क्यों चीन तीसरे विश्व युद्ध को भड़का रहा हैं?चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोबारा पद संभालने के बाद मंगलवार को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में पहला भाषण दिया. इसमें जिनपिंग ने देश की स्वायत्ता को चुनौती देने वाली ताकतों पर कड़े तेवर अपनाने की बात कही. उनके भाषण से ऐसा लग रहा था मानो पूरी दुनियाँ के प्रति चीन अपना रवेया शख्त रखने वाला हैं.

उन्होंने कहा कि चीन दुनिया में अपनी सही जगह पाने के लिए खूनी लड़ाई लड़ने को भी तैयार हैं. बता दें कि चीन की संसद ने जिनपिंग को जीवनभर देश की सत्ता संभालने के अधिकार दिए हैं. माना जा रहा है कि इस ताकत के साथ जिनपिंग अपने राज में देश को सैन्य और आर्थिक रूप से सबसे ताकतवर बनाना चाहते हैं.

चीन नहीं देगा किसी को एक इंच जमीन:-

अपने 30 मिनट के भाषण में जिनपिंग ने कहा चीन के लोग और पूरे राष्ट्र की यही धारणा है कि कोई भी हमसे हमारी एक इंच जमीन नहीं छीन सकता.”  उन्होंने आगे कहा “हमें अपनी स्वयत्ता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करनी चाहिए, ताकि हम पूरे चीन को हमेशा एक-साथ रख सकें। यही देश के मूलभूत ढांचे का आधार हैं.”

जानकारी की माने तो बता चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा हैं. माना जा रहा है कि इस बयान से जिनपिंग ने ताइवान को अपना हिस्सा बताया हैं. क्या जिनपिंग की आगे की सोच ऐसी रहने वाली हैं?. क्या भारत इसका मुकाबला कर पाएगा.

अलगावादियों को दी जाएगी सजा:-

अलगावादी ताकतों को चेतवानी देते हुए जिनपिंग ने कहा की चीन के इतिहास को देखते हुए ये साफ़ हैं की जो भी ताकत देश के खिलाफ काम करती है उनका अंत निश्चित हैं. चीन के खिलाफ काम करने वाले लोगों को सबसे कठोर सजा दे जाएगी. जानकारी की माने तो चीन ताइवान के इलावा दलाई लामा को भी अलगावादी मानता हैं. हाल ही में चीन ने शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों के अलगाववादी संगठन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूमेंट के खिलाफ भी लगातार ऑपरेशन चलाए हैं.

जिनपिंग ने कहा चीन किसी के लिए खतरा नहीं:-

अमेरिका और भारत पर निशाना साधते हुए जिनपिंग ने कहा,“चीन किसी भी दुसरे देशों पर राष्ट्रवादी निति नहीं अपनाएगा. सिर्फ वही लोग दूसरों को खतरे की तरह देखते हैं जो खुद औरों के लिए खतरा हैं. उन्होंने आगे कहा “दूसरे देशों और वहां के लोगों की भलाई के लिए उठाए गए चीनी नागरिकों के कदमों को गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि आखिर में जीत सच्चाई की ही होती हैं.”

जिनपिंग को मिली अनगिनत ताकत :-

इस साल बैठक में चीन की संसद ने संविधान से उस नियम को हटा दिया जिसके तहत कोई भी शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति रह सकता हैं. यानी जिनपिंग अब जब तक चाहें तब तक देश के राष्ट्रपति रह सकते हैं.संसद में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के 2964 सदस्यों में से सिर्फ दो ने राष्ट्रपति बनने की सीमा बढ़ाए जाने के खिलाफ वोट किया था, जबकि तीन सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था. इस लिहाज से  माओ के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता बन चुके हैं.

कब्जा बढ़ता जा रहा है चीन का:-

साउथ चाइना सी से लेकर चीन के वियतनाम,फ़िलीपीन्स,ताइवान,ब्रूनेई और मलेशिया नेई,और मलेशिया से विवाद हैं. ज्यादातर इलाकों पर चीन गैरकानूनी तरीके से अपना दावा बताता रहा हैं. चीन ने पिछले दिनों इस क्षेत्र में 7 आइलैंड, मिसाइल स्टेशन, हैंगर और रडार स्टेशन बना चुका हैं.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से ही चीन और अमेरिका के बीच साउथ चाइना सी को लेकर तनातनी का माहौल हैं. राष्ट्रपति के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान बराक ओबामा भी पहले साउथ चाइना सी पर चीन के बढ़ते कब्जे को लेकर विरोध जता चुके हैं. चीन वेस्टर्न पेसिफिक में अपने कब्जे से अमेरिका को हमेशा चुनौती देता रहा हैं.

प्रमुख बिंदु:-

  • जिनपिंग का कहना चीन नहीं देगा किसी को एक इंच भी जमीन.
  • अलगावादियों को चीन देगा सजा.
  • चीन अपना कब्जा बढ़ाते जा रहा.

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