क्या दुनियाँ तानाशाही की तरफ बढ़ रही है?रूस में पुतिन 24 साल के लिए राष्ट्रपति चुने गए

रूस में हुए राष्ट्रपति चुनाव में व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर बाजी मार ली हैं. वह भारी मतों से एक बार फिर रूस के राष्‍ट्रपति निर्वाचित हुए हैं. राष्‍ट्रपति के तौर पर उनका निर्वाचन इस मायने में ऐतिहासिक हैं कि वह तत्‍कालीन सोवियत संघ के शासक जोसेफ स्‍टालिन के बाद सर्वाधिक समय तक सेवा में रहने वाले रूसी प्रशासन के शीर्ष नेता हो गए हैं.

केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, 99.8 प्रतिशत मतपत्रों की गणना के बाद उन्‍हें 76.67 फीसदी वोट मिले. इसे रूसी चुनाव में उनका अब तक का सबसे अच्‍छा प्रदर्शन माना जा रहा हैं. इस जीत के बाद वह अगले 2024 तक राष्‍ट्रपति पद पर बने रहेंगे. सारी चीजों को दरकिनार कर तानाशाही की शुरुवात हो चुकी हैं.

चीन में शी जिनपिंग अपने जीवन काल के लिए राष्ट्रपति चुने गए

वही दूसरी तरफ अगर बात करते हैं चाइना की तो रबर स्टांप मानी जाने वाली चीनी विधायिका राष्ट्रपति के लिए दो कार्यकाल की सीमा को समाप्त करते हुए आज नए संवैधानिक बदलावों को मंजूरी प्रदान किया. इसके साथ ही शी जिनपिंग के लिए आजीवन देश का नेता बने.

सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना( सीपीसी) द्वारा प्रस्तावित संविधान संशोधन को संसद से मंजूरी मिल गई हैं. पार्टी के प्रस्तावों को समर्थन करते रहने के कारण करीब तीन हजार सदस्यों वाली संसद‘‘ नेशनल पीपुल्स कांग्रेस’’ को अक्सर रबर स्टांप संसद कहा जाता है. संसद भी क्या तानाशाही से हार गया हैं ?.

क्या दुनियाँ के ताकतवर देश तानाशाही की तरफ बढ़ रहे है?

क्या दुनियाँ के ताकतवर देश अपनी लोगों की अपने देश  की देखभाल ना करते हुए तानाशाही की तरफ बढ़ रहे हैं. क्या वे ये सारी बाते भूल गये हैं उन्हें लोगों ने ही चुना हैं उनकी भलाई के लिए उनकी रक्षा के लिए, उनके देश को और भी आगे बढ़ाने के लिए. इतने प्रगतिशील देश चीन और रूस जो की मद्दा रखते हैं चाँद तक जाने का और धरती पर तानाशाही राज को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं. क्यों चुप हैं जनता हैं?. कब बोलेगी जनता हैं. क्या जनता की आवाज को दबाया जा रहा हैं?.

कैसे होते हैं चुनाव चीन में ?

चीन में राष्ट्रपति का चुनाव नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ( संसद की तरह प्रतिनिधी सभा) करती है. लेकिन प्रैक्टिकली कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का महासचिव ही प्रेसीडेंट बनता है. प्रेसीडेंट के पास एक्जीक्यूटिव में सबसे ज्यादा ताकत होती है. लेकिन लोकल बॉडी में वहां जनता सीधे तौर पर चुनाव करती है. लोकल बॉडी, डिस्ट्रिकट बॉडी को, डिस्ट्रिकट बॉडी, स्टेट बॉडी को चुनती है.

इस तरह लोकल बॉडी को छोड़ बाकी सारे चुनाव लोअर बॉडीज द्वारा होते हैं. चीन में सिंगल पार्टी रूल है. मतलब वहां केवल कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ही सरकार बनाती है. तो पार्टी के ही पदाधिकारी सरकार में बने रहते हैं. पार्टी महासचिव के लिए कम्यूनिस्ट पार्टी प्रेसीडेंट पोस्ट रिजर्व रखती है.

कैसे होते हैं चुनाव रूस में?

वही रूस की बात करे तो प्रेसीडेंट को टू राउंड सिस्टम से चुना जाता है. प्रेसीडेंट पहले 4 साल के लिए चुना जाता था लेकिन 2012 में एक संशोधन कर प्रेसीडेंट के कार्यकाल को 6 साल कर दिया गया. लेकिन वहां लगातार 2 टर्म से ज्यादा बार एक ही आदमी प्रेसीडेंट नहीं चुना जा सकता है.मतलब कोई अगर 2012 में चुनाव जीता तो वो 2018 में भी जीतकर प्रेसीडेंट बन सकता है. लेकिन 2024 में उसे लड़ने की अनुमति नहीं होगी. चुनाव लड़ने के लिए उसे फिर 2030 का इंतजार करना होगा.

अपने तरीके से किए गए संसोधन जिसने किसी को जीवन कल तक राष्ट्रपति बनाया

चीन की सत्‍तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति पद पर लगातार दो कार्यकाल की समयसीमा के संवैधानिक प्रावधान को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया हैं जिसे मंजूरी दे दी गई. जिससे जिनपिंग इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर साल 2023 के बाद भी राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे. इस प्रस्ताव ने ये भी मंजूरी दे दी की तानाशाही पूरे जीवनकाल तक चीन में स्थापित हो चुकी हैं.

अपने तरीके से किए गए संसोधन जिसने किसी को 2024 तक राष्ट्रपति बनाया

रूस के संविधान के मुताबिक, कोई भी शख्स दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता. इसलिए 2008 में पुतिन राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ सके. ऐसे में पुतिन प्रधानमंत्री पद के लिए खड़े हुए और जीत हासिल की. प्रधानमंत्री रहते पुतिन ने दोबारा राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई. फिर रूस के संविधान में संशोधन किया गया. मतलब दो बार राष्ट्रपति बनने की लिमिट खत्म हो गई. साथ ही राष्ट्रपति के कार्यकाल को भी 4 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया. पुतिन ने 2012 में तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव में भाग लिया और जीत भी गए.

माना जा रहा है कि पुतिन के कट्टर विरोधी एलेक्सी नावल्नी के चुनाव नहीं लड़ने की वजह से ये चुनाव पुतिन के लिए आसान रहा. एलेक्सी नावल्नी पर धोखाधड़ी की वजह से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ हैं.

प्रमुख बिंदु:-

  • क्या महान देश तानाशाही की तरफ बढ़ रहे हैं?.
  • कैसे होते हैं चुनाव चीन और रूस में ?.
  • रूस के राष्ट्रपति अगले 2024 तक चुने गए.
  • चीन के राष्ट्रपति जीवनकाल तक चुने गए राष्ट्रपति.

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