आप यह समझने की भुल कभी न करे की किसी देवी मंदिर को सुप्रीम कोर्ट की मान्यता न मिल सकती है. यह संभव है. हम ये दावा इसलिये कर रहे है क्यों कि एक ऐसी घटना इस दरबार में हुई थी जब सुप्रीम कोर्ट के एक जज को माँ के दरबार में सर झुकाने आना पडा था, न्याय की इस देवी के दरबार में.  यह वाकया कब हुआ था ये हम आगे आपको बताएँगे. पहले हम जान ले की चमत्कारों के लिए विख्यात यह मंदिर कहाँ पर स्थित है. हम बता दें कि यह पावन मंदिर पिथौरागढ जनपद के पाखू नामक इलाके में स्थित है.

जब न्याय की कही से भी उम्मीद नहीं रह जाती है तब यही वह दरवाजा है जो न्याय की आस बंधाता है.  माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) का न्याय सुप्रीम कोर्ट के न्याय की तरह ही है की जब उसका फैसला होता है तो वो पत्थर की लकीर की तरह होता है जिसे कोई पलट नहीं सकता है. माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) के ऐसे सेकड़ो चमत्कार है जो यह मानने के लिए मजबूर करते है की माँ का न्याय ही सर्वोपरि होता है.

और जो शरण में आ जाता है उसे संसार की कोई भी ताकत न्याय पाने से वंचित नहीं कर सकती है. ऐसा मनुष्यों के ही नहीं देवताओ के साथ भी होता है. जब किन्ही परिस्थितियों में जब देवी देवता भी दुविधा में होते है तो उन्हें भी माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) की शरण में आना ही पड़ता है. और माँ उनका न्याय करती है.

कहाँ स्थित है यह मंदिर

हिमालय की पवित्र भूमि पर पिथौरागढ जनपद के पाखू नाम के क्षेत्र में माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) का यह मंदिर स्थित है. ये मंदिर अनौखी सौगात है उनके भक्तो के लिए. यहाँ आने वाले भक्तो की हर मनोकामनाये इस दरबार से पूर्ण होती है. जो लोग साक्षात् मंदिर में नहीं आ पाते है वे पत्रों के माध्यम से भी अपनी प्रार्थना माता तक पहुंचाते है.  इसके बाद जब मन्नत पुरी हो जाती है तो अटूट भक्ति भाव से यहाँ सर झुकाने आते है.

क्यों आना पड़ा था जज को माता के दरबार में हाजरी देने?

बताते है की आजादी के पहले अंग्रेजो के शासन काल में एक जज को माँ के दरबार में एक कठिन यात्रा पूरी कर के हाजरी देने आना पडा था. बताया जाता है की क्षेत्र के एक निर्दोष व्यक्ति को जब अदालतों से न्याय नही मिल सका तो बेहद आहात होकर वह व्यक्ति भगवती कोटगाडी माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) के दरबार में न्याय की आस लिए आया.

माँ का यह चमत्कार ही कहना पड़ेगा की माँ की शरण लेने के बाद सम्बंधित जज को अपना फैसला लेकर माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) के दरबार में हाजरी लगानी पडी थी एवं सब के सामने माँ की शरण में आकर जज ने उस व्यक्ति के निर्दोष होने का फैसला सुनाया. माँ भगवती कोटगाडी कोकिला देवी के चमत्कारों के ऐसे अनेको किस्से यहाँ कहे एवं सुनाये जाते है. हिमालय के शक्ति पीठों में कोकिला माता का सिद्ध स्थान सब में अनोखा है. कोटगाडी कोकिला देवी के भक्त उन्हें कोटवी, विश्वेश्वरी, सुगन्धा, चन्दि्रका, चण्डिका, परमेश्वरी, सरस्वती वन्दनीया, देवमाता, अभया प्रचण्डा, , प्रभा, एवं नागमाता, आदि नामों से पुकारते है.

कालिया नाग का प्राचीन मंदिर

कालिया नाग का एक प्राचीन मंदिर भी यहाँ पर लोगो की श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है यह मंदिर कोटगाडी से कुछ ही दूरी पर एक पर्वत शिखर पर स्थित है. स्थानीय लोग इस ’’काली नाग को ‘डान’ कहते है. इस मंदिर का चमत्कार यह है की कभी भी गरुड़ इस मंदिर के ऊपर से पार नहीं जा सकते है. कालिया नाग मंदिर का दर्शन स्त्रियों के लिए अशुभ समझा जाता है.

ग्वाले ने क्यों शस्त्र से हमला कर दिया था?

किवदंतियों के अनुसार एक ग्वाले की गाय इस स्थल पर आकर अपना दूध स्वयं दुहाकर चली जाती थी. ग्वाले का परिवार अचम्भे में था, कि आखिर गाय का दूध आखिर जा कहाँ रहा है. जब ग्वाले की पत्नी ने चुपचाप से जा कर गाय का पीछा किया तब वह यह देख कर स्तब्ध रह गयी की गाय स्वयं उस मंदिर पर दूध दुहा रही है. इस पर गुस्से में आकर ग्वाले ने मंदिर पर शास्त्र से हमला कर दिया था.  जिसका निशान आज भी इस मंदिर पर देखा जा सकता है.  माँ कोकिला देवी (Ma Kokila Devi) के मंदिर के पास ही एक जल कुण्ड स्थित है जिसके बारे में लोगो की मान्यता है, कि ब्रहम मुहर्त में माता इस जल से स्नान करती है. कई श्रद्धालुओं का वहां पर शेर के दर्शन होने का भी दावा है.

एक कहानी यह भी बताई जाती है की इनके भक्त चन्द्रवंशीय राजा माँ की प्रतिमा को नेपाल लेकर जा रहे थे लेकिन माँ को यही स्थान पसंद आ गया और उन्होने सपना देकर खुद को यही स्थापित किये जाने की इच्छा जाहिर की थी. तब से माता यहाँ पर ही विराजमान है.

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