से अधिक स्टोर्स :-

सरगम इलेक्ट्रॉनिक्स के दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, इंडिरापुरम, करनाल, पानीपत, सोनीपत, लुधियाना में कुल 45 कन्ज्यूमर ड्युरेबल प्रोडक्ट्स के शोरूम हैं. सरगम के मैनेजिंग डायरेक्टर दयानंद के मुताबिक दिल्ली के प्रीतम पुरा और राजौरी गार्डन में स्टोर् खोलना उनके कारोबार के लिेए सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था.

टाटा का है क्रोमो और रिलायंस का है रिलायंस डिजिटल:-

टाटा ग्रुप ऑफ कंपनी इनफिनिटी रिटेल का क्रोमो ब्रांड हैं. उनके देश भर कांसुमेर प्रोडक्ट में 100 से अधिक स्टोर हैं. वही मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस डिजिटल और एक्सप्रेस मिनी स्टोर नाम से देश 600 शेहरों में 2000 के करीब स्टोर हैं.

प्रमुख बिंदु:-

  •  कॉम्पिटिटर से हुआ मुनाफा.
  • 2000 से शुरू किया था कारोबार.
  • 70 से अधिक स्टोर्स हैं विजय सेल्स के.

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