क्यों चीन मोदी के एपी के दौरे का विरोध कर रहा है?जैंसा की हम सब जानते हैं की 16 फरवरी को चीन की सबसे बड़ी छुट्टी का एक दिन होता है. चंद्र नव वर्ष के पहले दिन, प्रधान मंत्री Narendra Modi की अरुणाचल प्रदेश या “दक्षिण तिब्बत” की यात्रा की घोषणा हुई. जिसके खिलाफ Beijing ने अपने सर में दर्द बताना शुरू कर दिया हैं. चीनी मंत्रियों ने नए साल की पूर्व संध्या पर परिवार के साथ पारंपरिक खाने के लिए बैठने के बजाय, चीनी राजनयिकों के एक समूह ने इस यात्रा पर एक कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. “चीनी सरकार ने तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी और भारतीय नेता के विवादित क्षेत्र की यात्रा को कभी स्वीकार भी नहीं किया. ये तो भारत के सीमा के अंदर आता हैं? फिर इसे विवादित कैसे कह सकते हैं?

Chinese year of Earth Dog की शुरुआत हो चुकी हैं लेकिन लग ऐसा लग रहा हैं जैसे चीन-भारतीय संबंधों के लिए खट्टे रिश्तों की शुरुआत हुईं हैं ; सिक्किम के निकट दोकलम (चीन में डोंगलेंग) सैन्य गतिरोध के कम होने के बाद, कुछ भी नहीं हुआ , जो जून में शुरू हुआ और अगस्त में जाकर समाप्त हो गया.खट्टे संबंध क्या एक तरफ़ा होते हैं?. आखिर चीन भी अपनी हदों से मान नहीं रहा हैं.चीन हों जाओ सावधान.

क्यों चीन मोदी के एपी के दौरे का विरोध कर रहा है?

इसके आठ दिन बाद 23 फरवरी को विदेश सचिव विजय गोखले ने बीजिंग में एक ऐसी यात्रा की जो किसी को ज्ञात नहीं, जनवरी में विदेश सचिव के रूप में पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद इस यात्रा का निर्णय लिया गया था.गोखले ने vice-foreign minister Kong Xuanyou, विदेश मंत्री  Wang Yi और  राज्य के  councillor Yang Jiech से बातचीत की थी.

जैसा कि रिपोर्ट से यह पता चला हैं, गोखले ने चीनी पक्ष को आश्वस्त करने की संभावना की. मोदी सरकार ने सरकार के अधिकारियों को दलाई लामा के निर्वासन में 60 साल के लिए तिब्बती सरकार द्वारा आयोजित घटनाओं से बचने के निर्देश दिए गये.आखिर गोखले का ऐसे समय पर दौरा जब चीन और भारत के संबंधो में ऐसी खटास हैं कारण क्या हों सकता हैं?.

Dalai Lama “अलगाववादी” और “विभाजनकारी” हैं?

Dalai Lama चीन के सभी समूहों के “अलगाववादी” और “विभाजनकारी” के इक्षुक ज्ञाता हैं. अप्रैल में उनकी AP की यात्रा हुई, कि कई लोग कहते हैं, वर्ष 2017 में चीन-भारतीय संबंधों के लिए आंशिक रूप से अंधेरा स्वर तय हुआ.बाद में दोनों पक्षों द्वारा जारी बयान अपेक्षाकृत थे, ” नागरिक के प्रति अंतर को संबोधित करने और एक दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशील होने” के बारे में बात कर रहे थे.दलाई लामा अपनी आदतों से सुधर क्यों नहीं रहें?.

इसी समय, पेरिस में, चीन ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) वॉच लिस्ट पर पाकिस्तान को स्थानांतरित करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली चाल के विरोध में अपना विरोध हटा लिया.

यह सितंबर में China में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंत में जारी किए गए घोषणापत्र का एक अनुस्मारक था, जब समूह ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को वैश्विक आतंकवादी संगठनों इस्लामी राज्य और अल-कायदा के साथ बंधक कर दिया था.चाइना कब जाकर पाकिंस्तान का मदद करना बंद करेगी?.

इसलिए, दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और पड़ोसियों के बीच कूटनीति का स्तरित खेल जारी है: भारत और चीन में राजनेता के साथ दशकों से पुराना सामरिक अविश्वास; विवादित सीमा संतुलन सभी परेशानियों का अचिह्नित जड़ क्षेत्रीय और वैश्विक दायित्वों के साथ द्विपक्षीय आर्थिक क्षमता और शेष घरेलू राजनीतिक मजबूरी के वादे के साथ.

प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:-

  • माननीय प्रधानमंत्री का AP का दौरा
  • चीन का विरोध करना
  • विजय गोखले की बीजिंग की यात्रा
  • दलाई लामा की “अलगाववादी” और “विभाजनकारी” निति

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