लकवा जिसे पैरालिसिस (paralysis) भी कहते है एक बेहद गंभीर बीमारी है. पैरालिसिस (paralysis) का अटैक कुछ पल के अन्दर ही इंसान के जीवन को बद से बदतर बना देता है. बहुत बार केवल नादानी के कारण ही सही समय पर लोग उपचार लेने से चुक जाते है. और जीवन भर बीमारी के अभिशाप को ढोने को मजबूर हो जाते है. पैरालिसिस (paralysis) की बीमारी मस्तिष्क को रक्त पहूँचाने वाली किसी नस में रूकावट आ जाने की वजह से होता है.

शुक्र है की आज मेडिकल साइंस के पास ऐसा ईलाज मोजूद है की सही समय पर मरीज को डॉक्टर के पास ले जाया जाये तो इसे ठीक किया जा सकता है शर्त केवल यही है की जल्द से जल्द पेशेंट को अस्पताल ले जाया जाये जहाँ इसकी चिकित्सा की सुविधा हो. जब की होता यह है की लोग जानकारी के आभाव में समय पर मरीज को अस्पताल नहीं ले जा पाते है.

कई तो जल्दी कदम उठाना जरुरी नहीं समझते है और कई टोने टोटके में ईलाज ढूंढने लगते है और समय चुक जाते है. बताया जाता है की पैरालिसिस के पेशेंट को १ से १-१/२  घंटे के भीतर यदि अस्पताल तक पहुंचा दिया जाये तो कई बार बहूत आसानी से इसका इलाज संभव है, अन्यथा केवल लक्षणों में राहत पहूँचाने या पेशेंट को आत्मनिर्भर बनाने वाला उपचार ही बाकी रहता है. अभी तक मेडिकल साइंस के पास ऐसी कोई दवाई नहीं है जो पेशेंट को पुरी तरह से ठीक कर दे. बीमारी होने के बाद केवल लाक्षणिक चिकित्सा ही हाथ में रह जाती है.

आज हम चर्चा करने जा रहे है कि पैरालिसिस (paralysis) का अटैक हमारे आस पास यदि किसी व्यक्ति को आ जाता है तो हमें तुरंत क्या कदम उठाने चाहिये.

पैरालिसिस (paralysis) क्या होता है ?

हम जानते है हमारा मस्तिष्क हमारे पुरे शरीर का नियंत्रण करता है. मस्तिष्क के अलग अलग भाग शारीर के अलग अलग हिस्से को नियंत्रित करते है. मस्तिष्क का दायाँ भाग बाये भाग के अंगो को नियंत्रित करता है और बायाँ भाग दायें भाग के अंगो को. और इनमे भी कई भाग और उपभाग होते है जो अलग अलग अन्य छोटे बड़े अंगो को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होते है. और मस्तिष्क के जिस हिस्से में रक्त प्रवाह अनियमित हो जाता है मस्तिष्क से सम्बंधित शरीर का वह हिस्सा लकवे का शिकार हो जाता है.

क्या करे जब किसी करीबी को  पैरालिसिस (paralysis) का अटैक आ जाये

  • सब से पहले मरीज को तुरंत किसी बड़े अस्पताल में ले जाने का प्रबंध करे जंहा पर पैरालिसिस (paralysis) के इलाज की सुविधा हो. याद रहे किसी कुशल चिकित्सक की देखरेख में ही ये ट्रीटमेंट लिया जाये. ये ध्यान में रहे कि मरीज को अस्पताल ले जाने में जितनी देरी होगी मरीज के ठीक होने की सम्भावना उतनी ही कम होती जायेगी. अत: मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाये.
  • एलोपथिक उपचार करने के बाद भी मरीज को आपेक्षित फायदा न हो तो आप बाद में कभी भी किसी भी अन्य वैकल्पिक चिकत्सा पद्धति जैसे की आयुर्वेदिक. होम्योपेथिक, यूनानी एवं होलिस्टिक चिकित्सा आदि से सम्बंधित चिकित्सा विशेषज्ञों की देख रेख में उपचार ले सकते है. आयुर्वेदिक उपचार भी इस बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करने में बेहद कारगर पाया गया है.

पैरालिसिस (paralysis) के लक्षणों को कैसे पहचाने

  • चेहरा एक साइड से लटका हुआ दिखाई देना. चेहरा एक साइड से सुन्न हो जाना. मरीज के  मुस्कुराने की कोशिश करने पर चेहरा असामान्य एवं टेडा दिखाई देना.
  • शरीर के एक भाग में अत्याधिक कमज़ोरी या निष्क्रियता: आ जाना.  यदि आप मरीज से हाथ या पैर उठाने का कहते है और वह हाथ एवं पैर नहीं उठा पाता  है या दिक्कत महसूस करता है तो ये पैरालिसिस (paralysis) से जुडा लक्षण हो सकता है.
  • बोलने में दिक्कत अगर मरीज की बोली में खरखराट की आवाज आने लगे, ठीक से शब्द नहीं निकल पा रहे हो तो ये भी पैरालिसिस (paralysis) का लक्षण हो सकता है.

अगर इनमे से कूछ या ये सभी लक्षण किसे मरीज में दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल ले जाने का प्रबंध करे.

पैरालिसिस (paralysis) से बचाव एवं सावधानिया:

  • कोलेस्ट्रॉल:- कोलेस्ट्रॉल का अनियमित होना ह्रदय रोगों एवं पैरालिसिस (paralysis) की एक प्रमुख वजह होता है. अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच समय समय पर कराते रहे एवं अगर लेवल ज्यादा हो तो चिकित्सक से उचित परामर्श लेवे.
  • ब्लडप्रेशर:- पैरालिसिस (paralysis) की एक प्रमुख वजहो में से एक है. अगर आपको ब्लड प्रेशर की बीमारी है तो अपने ब्लड प्रेशर पर पैनी नजर रखे, दवाइयाँ समय पर लेकर ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण रखे.
  • डायबिटीज:- अन्य कारणों के साथ डायबिटीज भी पैरालिसिस (paralysis) का कारण बन सकती है अत: अपने शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रित रखे.

अन्य सावधानियां:

  • यदि हर कभी आप के शरीर का कोई हिस्सा सुन्न हो जाता है तो लापरवाही न करे तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेवे.
  • यदि चलते चलते कभी मूर्छा आ जाये भले ही आप थोड़ी देर में खुद को ठीक महसूस करने लगे तो भी ये इस बीमारी का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है. अत: चिकित्सक का परामर्श जरूर लेवे.
  • अगर आप का इनमे से किसी भी कारण से ईलाज चल रहा है तो कभी भी ईलाज को बीच में न छोड़े ये खतरनाक हो सकता है.

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