जो इराक में फंसे अपने लोगों के वापस आने का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे उनपर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का सदन में दिया गया बयान कहर बनकर टूटा. इस बयान में विदेश मंत्री ने कहा कि करीब चार साल पहले इराक में लापता हुए 39 भारतीयों में सभी की मौत हो चुकी है. बयान के मुताबिक ISI के आतंकियों ने इनकी हत्या कर दी. अरब देशों में भारतीयों की मौत का यह पहला मामला नहीं है.

पहले भी आए हैं कई मामले सामने आये है

इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कई भारतीयों की या तो अरब देशों में मौत हो गई है या वे जिंदगी भर के लिए वहां की जेलों में फंसे हुए हैं. यही नहीं, कई लोग वहां पर बेहद ही कठिन परिस्थितियों और यहां तक कि शारीरिक हिंसा का भी सामना कर रहे हैं. लेकिन सवाल है कि आखिर मौत समेत तमाम जोखिमों के बारे में जानने के बाद भी ये देश भारतीयों की पसंद क्‍यों हैं.

प्रशांत बताते हैं कि लोगों के अरब देशों में जाने की सबसे बड़ी वजह पैसे की बचत होती है। उदाहरण के लिए अगर किसी  भारतीय मजदूर को अरब के देश में 3 हजार रियाल (सऊदी अरब की करंसी) हर महीने मिलते हैं तो वह अमाउंट भारत में करीब 53 हजार रुपए के करीब हो जाएगी. चूंकि अरब देशों में खाने पीने का ख़र्च भी कम है, इसलिए कोई भी आसानी से 2 हजार से ज्‍यादा रियाल बचा सकता है. यानी वह हर महीने 35 हजार रुपए से ज्‍यादा की सेविंग कर रहा है. अधिकतर लोग ग्रुप बनाकर अरब देशों में जाते हैं, इसलिए भी खर्चे कम और बचत ज्‍यादा होती है.

परिवार का साथ नहीं होना भी बचत की गारंटी होती है. इसके अलावा अधिकतर भारतीय अपने देश में किसी का नौकर बनना या मजदूरी करना शान के खिलाफ समझते हैं. वहीं अरब देशों में जाकर वह इसे खुशी – खुशी स्‍वीकार कर लेते हैं और फिर वह इन देशों में होने वाले खतरों को नजरअंदाज भी कर देते हैं. प्रशांत बताते हैं कि अरब देशों में जाने वाले अधिकतर भारतीय अनस्किल्‍ड और अशिक्षित होते हैं. ऐसे में उन्‍हें भारत के किसी भी कोने में इतने पैसे नहीं मिलते जितने कि अरब देशों में आसानी से मिल जाते हैं.

मुस्लिम मजदूरों को ज्‍यादा अहमियत

इन देशों में उन भारतीय मजदूरों को ज्‍यादा तवज्‍जो दी जाती है जो मुस्लिम होते हैं. दरअसल, मुस्लिम लोगों को इन देशों के कल्‍चर में इन्‍वॉल्‍व होने में आसानी होती है. हालांकि प्रशांत बताते हैं कि पिछले कुछ समय से अरब देशों की प्राइवेट कंपनियां अपने फायदे के लिए मुस्लिमों की बजाए हिंदुओं को ज्‍यादा तवज्‍जो दे रही हैं. ताकि उनका अधिक से अधिक दोहन हो सके. दरअसल, प्राइवेट कंपनियां चाहती हैं कि मजदूर अपना हर वक्‍त कंपनी को दें और कम से कम छुट्टिटयां लें.

क्‍या कहते हैं आंकड़े 

2017 के सितंबर में आए विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 85 लाख भारतीय अरब देशों में काम करते हैं. 2017 के पहले 7 महीनों में 2.77 लाख भारतीय रोजगार की तलाश में खाड़ी देश गए. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सबसे ज्यादा 1.10 लाख भारतीयों को रोजगार मुहैया कराया. उसके बाद सऊदी अरब (59,911), ओमान (42,095), कुवैत (40,010) और बहरीन (7,591) का नंबर आता है.

खाड़ी देशों की विस्थापितों की सूची में उत्तर प्रदेश 62,438 लोगों के साथ पहले स्थान पर है जबकि उसके ठीक पीछे बिहार (50,247), पश्चिम बंगाल (25,819) और तमिलनाडु (24,003) हैं। पिछले कुछ सालों में केरल से खाड़ी देश जानेवालों की तादाद तेजी से घटी है.

कहां से कितना पैसा आता है भारत

देश                     पैसा 

सऊदी अरब       1051 करोड़ डॉलर
यूएई               1267 करोड़ डॉलर
कुवैत               461 करोड़ डॉलर
बहरीन             125 करोड़ डॉलर
ओमान             307 करोड़ डॉलर

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