कहते है वृन्दावन स्थित निधिवन (Nidhivan) आज भी कृष्ण एवं गोपियों की रासलीला का साक्षी बनता है.  यही वह कारण है की निधिवन (Nidhivan) के दरवाजे शाम होते ही बंद कर दिये जाते है. बताते है की मनुष्य तो दूर की बात पशु पक्षी भी जो दिन भर वहां निवास करते है, शाम होते होते रात को वंहा से चले जाते है. निधिवन (Nidhivan) में एक रंग महल है, कहते है की श्री कृष्ण और राधा रोज रात यंहा प्रकट होते है और सदियों पुराना कृष्ण और गोपियों का रासलीला का अध्यात्मिक द्रश्य यंहा सजीव हो उठता है. लेकिन सामान्य लोग अपनी सांसारिक नजरो से इस रासलिला को ना तो देख पाते है, और ना ही उन्हें ऐसा करने की अनुमती है. इसीलिए शाम होते ही सेकड़ो की संख्या में यहाँ आने वाले भक्तगण रात होने से पहले ही यह स्थान छोड़ देते है.

कैसे पता चलता है कि राधा कृष्ण यहाँ प्रकट होते है?

बताते है की निधिवन में एक रंगमहल है जिसमे एक चन्दन का पलंग रखा गया है जिसे संध्या होने से पहले ही भक्तगण अपने भगवान के लिए सजा देते है. साथ में बगल में उनके लिए पीने के लिए ठंडा पानी और राधा के श्रंगार का पूरा सामान रख दिया जाता है. इसके अलावा दातुन और पान भी भगवांन के लिए भक्त रख के जाते है. लेकिन जब सुबह रंगमहल का पट खोला जाता है, तो पूरा शयन कक्ष अस्तव्यस्त नजर आता है, लोटे में पीने के लिए भरा गया पानी खाली जो जाता है. ऐसे कई लोग है जिन्होंने कृष्ण की बांसुरी की धुन एवं घुंघरू के बजने की आवाज भी रात में सुनी है.

क्या होता है जब कोई रात को निधिवन (Nidhivan) में जाने की कोशिश करता है?

बताते है की जिस भी व्यक्ति ने रात में निधिवन (Nidhivan) में जाने या रुकने की कोशिश की वो पागल हो गया या फिर मर गया. एक बार एक व्यक्ति ने झाड़ियो में वहां छुप कर रासलीला देखने की कोशिश की पर जब सुबह उसे वहां लोगो ने देखा तो वो बेहोश पडा मिला. वह पागल हो चुका था. ऐसे कई वाकये हो चुके है. इसलिए अब शाम होते ही निधिवन (Nidhivan) पुरी तरह से खाली करा कर दरवाजे बंद कर दिये जाते है. किसी को उधर फटकने भी नहीं दिया जाता है.

ऐसा बताते है कि तुलसी के पौधे ही रात्रि को श्री कृष्ण और गोपियों में परिवर्तित हो जाते है. बताया जाता है की यहाँ के सारे तूलसी के पौधे जोड़े में है और ये पौधे ही रात्रि को कृष्ण और गोपियों में परिवर्तीत हो जाते है. और सुबह होते ही अपने असली रूप में आ जाते है.

और क्या ख़ास बाते है निधिवन (Nidhivan) की

बताया जाता है कि निधिवन (Nidhivan) के अन्दर एक रंग महल है जिसको कृष्ण एवं राधा के लिए सजाया जाता है. जहां पीने का पानी, पान एवं राधा के लिए श्रंगार की सामग्री रखी जाती है.  सुबह पट खोलने पर पता चलता है की पानी का लोटा खाली हो गया है, पान भी खाया हुआ लगता है, और श्रंगार का सामन भी ईधर ऊधर बिखरा पडा हुआ मिलता है. एक और ख़ास बात यहाँ की यह है कि निधिवन (Nidhivan) के आसपास जितने भी मकान है उनमें या तो खिड़कियाँ नहीं है या कोई भी खिड़की निधिवन (Nidhivan) की तरफ नहीं खुलती है.

बता दें की यहाँ पर बंशीचोर राधे रानी का भी एक मंदिर बना हुआ है. इसके आलावा बांके बिहारी का प्राकट्य स्थल भी यहाँ पर मंदिर के रूप में मौजुद है. इसके अलावा यहाँ पर पास में ही संगीत के महाविद्वान श्री हरिदास महाराज की समाधि भी है.

यह शायद आस्था और भक्ति ही वो कारण है जो आज इस कलयुग में भी भगवान को प्रकट होने को मजबूर कर देता है.

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