जिंदगी का आखिरी पड़ाव, यानी कि श्‍मशान. यहां आने के बाद दुनिया की तमाम चीजें बेमांग-बेढंगी हो जाती हैं. पर इसी आखिरी पड़ाव पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मुर्दों को नोचकर उनमें जिंदगी तलाशते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं अघोरियों की जो इंसानी कि खोपड़ी को प्‍याला बनाकर उसमें में शराब पीते हैं. श्‍मशान को बिस्‍तार बनाकर चिता की चादर ओढ़ते हैं. वो मूर्दों से जिंदगी उधार लेते हैं लेकिन उनकी खुद की जिंदगी सदियों से रहस्‍य के पर्दे में है.

आपको शायद ही पता हो कि अघोरी बनने के लिए क्‍या-क्‍या करना पड़ता है. वैसे तो साधुओं के लिए मांस, मदिरा या शारीरिक संबंध जैसी चीजें पूरी तरह निषेध होती हैं लेकिन अघोरी बनने के लिए लाश पर पूजा करना, मांस खाना, मैथुन और मदिरा का सेवन करना अनिवार्य होता है. आप सुनकर दंग रह जाएंगे कि अघोरी मुर्दों के साथ संभोग भी करते हैं. तो आईए आपको विस्‍तार से बताते हैं कि अघोरी कैसे होते हैं.

लाश की पूजा  क्‍यों करते है अघोरी

श्‍मशान की साधाना में इंसानी चोलों को उतारकर फेंक देने वाले अघोरी मूर्दों में भगवान ढूंढते हैं. ऐसा करने से अघोरियों को अघोर दीक्षा की प्राप्‍ती होती है.

 

 

क्यों खाते है मांस

अघोरियों के दृष्टिकोण से मांस का सेवन यह साबित करता है कि सीमा शब्द उनके लिए मायने नहीं रखता और सब कुछ एक ही धागे से बंधा हुआ है. इसलिए वे इंसान के मांस के साथ-साथ उसके रक्त का भी सेवन करते हैं.

क्यों करते हैं मैथुन

अघोरी अपनी साधाना पूरी करने के लिए मैथुन (हस्‍तमैथुन) भी करते हैं. कई अघोरी तो अपनी साधना पूरी करने के लिए मृत शरीर के साथ संभोग भी करते हैं.

क्यों पीते हैं शराब

अघोरी अपने अराध्‍य को मदिरा अर्पण करते हैं और फिर प्रसाद के तौर पर उसका बेहिसाब सेवन करते हैं. आप सुनकर दंग रह जाएंगे कि अघोरी इंसानी खोपड़ी को प्‍याला बनाकर उसी में मदिरा सेवन करते हैं. वो जो कुछ भी खाते या पीते हैं वो सिर्फ इंसानी खोपड़ी में.

क्यों पीते हैं गांजा

अघोरी बाबाओ को गांजा पीते हम कही पर भी देख सकते है. ये गंजा उनकी तामसिकता को कम करती है. उनके लिए गांजा भगवान् शिव का प्रसाद है. जिसके माध्यम से वो भगवान् की भक्ति में मंत्र मुग्ध हो जातें हैं. जो उन्हें ध्यान के माध्यम से दिव्यता के करीब ले जाता है.

 

क्या आता है इनको काला जादू करना ?

तांत्रिक शक्तियां अघोरियों के पास हैं वे खुदको काले जादू में लिप्त कर लेते हैं  और कहा जाता है कि इसके लिए वे मजबूत मंत्रो का  जप करना शुरू करते हैं जिससे उनमें अलौकिक शक्तियां होती हैं. आघोरी साधु शैवा संप्रदाय से संबंधित हैं, अर्थात वे भगवान शिव के पूजक हैं. उनका मानना ​​है कि शिव ही एकमात्र शक्ति है जो दुनिया को नियंत्रित करती है और निर्वाण का अंतिम रास्ता शिव ही हैं.

ये अघोरी या तो हिमालय की ठंडे गुफाओं में रहते हैं. इसके अलावा, आप इन्हें बंगाल के जंगलों में देख सकते हैं जहां बाघों का बोलबाला होता है. वे गुजरात की अनारक्षित, निराधार, गर्म रेगिस्तान में रहना पसंद करते हैं जहां आपको किसी जीवित प्राणियों को देखना ही नामुमकिन लगे. पर ये अघोरी बाबा ऐसे ही वीराने में दुनिया से दूर अपनी हे दुनिया में भगवन की भक्ति में लींन रहते हैं. दुनिया के कामों से उनके झमेले से दूर अपनी ही दुनिया बना लेते हैं.

ये रहे वे अज्ञात अनुष्ठान जो भारत के इन आघोरी साधुओं द्वारा किये जातें है. हालांकि भारत अजीबो-गरीब कहानियों और अनुष्ठानों से भरा हुआ है. लेकिन फिर भी, यह ऐसा कुछ है जो अछूता है और हम में से बहुत से लोग इसे नहीं जानते हैं.

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