क्या होती है गुरुकुल की परम्परा?

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क्या होती है गुरुकुल परम्परा?
क्या होती है गुरुकुल परम्परा?

आज के भारत को जरूरत है गुरुकुल परंपरा की जिसको वापिस से जीवित किया जाना चाहिए. यह बात बच्चों के माँ बाप को समझना बहुत जरुरी है की अगर बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ अगर संभव हो तो ऐसी कोशिश की जानी चाहिए कि बच्चों को बोर्डिंग में ही रखा जाए. प्राचीनकाल में गुरुकुल परम्परा बहुत ही अच्छी थी और बहुत ही उचित प्रणाली थी. अक्सर देखा यह गया है कि घरों का वातावरण उतना अच्छा नहीं होता और प्रत्येक परिवार में उतनी सांस्कृतिक व्यवस्था नहीं होती. घर में अनेक लोग रहते हैं और अनेक तरह के लोग रहते हैं, उनको अपने साथ मिला करके ही चलना पड़ता है.

किसी भी देश का विकास और उन्नति तब ही हो सकती हैं जब शिक्षा व्यवस्था सही हो. आज इस गुरु कुल पद्धति का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है. हमारे भारत में कुछ ऐसा ही हुआ विश्वगुरु आर्यावर्त की प्राचीन गुरुकुल की शिक्षा पद्दति का, भारत मे प्राचीन काल से गुरुकुल शिक्षा पद्दति से ही शिक्षा दी जाती थी, जब तक भारत मे गुरुकुल व्यवस्था थी तब तक भारत विश्व गुरु कहा जाता था.

भारत में अंग्रेजो, मुगलों के आने से ये शिक्षा व्यवस्था लगभग ख़तम सी हो गई और भारत इस दौर में पिछडता ही चला गया. जहाँ कुछ लोगो को ये भी लगता है कि गुरुकुल में सिर्फ संस्कृत पढ़ाई जाती है, ऐसा नही है, भारत मे 7 लाख 32 हजार गुरुकुल और विज्ञान की 20 से अधिक गुरुकुल की शाखाएँ थीं.

आधुनिक शिक्षा प्रणाली

आधुनिक शिक्षा प्रणाली समय के साथ विकसित हुई है और पश्चिमी प्रणाली से प्रभावित हुई है. यह प्रौद्योगिकी में बदलाव और प्रगति से प्रभावित हुआ है. शिक्षा प्रणाली में ईबुक, वीडियो व्याख्यान, वीडियो चैट के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा, 3-डी इमेजरी के माध्यम से प्रदर्शन आदि शामिल हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि सिस्टम तकनीकी विकास को शामिल करने के लिए विकसित हुआ है. इन छात्रों ने विज़ुअल एड्स के माध्यम से बेहतर ज्ञान को समझने में मदद की है जो प्रतिधारण बढ़ाने में मदद करते हैं. उन्नत अनुसंधान और विकास के अनुसार शिक्षण विधियों को लगातार अपग्रेड किया जाता आया है.

गुरुकुल शिक्षा प्रणाली

प्राचीन भारत में, गुरुकुल  के माध्यम से ही शिक्षा प्रदान की जाती  थी. यह गुरु-शिष्य परम्परा के रूप में भी जाना जाता था. शिक्षा के इस रूप के उद्देश्य थे:

  1.  विवेकाधिकार
  2.  चरित्र में सुधार
  3.  मित्रता या सामाजिक दिमागीपन का उत्पादन
  4.  मौलिक व्यक्तित्व विकास
  5.  पुण्य का प्रसार

गुरुकुल की परम्परा

आज से कई साल पहले तक गुरु कुल में आचार्य/आचार्या ही शिक्षा देते थे. आठ वर्ष की उम्र के बाद ही बच्चे को गुरुकुल में प्रवेश मिलता था तथा पच्चीस वर्ष की आयु तक लोग ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए शिक्षा लेते थे. धर्मशास्त्र के पढाई से लेकर  अस्त्र शिक्षा भी यहाँ सिखाई जाती थी. योग साधना और भगवान् के लिए यज्ञ गुरु कुल का एक अभिन्न अंग माना जाता है. शिक्षा के अध्ययन के बाद ही विद्यार्थी अपना काम  चुनते थे. हर विद्यार्थी हर प्रकार के कार्य को सीखता है. ब्राह्मण वैश्य,क्षत्रिय ओर सेवक जिसकी रुचि के आधार पर और गुण के आधार पर अपना काम गुरुकुल शिक्षा पूरी करने के पश्चात् सीखता है.

लड़के और लड़कियों के गुरुकुल भी अलग अलग होते थे, जिस प्रकार लड़के शिक्षा लेते थे उसी तरह हर प्रकार की शिक्षा लड़कियों को भी दी जाती थी, शास्त्र –अस्र की शिक्षा तथा वेदों का ज्ञान दिया जाता था.

गुरुकुल की शिक्षा बिल्कुल मुफ्त होती थी, ये समाज के लोगो के द्वारा चलाई जाती थी तथा राजा इसमे दान दिया करते थे, गुरुकुल में हर वर्ण के छात्र पढ़ते थे चाहे वे क्षत्रिय हो या शूद्र परिवार से, किसी प्रकार का भेदभाव नही था. जितना पढने का अधिकार ब्राह्मणों को था पढ़ने का उतना ही शुद्र को भी था.

सभी को समान सुविधाएं प्राप्त थी. मनुस्मृति में मनु महाराज ने कहा है कि हर कोई अपने लड़के लड़की को गुरुकुल में भेजे, किसी को शिक्षा से वंचित न रखें तथा उन्हें घर मे न रखें. इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था जिस देश की हो वह कैसे पीछे रह सकता है जहाँ संस्कार, संस्कृति और शिष्टाचार और सभ्यता सिखाई जाए.

गुरुकुल में दी जाने वाली शिक्षायें

  • खगोल शास्त्र की शिक्षा
  • नक्षत्र शास्त्र की शिक्षा
  • बर्फ बनाने का विज्ञान की शिक्षा
  • रसायन विज्ञान की शिक्षा
  • स्थापत्य शास्त्र की शिक्षा
  • वनस्पति शास्त्र की शिक्षा
  • नोका शास्त्र की शिक्षा
  • यंत्र विज्ञान शास्त्र की शिक्षा
  • भौतिक शास्त्र की शिक्षा
  • आयुर्वेद की शिक्षा
  • जीव विज्ञान की शिक्षा
  • अन्य कई प्रकार की युद्ध की कला भी सिखाई जाती थीं और उनकी भी बहुत अच्छे से शिक्षा दी जाती थी.

इस प्रकार गुरुकुल की शिक्षा व्यवस्था जैसी जो सभी को दी जाती थी, जिसकी आज इस देश को आवश्यकता है. जिसकी वजह हमारा देश आज पिछड़ा हुआ है. आज भी अगर पुरानी पद्धति जैसे शिक्षा दी जाये तो भारत फिर से उसी मुकाम पर पहुँच जायेगा जहाँ उसे जाना जाता था.

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